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Prabhasakshi NewsRoom: DRDO के Kaveri Engine ने Russia में पास किये सारे परीक्षण, अब भारत के Ghatak Drone से जुड़कर दुश्मनों के छुड़ाएगा छक्के

भारत के स्वदेशी रक्षा अभियान को बड़ी ताकत मिली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का कावेरी इंजन रूस में ऊंचाई और उड़ान से जुड़े कठिन परीक्षणों में सफल साबित हुआ है। परीक्षण के दौरान इंजन ने 48.5 किलो न्यूटन का अधिकतम ड्राई थ्रस्ट हासिल किया, जो तय लक्ष्य से भी ज्यादा है। अब इस इंजन को भारत के गुप्त युद्धक मानवरहित विमान ‘घातक’ में लगाने की तैयारी है। अगर आगे के प्रमाणन और उड़ान परीक्षण भी सफल रहे, तो आने वाले दो से तीन वर्षों में ‘घातक’ भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में एक नई धार जोड़ सकता है।

देखा जाये तो यह सफलता सिर्फ एक इंजन के परीक्षण में सफल होने की खबर नहीं है। इसके पीछे भारत की कई दशकों पुरानी वह कोशिश है, जिसमें देश विदेशी इंजनों पर निर्भरता कम करके अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और युद्धक प्रणालियों के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करना चाहता है।

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हम आपको बता दें कि कावेरी इंजन परियोजना की शुरुआत अस्सी के दशक के आखिर में हुई थी। इसका मूल लक्ष्य स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस को ताकत देना था। लेकिन कावेरी इंजन जरूरी थ्रस्ट-टू-वेट रेशियो हासिल नहीं कर सका और इसका वजन भी अपेक्षा से अधिक रहा। इसी वजह से इसे तेजस के उत्पादन वाले संस्करण में इस्तेमाल नहीं किया जा सका। लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने परियोजना को बंद करने की बजाय इसका रास्ता बदल दिया। इंजन में लगे आफ्टरबर्नर को हटा दिया गया और इसका एक हल्का, बिना आफ्टरबर्नर वाला संस्करण तैयार किया गया। इसे कावेरी डेरिवेटिव इंजन यानी केडीई कहा गया। अब यही इंजन ‘घातक’ को ताकत देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हम आपको बता दें कि कावेरी इंजन ने रूस के दो प्रमुख संस्थानों सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन मोटर्स और ग्रोमोव फ्लाइट रिसर्च इंस्टीट्यूट में परीक्षण पूरे किए। इन परीक्षणों में इंजन ने 48.5 किलो न्यूटन का ड्राई थ्रस्ट हासिल किया, जबकि इससे करीब 46 किलो न्यूटन थ्रस्ट मिलने की उम्मीद थी। अब इसके सभी परीक्षण आंकड़ों की जांच बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दीनेस एंड सर्टिफिकेशन करेगा। इसके बाद इंजन को ‘घातक’ में लगाने, प्रमाणन हासिल करने और भारतीय वायुसेना के सहयोग से उड़ान परीक्षण करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

देखा जाये तो ‘घातक’ अपने आप में भारत की भविष्य की वायु युद्ध क्षमता का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। यह टेललेस फ्लाइंग-विंग डिजाइन वाला जेट संचालित स्टेल्थ मानवरहित युद्धक विमान है। इसकी घुमावदार एयर इनटेक प्रणाली और विशेष आकार के एग्जॉस्ट इसे दुश्मन के रडार से छिपाने में मदद करेंगे। इसके ढांचे में करीब 80 से 90 प्रतिशत कार्बन-फाइबर प्रीप्रेग कंपोजिट सामग्री के इस्तेमाल की योजना है। इससे विमान का वजन कम करने के साथ-साथ उसकी रडार क्रॉस सेक्शन क्षमता को भी कम करने में मदद मिलेगी। यानी दुश्मन के रडार के लिए ‘घातक’ को पहचानना आसान नहीं होगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘घातक’ अपने हथियारों को विमान के अंदर ले जा सकेगा। मिसाइल, बम और प्रिसीजन-गाइडेड म्यूनिशन को आंतरिक रूप से ले जाने से इसकी स्टेल्थ क्षमता बनी रहेगी। इसका इस्तेमाल दुश्मन की मजबूत वायु रक्षा व्यवस्था को भेदने, महत्वपूर्ण कमांड सेंटर और रडार ठिकानों को निशाना बनाने तथा एयर डिफेंस सिस्टम को दबाने के लिए किया जा सकता है। यही ‘घातक’ का सबसे बड़ा सामरिक महत्व है। देखा जाये तो भविष्य के युद्ध में केवल बड़े और तेज लड़ाकू विमान ही निर्णायक नहीं होंगे। ऐसे स्टेल्थ ड्रोन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जो दुश्मन की निगरानी और वायु रक्षा व्यवस्था को चकमा देकर उसके संवेदनशील इलाकों में घुस सकें। ‘घातक’ को भविष्य में तेजस और एएमसीए जैसे मानवयुक्त लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर अभियान चलाने के लिए भी तैयार किया जा रहा है।

रणनीतिक स्तर पर कावेरी इंजन की सफलता भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विमानन क्षेत्र में इंजन को सबसे कठिन तकनीकों में से एक माना जाता है। विमान का ढांचा बनाना एक चुनौती है, लेकिन उसके भीतर भरोसेमंद और शक्तिशाली इंजन विकसित करना उससे भी बड़ी तकनीकी परीक्षा है। देखा जाये तो कावेरी की कहानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस इंजन को कभी तेजस के लिए अपेक्षित प्रदर्शन हासिल न कर पाने के कारण पीछे हटना पड़ा था, वही तकनीक अब एक नए रूप में ‘घातक’ के लिए इस्तेमाल होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि अभी प्रमाणन, एकीकरण और उड़ान परीक्षण जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं बाकी हैं। लेकिन रूस में कठिन परीक्षणों के दौरान 48.5 किलो न्यूटन का ड्राई थ्रस्ट हासिल करना निश्चित रूप से एक बड़ा तकनीकी पड़ाव है।

बहरहाल, अब निगाहें इस बात पर हैं कि कावेरी डेरिवेटिव इंजन ‘घातक’ के साथ वास्तविक उड़ान में कैसा प्रदर्शन करता है। यदि अगली परीक्षाएं भी सफल रहीं, तो यह केवल एक नए युद्धक ड्रोन की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि भारत के स्वदेशी विमानन इंजन कार्यक्रम के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

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Himanta Biswa Sarma ने Mahatma Gandhi और शास्त्री को दी श्रद्धांजलि

गुवाहाटी, दो अक्टूबर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर दोनों महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार गांवों और पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर चलती रहेगी। शर्मा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “गांधी जयंती पर पूज्य बापू को याद कर रहा हूं।

उनके दृष्टिकोण से प्रेरित राष्ट्र स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के नए दौर में आगे बढ़ रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि विकास समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे।” उन्होंने बताया कि 2025 में, जमीनी स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए वित्त आयोग ने असम की पंचायतों को 525 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की। शर्मा ने कहा, “हम उनके बताए रास्ते पर चलते रहेंगे और अपने गांवों तथा पंचायतों को अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाएंगे।” पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर कहा, “लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर उस नेता को याद कर रहा हूं, जो कभी असम की सड़कों पर चले थे। गृह मंत्री के रूप में शास्त्री जी ने वह ऐतिहासिक फार्मूला तैयार किया, जिससे असम के आंदोलन को शांत करने में मदद मिली।

बाद में प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने गुवाहाटी का दौरा किया, जिसकी यादें आज भी हमारे राज्य के लोगों के दिलों में हैं।” उन्होंने कहा, “भारत के दूसरे प्रधानमंत्री को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि। सादगी, त्याग और शांत दृढ़ता वाले ऐसे व्यक्ति का जीवन निरंतर हम सभी को जनसेवा के लिए प्रेरित करता रहता है।

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एशियन गेम्स का समापन, भारत चौथे स्थान पर रहा, हॉकी-क्रिकेट में जलवा; अन्य खेलों में कैसा रहा प्रदर्शन, विस्तार से पढ़ें

जापान में आयोजित हुए एशियन गेम्स 2026 का समापन हो गया। भारत इस मल्टीस्पोर्ट्स टूर्नामेंट में चौथे स्थान पर रहा। क्रिकेट हॉकी में 100 फीसदी प्रदर्शन करने वाले भारतीय दल के लिए अन्य खेलों में सफर कैसा रहा, कहां चूक हुई और 2036 के रोड मैच के लिए इन खेलों से क्या उम्मीद की जानी चाहिए विस्तार से पढ़िए। Sun, 04 Oct 2026 18:15:18 +0530

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