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आतंकवाद और संभावित सशस्त्र संघर्ष की वजह से पाकिस्तान की यात्रा पर फिर से करें विचार : अमेरिका

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन, 29 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी विभाग ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए पाकिस्तान जाने की योजना बना रहे अमेरिकी नागरिकों से अपने प्लान पर फिर से विचार करने के लिए कहा है। पाकिस्तान की स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

अपनी लेटेस्ट एडवाइजरी में अमेरिकी राज्य विभाग ने यात्रियों को अपराध, आतंकवाद और अपहरण के खतरे की वजह से पाकिस्तान जाने से पहले दो बार सोचने की सलाह दी है।

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने रिपोर्ट किया, पाकिस्तान को लेवल 3 एडवाइजरी में रखा गया है, यह एक ऐसी कैटेगरी है जो हाई रिस्क दिखाती है, जहां बिना किसी वॉर्निंग के आतंकवादी हमले हो सकते हैं। स्टेट डिपार्टमेंट के मुताबिक, आम टारगेट में ट्रांसपोर्टेशन हब, होटल, मार्केट, शॉपिंग मॉल, सेना और सुरक्षा साइट, एयरपोर्ट, ट्रेन, स्कूल, हॉस्पिटल, पूजा की जगहें, पर्यटन वाली जगहें और सरकारी बिल्डिंग शामिल हैं।

खैबर पख्तूनख्वा के कुछ हिस्सों समेत कुछ इलाकों को स्तर 4 में रखा गया है, इसका मतलब यहां की यात्रा नहीं करने को कहा गया है। एडवाइजरी में अमेरिकी नागरिकों से किसी भी वजह से लेवल 4 एरिया में ट्रैवल न करने की अपील की गई है, जिसमें वॉर्निंग दी गई है कि हत्या और अपहरण की कोशिशें आम हैं, खासकर सरकारी अधिकारियों और आम नागरिकों के खिलाफ।

डॉन के अनुसार यह चेतावनी पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिकों पर भी लागू होती है। अमेरिकी एडवाइजरी में आगे कहा गया, आतंकवाद और अपहरण की वजह से बलूचिस्तान प्रांत और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत, जिसमें पहले का फेडरली एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरिया (एफएटीए) भी शामिल है, की यात्रा न करें।

इसमें आगे बताया गया कि हिंसक चरमपंथी समूहों ने पाकिस्तान में हमले किए हैं। आतंकवादी हमले आम तौर पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में होते हैं, जिसमें पहले का एफएटीए भी शामिल है, लेकिन ये कराची और इस्लामाबाद जैसे बड़े शहरों में भी हुए हैं।

अमेरिकी राज्य विभाग ने बताया कि स्थानीय कानून बिना परमिट के विरोध या प्रदर्शन करने पर रोक लगाता है। इसमें कहा गया, किसी विरोध के पास होने पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की नजर पड़ सकती है। विरोध में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है। आपको सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सरकार, सेना या अधिकारियों की बुराई करने वाला कंटेंट पोस्ट करने पर भी हिरासत में लिया जा सकता है।

इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी राज्य विभाग के प्रवक्ता ने ऐलान किया कि ट्रंप सरकार 21 जनवरी से 75 देशों के आवेदकों के लिए इमिग्रेंट वीजा की प्रक्रिया सस्पेंड कर रही है। इसका असर अफ्रीका, मिडिल ईस्ट, कैरिबियन और लैटिन अमेरिका, बाल्कन क्षेत्र और दक्षिण एशिया के कुछ देशों के आवेदकों पर पड़ेगा, जिनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश भी शामिल हैं।

अमेरिकी वीजा पर रोक के ऐलान पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए, पाकिस्तान के फॉरेन ऑफिस ने उम्मीद जताई है कि यह सस्पेंशन तत्कालीन है, और जल्द ही नॉर्मल प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकती है। तब तक आवेदन का बैकलॉग बढ़ने की उम्मीद है।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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बांग्लादेश में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चिंताओं के लिए प्रशासनिक विफलताएं और नीतिगत खामियां जिम्मेदार: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में आम चुनाव में अब महज दो सप्ताह का समय बचा है और इस बीच राजनीतिक माहौल बेहद गर्म हो गया है। चुनाव से पहले ही देश के भीतर राजनीतिक नेता, पर्यवेक्षक, मीडिया और नागरिक समाज के विभिन्न वर्ग प्रशासनिक विफलताओं और नीतिगत खामियों को लेकर खुलकर चिंता जता रहे हैं। राजनीतिक तनाव, धार्मिक असहिष्णुता, आर्थिक असुरक्षा और सिमटता नागरिक दायरा- ये सभी मिलकर गंभीर संकट का संकेत दे रहे हैं।

गुरुवार को ढाका ट्रिब्यून के एक संपादकीय में बांग्लादेश में “मीडिया स्वतंत्रता के सिमटने के चेतावनी संकेतों” पर चिंता व्यक्त की गई। अखबार ने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि मीडिया संस्थानों पर लक्षित हमलों को लेकर और अधिक आक्रोश सामने आना चाहिए। संपादकीय में कहा गया, “जब मीडिया को सेंसरशिप, दबाव और डर के बिना काम करने की अनुमति मिलती है, तो नागरिक बेहतर रूप से सूचित होते हैं और सार्वजनिक विमर्श मजबूत होता है।”

देश का मीडिया कई आपस में जुड़ी समस्याओं को उजागर कर रहा है, धीमी होती अर्थव्यवस्था, बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता और उग्र राजनीतिक बयानबाजी, लैंगिक समानता के मोर्चे पर झटके, तथा मीडिया स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आज़ादी और कानून के समान प्रयोग को लेकर बढ़ती चिंताएं।

रिपोर्टों और संपादकीयों में ठहरी हुई आर्थिक वृद्धि, बढ़ती महंगाई और हालिया नीतिगत फैसलों से राहत न मिलने की बात कही गई है, जिससे चुनाव नजदीक आते ही परिवारों और कारोबारियों में बेचैनी बढ़ रही है।

चिंताओं को और बढ़ाते हुए मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी कि व्यापक दस्तावेज़ी धोखाधड़ी के कारण बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय साख को नुकसान पहुंच रहा है। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, उन्होंने बांग्लादेश को “धोखाधड़ी का विश्व चैंपियन” तक कह दिया और कहा कि फर्जी प्रमाणपत्रों और पासपोर्ट के कारण विदेशों में नागरिकों को परेशानी हो रही है।

महिलाओं के मुद्दों पर भी राजनीतिक वादों और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ती खाई की ओर ध्यान दिलाया जा रहा है। अधिकार कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा, समान वेतन, चाइल्डकेयर सुविधाओं, न्याय तक पहुंच और राजनीतिक जीवन में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी पर सवाल उठाए हैं।

ढाका स्थित द डेली स्टार ने लिखा कि 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव की ओर बढ़ते बांग्लादेश में, मतदाताओं का आधा हिस्सा होने के बावजूद महिलाएं अब राजनीतिक बयानबाजी से प्रभावित नहीं हो रही हैं। अखबार ने हाल में देखी गई भीड़ की हिंसा का भी जिक्र किया।

अखबार ने विभिन्न पेशों और पृष्ठभूमि की 20 महिलाओं से बातचीत के बाद बताया कि बढ़ती हिंसा, सिमटता नागरिक क्षेत्र, नौकरियों का नुकसान, आर्थिक असुरक्षा, महिलाओं के स्वास्थ्य की अनदेखी और महिला मामलों के सुधार आयोग की 423 सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डालने से वादों और अमल के बीच की दूरी और बढ़ गई है, जिसका खामियाजा महिलाओं को रोजमर्रा की जिंदगी में भुगतना पड़ रहा है।

इस बीच, चुनाव प्रचार और पार्टी बैठकों से जुड़ी रिपोर्टों में धार्मिक बयानबाजी और पहचान की राजनीति को प्रभावी चुनावी हथियार के रूप में उभरते हुए दिखाया जा रहा है। अल्पसंख्यकों के खिलाफ भीड़ की हिंसा और लिंचिंग की घटनाएं लगातार सुर्खियों में हैं। दिसंबर में दीपू दास को फांसी पर लटकाकर जलाने की भयावह घटना ने दुनिया को झकझोर दिया था।

--आईएएनएस

डीएससी

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