Bollywood अभिनेता Kay Kay Menon का 60वां जन्मदिन, Theatre से लेकर OTT तक ऐसा रहा सफर
बॉलीवुड के मंझे हुए अभिनेता के के मेनन आज यानी की 02 अक्टूबर को अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। फिल्मों में आने से पहले वह थिएटर करते थे, जहां पर उन्होंने अपने अभिनय को निखारा। इसके बाद उन्होंने टीवी और फिर ओटीटी और बॉलीवुड फिल्मों में अपना जादू चलाया। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर अभिनेता के के मेनन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
केरल के तिरुवनंतपुरम में 2 अक्टूबर 1966 को के के मेनन का जन्म हुआ था। इनका पूरा नाम कृष्णा कुमार मेनन है। इनकी परवरिश महाराष्ट्र के पुणे शहर में हुई थी और इन्होंने यहीं से अपनी पढ़ाई भी पूरी की। के के मेनन ने एमबीए किया और मुंबई से फिजिक्स में बैचलर डिग्री हासिल की।
थिएटर से की एक्टिंग की शुरूआत
कॉलेज में पढ़ाई खत्म करने के बाद केके मेनन ने एक एड कंपनी में नौकरी की। वहीं उनके अभिनय करियर की शुरूआत थिएटर से हुई। थिएटर में उनको पहली बार जाने-माने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करने का मौका मिला। इस दौरान उन्होंने नसीरुद्दीन के नाटक 'महात्मा वर्सेज गांधी' काम किया। फिर वह सालों तक थिएटर से जुड़कर काम करते रहे।
टीवी डेब्यू
थिएटर में अच्छा-खासा एक्सपीरियंस होने के बाद उनको टीवी में काम करने का मौका मिला। केके मेनन की सीरियल 'डर' से छोटे पर्दे पर शुरूआत हुई। इस सीरियल में अभिनेता ने इंस्पेक्र अविनाश का रोल निभाया था। फिर अभिनेता ने प्रधानमंत्री नाम के शो में काम किया था। केके मेनन ने छोटे पर्दे पर 'प्रधानमंत्री टाइम बम', 'सैटरडे सस्पेंस' और 'स्टार बेस्ट सेलर', जैसे शो में काम किया। इसके अलावा साल 1999 में उन्होंने अनुराग कश्यप के डायरेक्शन में बनी शॉर्ट फिल्म 'लास्ट ट्रेन टू महाकाली' में भी काम किया।
बॉलीवुड में बनाई पहचान
फिल्म 'नसीम' से केके मेनन ने बॉलीवुड में कदम रखा। लेकिन अभिनेता को असली पहचान फिल्म सत्या से मिली थी। इसके बाद उन्होंने साल 1998 में आई फिल्म 'बॉम्बे बॉयज' में काम किया। फिर वह कई फिल्मों में नजर आए। उन्होंने 'बेबी', 'गाजी अटैक', 'लाइफ इन ए मेट्रो', 'सरकार', 'ब्लैक फ्राइडे', 'गुलाल' और 'हैदर' सहित कई शानदार फिल्मों में नजर आए और उन्होंने खुद को एक बेहतरीन अभिनेता के तौर पर इंडस्ट्री में साबित किया।
ओटीटी पर चलाया जादू
केके मेनन ओटीटी पर भी अपने बेहतरीन अभिनय की छाप छोड़ चुके हैं। हॉटस्टार की 'स्पेशल ऑप्स' वेब सीरीज में केके मेनन ने हिम्मत सिंह नाम के रोल से दर्शकों का दिल जीता। इसके अलावा कॉमेडी शो 'आदर्श बाल विद्यालय' में भी उनके किरदार को काफी पसंद किया गया।
Dadasaheb Phalke Award विजेता Asha Parekh का 84वां Birthday, हिंदी सिनेमा में दिया बड़ा योगदान
हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री आशा पारेख का आज यानी की 02 अक्टूबर को अपना 84वां जन्मदिन मना रही हैं। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में एक्टिंग, डांस और स्क्रीन पर अपनी खास मौजूदगी से दर्शकों के दिलों में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। हालांकि उनका यह सफर इतना आसान नहीं रहा। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर एक्ट्रेस आशा पारेख के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
मुंबई के सांता क्रूज में 02 अक्टूबर 1942 को आशा पारेख का जन्म हुआ था। उनको बचपन से ही डांस में दिलचस्पी थी। ऐसे में 8 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल में एक कार्यक्रम में डांस किया था। फिर आशा पारेख ने कथक और भरतनाट्यम की ट्रेनिंग भी ली।
फिल्मी सफर
निर्देशक बिमल रॉय ने आशा पारेख को एक स्टेज कार्यक्रम में डांस करते देखा। वह उनके डांस से इस कदर प्रभावित हुए कि आशा पारेख को फिल्म 'बाप बेटी' में बतौर बाल कलाकार काम करने का मौका दिया। इसके बाद उन्होंने फिल्म 'आसमान', 'मां' और 'श्री चैतन्य महाप्रभु' जैसी फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया।
एक फिल्म से कर दिया गया बाहर
एक्ट्रेस के फिल्मी करियर का एक अहम मोड़ फिल्म 'गूंज उठी शहनाई' से जुड़ा है। इस फिल्म में आशा पारेख को बतौर एक्ट्रेस साइन किया गया और 11 रुपए उनको साइनिंग अमाउंट के रूप में दिए गए। इस फिल्म को लेकर एक्ट्रेस काफी उत्साहित भी थीं। लेकिन कुछ दिनों की शूटिंग के बाद उनको यह कहकर फिल्म से कहा दिया गया कि वह 'स्टार मैटीरियल' नहीं हैं। यह घटना एक्ट्रेस के लिए बड़ा झटका थी।
इस फिल्म से बदली किस्मत
फिल्म 'गूंज उठी शहनाई' से बाहर होने के बाद एक्ट्रेस ने फिल्म 'दिल देके देखो' के लिए स्क्रीन टेस्ट दिया। इस फिल्म में आशा को शम्मी कपूर के साथ मुख्य कैरेक्टर मिल गया। यह फिल्म सफल रही और आशा पारेख को बतौर एक्ट्रेस पहचान मिली। इसके बाद उनके करियर ने रफ्तार पकड़ ली और उनको कभी पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी।
इन फिल्मों से मिली पहचान
साल 1960 और 1970 के दशक में आशा पारेख को हिंदी सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में गिना जाने लगा। अभिनेत्री ने 'जब प्यार किसी से होता है', 'लव इन टोक्यो', 'मेरे सनम', 'तीसरी मंजिल', 'आन मिलो सजना', 'आए दिन बहार के', 'कटी पतंग', 'मेरा गांव मेरा देश', 'उपकार', 'कारवां' जैसी फिल्मों में काम किया था। फिल्म 'कटी पतंग' में अभिनेत्री के अभिनय को काफी ज्यादा पसंद किया गया। इस फिल्म के लिए आशा पारेख को फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला।
सम्मान
अभिनेत्री आशा पारेख को हिंदी सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई बड़े सम्मान से नवाजा गया। साल 1992 में उनको 'पद्मश्री' और साल 2002 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके बाद साल 2020 में भारत सरकार द्वारा आशा पारेख को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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