Voter List विवाद पर Mumbai के Shivaji Park में CJP का विरोध, भारी पुलिस बल हुआ तैनात
मुंबई में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शन से पहले, शुक्रवार को शिवाजी पार्क के आस-पास बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए। CJP यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए कर रही है; यह मांग मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर की जा रही है। कुछ स्थानीय निवासियों ने भी पार्क का इस्तेमाल विरोध प्रदर्शन की जगह के तौर पर किए जाने पर आपत्ति जताई, क्योंकि इससे उन्हें परेशानी हो सकती थी। CJP ने एक बयान में कहा कि यह प्रदर्शन शाम 4 बजे छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क के गेट नंबर 6 पर होगा। शबाना आज़मी और विशाल ददलानी जैसी मशहूर हस्तियों के भी इस प्रदर्शन में शामिल होने की उम्मीद है। CJP ने नागरिकों से इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। यह प्रदर्शन अक्टूबर महीने के दौरान पूरे देश में होने वाले विरोध प्रदर्शनों और जन-लामबंदी की एक श्रृंखला की शुरुआत होगी। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि यह अभियान आखिरकार नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन के साथ समाप्त होगा।
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CJP, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग क्यों कर रहा है?
CEC ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग से जुड़े एक विवाद के केंद्र में हैं। यह विवाद 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक खोजी रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां जताई थीं। दीपके ने दावा किया कि 2024 के बाद से वोटर लिस्ट से लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने इन नामों को हटाने की प्रक्रिया को 2024 के लोकसभा चुनावों में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) और विपक्षी INDIA गठबंधन के बीच वोट-शेयर के कम अंतर से जोड़ा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। इन दावों को खारिज करते हुए, चुनाव आयोग ने शनिवार को कहा कि वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) सहित सभी अहम फैसले पूरे आयोग ने सर्वसम्मति से लिए थे।
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'ज्ञानेश कुमार गद्दार हैं'
मुंबई प्रेस क्लब में बातचीत के दौरान, दिपके ने कुमार के इस्तीफ़े की मांग की और चेतावनी दी कि अगर वे पद नहीं छोड़ते हैं, तो CJP पूरे देश में अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रखेगा। दिपके ने कहा ज्ञानेश कुमार गद्दार हैं। जब तक वे अपने पद से इस्तीफ़ा नहीं देते, हम जंतर-मंतर से नहीं हटेंगे। ज्ञानेश कुमार को इस्तीफ़ा देना चाहिए और उन पर आपराधिक आरोप लगने चाहिए। CJP नेता ने विरोध-प्रदर्शन की अनुमति न देने के मुंबई पुलिस के फ़ैसले पर भी सवाल उठाए। दिपके ने कहा कि अगर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शिवाजी पार्क में राजनीतिक रैली कर सकते हैं, तो CJP को भी वहाँ विरोध-प्रदर्शन करने की अनुमति मिलनी चाहिए। CJP नेता ने कहा, "मुझे जेल जाने से डर नहीं लगता। मैं बार-बार विरोध-प्रदर्शन करने के लिए वापस आऊँगा।
पश्चिम बंगाल, यूपी, बिहार, झारखंड और गोवा में विरोध-प्रदर्शन
CJP नेता अजिंक्य शिंदे ने कहा कि इस अभियान को गोवा, बेंगलुरु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पटना और रांची समेत कई अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। शिंदे ने कहा, "गोवा, बेंगलुरु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पटना और रांची में विरोध-प्रदर्शन किए जाएंगे। अगर कुमार इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो अक्टूबर के आखिर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। आंदोलन ने यह भी कहा है कि वह स्वतंत्र रहेगा और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के 6 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शन में शामिल नहीं होगा।
जी20 क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा विनिर्माण क्षमता नहीं रखता भारत: Piyush Goyal
नयी दिल्ली, दो अक्टूबर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत में संरचनात्मक रूप से जरूरत से अधिक विनिर्माण क्षमता नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की विनिर्माण क्षमता घरेलू और वैश्विक, दोनों जरूरतों को पूरा करती है। वर्ष 2026 में जी20 की अध्यक्षता अमेरिका कर रहा है।
उन्होंने साथ ही कहा कि औद्योगिक क्षमता अपने आप में कोई समस्या नहीं है। हालांकि, अगर उत्पादन भौगोलिक रूप से कुछ क्षेत्रों में छिपी हुई सब्सिडी और सहायता के कारण केंद्रित होता है, तो इससे विकृतियां पैदा हो सकती हैं। मंत्री ने कहा कि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना एक वैध उद्देश्य है, लेकिन इसे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों से बाहर के उपायों या विकासशील देशों पर समायोजन का बोझ डालने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
विकासशील देशों को औद्योगीकरण के लिए नीतिगत गुंजाइश बनाए रखने की जरूरत है। गोयल ने कहा, ‘‘भारत की विनिर्माण क्षमता उसकी घरेलू और वैश्विक जरूरतों को पूरा करती है और जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत में संरचनात्मक रूप से जरूरत से अधिक क्षमता नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि भारत जी20 के कई सदस्यों की इस चिंता को साझा करता है कि कुछ देशों में व्यापार को विकृत करने वाली सहायता से डंपिंग और अनुचित रूप से कम कीमत पर सामान बेचने की स्थिति पैदा होती है। भारत साक्ष्य आधारित डब्ल्यूटीओ उपायों, जिनमें डंपिंग रोधी और प्रतिकारी शुल्क शामिल हैं, के जरिये ऐसी गतिविधियों से निपटता है।
ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने 11 और 12 मार्च को अलग-अलग धारा 301 जांच शुरू की थी। बंधुआ मजदूरी और जरूरत से अधिक औद्योगिक क्षमता से जुड़ी चिंताओं को लेकर यह जांच 60 देशों के खिलाफ की जा रही है। बंधुआ मजदूरी से संबंधित एक जांच पूरी हो चुकी है और भारत समेत कुछ देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है।
दूसरी जांच के अंतिम निष्कर्ष अभी आने बाकी हैं। अमेरिका ने इस्पात, कपड़ा, एल्युमीनियम, वाहन, बैटरी, सीमेंट, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा उत्पाद, कांच, मशीन टूल्स, मशीनरी, अलौह धातु, कागज, प्लास्टिक, प्रसंस्कृत खाद्य एवं पेय पदार्थ, रोबोटिक्स, उपग्रह, सेमीकंडक्टर, जहाज, सौर मॉड्यूल और परिवहन उपकरण जैसे क्षेत्रों में जरूरत से अधिक क्षमता का मुद्दा उठाया है। वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में गोयल के हवाले से कहा, ‘‘भारत कई सदस्यों की इस चिंता को साझा करता है कि कुछ देशों में व्यापार की स्थिति बिगाड़ने वाली सहायता से डंपिंग और अनुचित रूप से कम कीमत पर सामान बेचने की स्थिति पैदा होती है और भारत साक्ष्य के आधार पर डब्ल्यूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) के उपायों, जैसे डंपिंग रोधी और प्रतिकारी शुल्क के जरिये इससे निपटता है, जिनकी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।’’ उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है।
इसकी अर्थव्यवस्था घरेलू मांग से संचालित है और 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को पूरा करती है। साथ ही, भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक भरोसेमंद कड़ी के रूप में डिजाइन से लेकर तैयार माल तक विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाएं विकसित कर रहा है। गोयल ने विस्कॉन्सिन के मिल्वॉकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के अंतिम दिन हिस्सा लिया।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बंधुआ मजदूरी समाप्त करने के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि इसको खत्म करने के लिए भारत बिना किसी शर्त के पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। गोयल ने साथ ही दो-स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली को बहाल करने की भी मांग की।
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