बांग्लादेश बजट: स्वास्थ्य और शिक्षा पर सबसे बड़ी कटौती, एडीपी में भारी कमी
नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद (एनईसी) ने चालू वित्त वर्ष के मध्य में वार्षिक विकास कार्यक्रम (एडीपी) की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों के बजट में बड़ी कटौती की है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एडीपी के कुल आकार में लगभग 12.5 प्रतिशत की कमी की गई है।
संशोधित एडीपी के तहत कुल आवंटन घटाकर 2,08,935 करोड़ टका कर दिया गया है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.3 प्रतिशत है। पहले यह 2,30,000 करोड़ टका (जीडीपी का 3.7 प्रतिशत) था। यह जानकारी बांग्लादेश के अंग्रेज़ी दैनिक द डेली स्टार की रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में कटौती के प्रमुख कारणों में धीमी खर्च दर, राजस्व संग्रह उम्मीद से कम रहना, विदेशी फंडिंग का धीमा प्रवाह और पर्याप्त परियोजनाओं की कमी शामिल हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र को सबसे बड़ा झटका लगा है। इसके लिए मूल रूप से तय 18,148 करोड़ टका के आवंटन में 74 प्रतिशत की कटौती की गई है। वहीं, माध्यमिक और उच्च शिक्षा क्षेत्र का बजट भी 28,557 करोड़ टका से घटाकर 55 प्रतिशत कम कर दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में इन दोनों प्रमुख सामाजिक क्षेत्रों की कार्यान्वयन दर बेहद कम रही, जिसके चलते एनईसी ने धन के कम उपयोग की आशंका को देखते हुए बजट घटाने का फैसला लिया। इसका उद्देश्य वर्ष के अंत तक एडीपी की कुल कार्यान्वयन दर में सुधार करना है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अल्पकालिक तौर पर यह कदम तर्कसंगत लग सकता है, लेकिन स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही कमजोर कार्यान्वयन प्रक्रिया के मूल कारणों का गहन आकलन जरूरी है, ताकि भविष्य में इन अहम सामाजिक क्षेत्रों का प्रदर्शन सुधारा जा सके।
संशोधित एडीपी में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बजट में भारी कटौती से कैंसर, किडनी और हृदय रोगों जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में देरी हो सकती है। वहीं, शिक्षा बजट में कटौती से अधिक बच्चों के स्कूल छोड़ने का खतरा बढ़ सकता है।
संशोधित वार्षिक विकास कार्यक्रम (आरएडीपी) में कुल 1,330 परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें 1,108 निवेश परियोजनाएं, 35 व्यवहार्यता अध्ययन और 121 तकनीकी सहायता परियोजनाएं हैं। इसके अलावा, 66 परियोजनाएं स्वायत्त निकायों और निगमों द्वारा अपने स्वयं के संसाधनों से लागू की जा रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय सरकार प्रभाग को आरएडीपी में सबसे अधिक 37,534 करोड़ टका का आवंटन मिला है। इसमें सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम, बुनियादी ढांचा विकास और नगर निगमों, नगरपालिकाओं तथा यूनियनों में संचालन व रखरखाव से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत-ईयू एफटीए बड़ा गेम चेंजर, अगले तीन वर्षों में बदल जाएगा कपड़ा और परिधान क्षेत्र का नक्शा : इंडस्ट्री
मुंबई, 29 जनवरी (आईएएनएस)। भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) ट्रेड डील देश के कपड़ा और परिधान क्षेत्र के लिए एक बड़ा गेम चेंजर समझौता है। इससे अगले दो से तीन वर्षों में उद्योग का पूरा नक्शा बदल जाएगा। यह जानकारी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने गुरुवार को दी।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन प्रेमल उदानी ने कहा कि यह समझौता देश के कपड़ा और परिधान उद्योगों के लिए एक बड़ा गेम चेंजर साबित होगा। इससे अगले दो-तीन वर्षों में टेक्सटाइल इंडस्ट्री का नक्शा बदल जाएगा। इससे कपड़ा और परिधान का 30-40 प्रतिशत अगले दो वर्षों में ही बढ़ जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि इस डील से यूरोप में भारतीय कपड़े और परिधान पर लगने वाली 11 प्रतिशत की ड्यूटी तुरंत समाप्त हो जाएगी। इससे देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इससे हम बांग्लादेश जैसे देशों को यूरोपीय बाजार में कड़ी टक्कर दे पाएंगे।
एईपीसी के सदस्य रामू आर ने कहा कि इस समझौते से देश को बड़े स्तर पर लाभ होगा। बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होंगे। तिरुपुर जैसे निर्यातक क्षेत्र को एक लाख करोड़ रुपए के निर्यात का लक्ष्य पाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का ऐलान किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह एफटीए केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट है।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि इस एफटीए में ईयू के 27 देश शामिल हैं। साथ ही इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बताया।
प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, यह ऐतिहासिक समझौता हमारे किसानों और हमारे छोटे उद्योगों के लिए यूरोपीय मार्केट तक पहुंच को आसान बनाएगा, मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा और हमारे सर्विसेज सेक्टर के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा।
इसके अलावा, यह एफटीए भारत और यूरोपीय संघ के बीच निवेश को बढ़ावा देगा, नए नवाचार साझेदारियों को प्रोत्साहित करेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा। यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा समृद्धि का खाका प्रस्तुत करता है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation














.jpg)






