पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सरकार ने निर्यात केंद्रित उपायों का किया विस्तार
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। सरकार ने भू-राजनीतिक तनाव और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच निर्यातकों की मदद के लिए रिलीफ स्कीम और एक्सपोर्ट किए गए प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी और टैक्स में छूट (आरओडीटीईपी) स्कीम की समय-सीमा बढ़ा दी है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी आधिकारिक बयान में दी गई।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, वाणिज्य विभाग ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत शुरू की गई रिलीफ (आरईएलआईईएफ -- रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन) योजना के दूसरे हिस्से के लिए समय-सीमा बढ़ा दी है।
मंत्रालय ने कहा कि रिलीफ का दूसरा हिस्सा निर्यातकों को कुछ खास इलाकों में होने वाले अगले शिपमेंट के लिए ईसीजीसी कवर लेने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिसमें 95 प्रतिशत रिस्क कवर मिलता है।
यह सुविधा 16 मार्च, 2026 या उसके बाद ली गई स्टैंड-अलोन पॉलिसी या होल टर्नओवर पॉलिसी के लिए उपलब्ध है।
इसमें योग्य कार्गो के तौर पर फुल कंटेनर लोड (एफसीएल), लेस-दैन-कंटेनर लोड (एलसीएल) और रीफर कंटेनर शामिल हैं, लेकिन एनर्जी शिपमेंट इसमें शामिल नहीं हैं।
सरकार के अनुसार, इस सुविधा के तहत, योग्य अवधि के लिए निर्यातकों द्वारा चुकाए जाने वाले प्रीमियम को रुकावट से पहले के स्तर से ज्यादा नहीं बढ़ाया जाएगा।
रिलीफ स्कीम 19 मार्च को शुरू की गई थी। इसका मकसद उन भारतीय निर्यातकों की मदद करना था जो मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में मौजूद मैरीटाइम कॉरिडोर में रुकावटों के कारण ज्यादा माल परिवहन लागत, बढ़े हुए इंश्योरेंस प्रीमियम और युद्ध से जुड़े निर्यात जोखिम से प्रभावित हुए थे।
मंत्रालय ने कहा कि इस विस्तार का मकसद भू-राजनीतिक और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लगातार अनिश्चितताओं के बीच निर्यात की क्षमता को बनाए रखना और ट्रेड फ्लो को जारी रखना है।
इसके अलावा, सरकार ने आरओडीटीईपी स्कीम को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया। यह स्कीम डोमेस्टिक टैरिफ एरिया यूनिट्स, एडवांस ऑथराइजेशन होल्डर्स, स्पेशल इकोनॉमिक जोन यूनिट्स और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स के निर्यात के लिए उपलब्ध रहेगी।
आरओडीटीईपी निर्यात किए गए उत्पादों पर लगने वाले उन सेंट्रल, स्टेट और लोकल ड्यूटी, टैक्स और लेवी का रिफंड देता है जिन पर पहले छूट नहीं मिली है। इसमें पहले के स्टेज के कुल अप्रत्यक्ष कर भी शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा, 30 सितंबर को लागू अपेंडिक्स 4आर और अपेंडिक्स 4आरई में बताए गए मौजूदा आरओडीटीईपी रेट और वैल्यू कैप इस अवधि के दौरान बिना किसी बदलाव के लागू रहेंगे।
सरकार के अनुसार, यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले निर्यातकों के लिए समान अवसर बनाने में मदद करेगा।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप बजटिंग को मजबूत बनाने के लिए नीति आयोग ने आयोजित की राष्ट्रीय कार्यशाला
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। नीति आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के तकनीकी समर्थन से कोलकाता में सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) बजटिंग पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्यशाला नीति आयोग के स्टेट सपोर्ट मिशन के तहत आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य राज्यों की योजना और बजट प्रक्रियाओं को सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप बनाना और राज्य स्तर पर एसडीजी बजट टैगिंग को संस्थागत स्वरूप देना था।
कार्यशाला में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि एसडीजी बजट टैगिंग विकास लक्ष्यों, निर्धारित लक्ष्यों, बजट आवंटन और खर्च के लिए जिम्मेदार एजेंसियों के बीच स्पष्ट संबंध स्थापित करने में मदद करती है। इससे यह समझने में आसानी होती है कि सरकारी व्यय किस प्रकार विकास प्राथमिकताओं को समर्थन दे रहा है।
नीति आयोग के सदस्य आर. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि राज्य सरकारों के खर्च को एसडीजी के साथ मैप करना एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सार्वजनिक व्यय वास्तव में उन क्षेत्रों में किया जाए जो समावेशी और सतत विकास के लिए आवश्यक हैं।
कार्यशाला के दौरान राज्य के बजट को एसडीजी से जोड़ने के लिए गाइड पर भी चर्चा हुई, जिसे नीति आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) और यूएनडीपी ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। यह मार्गदर्शिका राज्यों के बजट को सतत विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ने के लिए एक व्यावहारिक रूपरेखा प्रदान करती है।
चर्चा में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि एसडीजी टैगिंग के लिए किन व्ययों की पहचान की जाए, टैगिंग का उचित स्तर क्या हो, व्यय को संबंधित लेखा शीर्षों और एसडीजी लक्ष्यों से किस प्रकार जोड़ा जाए तथा नीति आयोग की योजना-एसडीजी मैपिंग प्रणाली के माध्यम से मूल्यों का निर्धारण कैसे किया जाए।
प्रतिभागियों ने वार्षिक बजट प्रक्रिया में एसडीजी बजटिंग को शामिल करने से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया, जिनमें संस्थागत जिम्मेदारियां, व्ययों का मिलान, गुणवत्ता आश्वासन, रिपोर्टिंग प्रणाली और प्रदर्शन ऑडिट जैसे पहलू शामिल थे।
कार्यशाला में 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा नीति आयोग, सीएजी, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) और विभिन्न सरकारी संस्थानों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
यूएनडीपी, संयुक्त राष्ट्र रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर कार्यालय, विकास भागीदार संस्थाओं, उद्योग संगठनों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। एक विशेष सत्र में निजी क्षेत्र की भूमिका पर चर्चा की गई, जिसमें नीति ढांचे, नवाचारी वित्तपोषण और जिम्मेदार व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से एसडीजी की प्राप्ति में योगदान को रेखांकित किया गया।
नीति आयोग ने कहा कि यह कार्यशाला राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को उनकी योजना, बजट और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सतत विकास लक्ष्यों को प्रभावी रूप से शामिल करने में सहायता देने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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