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रूस पर हमला हुआ तो सभी हथियार इस्तेमाल करेंगे… पुतिन की नाटो को धमकी

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस किसी यूरोपीय देश पर हमला नहीं करना चाहता, लेकिन अपने इलाके पर हमला हुआ तो सभी हथियारों से जवाब देगा. कालिनिनग्राद को लेकर नाटो से तनाव बढ़ा.

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Matra Navami 2026: कब है मातृ नवमी? किया जाएगा महिला पितरों का श्राद्ध, जानें जरूरी नियम

Matra Navami 2026: पितृ पक्ष में आने वाली मातृ नवमी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह दिन परिवार की दिवंगत माताओं और अन्य महिला पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए समर्पित होता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस अवसर पर महिला पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। मान्यता है कि यदि किसी दिवंगत महिला की मृत्यु की तिथि मालूम न हो, तो मातृ नवमी के दिन उनका श्राद्ध किया जा सकता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए कर्मों के जरिए मातृ पितरों का स्मरण और सम्मान किया जाता है। आइए जानते हैं साल 2026 में मातृ नवमी किस दिन होगी और श्राद्ध के लिए कौन-सा समय उपयुक्त रहेगा।

मातृ नवमी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि 4 अक्टूबर 2026, रविवार को सुबह 5:51 बजे शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 5 अक्टूबर को सुबह 3:53 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि और श्राद्ध परंपरा के अनुसार मातृ नवमी 4 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन महिला पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाएगा।

मातृ नवमी 2026 श्राद्ध का शुभ समय

  • कुतुप मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से 12:51 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:51 बजे से 1:39 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:39 बजे से शाम 4:01 बजे तक

मातृ नवमी पर किनका श्राद्ध किया जाता है?
मातृ नवमी मुख्य रूप से उन महिला पितरों के स्मरण और श्राद्ध के लिए मानी जाती है, जिनका निधन हो चुका है। इनमें माता, दादी, नानी, सास, बहन, बेटी तथा परिवार की अन्य दिवंगत महिलाओं का स्मरण किया जा सकता है। यदि किसी महिला के निधन की तिथि परिवार को ज्ञात नहीं है, तो धार्मिक परंपरा के अनुसार मातृ नवमी के दिन उनके निमित्त श्राद्ध कर्म किया जाता है।

मातृ नवमी पर इन बातों का रखें ध्यान

  • भोजन और श्राद्ध सामग्री तैयार करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें।
  • इस दिन मांसाहार और अन्य तामसिक पदार्थों से परहेज करने की परंपरा है।
  • परिवार की महिलाओं और अन्य लोगों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करें।
  • श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर के समय निर्धारित मुहूर्त को प्राथमिकता दें।
  • धार्मिक परंपरा के अनुसार श्राद्ध भोजन में से पंचबली के लिए अंश निकाला जाता है। इसमें गाय, कुत्ता, कौआ, देव और चींटी के लिए भोजन अर्पित करने की परंपरा शामिल है।
  • ब्राह्मण भोजन और अन्य निर्धारित श्राद्ध कर्म पूरे होने के बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करने की परंपरा है।

मातृ नवमी का धार्मिक महत्व
पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए अलग-अलग तिथियों पर श्राद्ध किए जाते हैं। मातृ नवमी विशेष रूप से महिला पितरों के स्मरण से जुड़ी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से दिवंगत महिला पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। कई परिवारों में मातृ नवमी पर अपनी दिवंगत माताओं, दादियों, नानियों, सास और परिवार की अन्य महिलाओं का विधिपूर्वक स्मरण किया जाता है। मान्यता यह भी है कि श्रद्धा के साथ किए गए पितृ कर्म से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार धार्मिक परंपराएं हैं।

मातृ नवमी पर क्या करें?
इस दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपनी पारिवारिक परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार महिला पितरों का स्मरण करें। श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की विधि परिवार की परंपरा या किसी योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में करना उचित माना जाता है। दोपहर में निर्धारित समय के दौरान श्राद्ध कर्म करने के बाद ब्राह्मण भोजन, दान और अन्य पारंपरिक कर्म किए जा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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  Sports

Shubman Gill की नजरें Clean Sweep पर, तीसरे ODI में Ravindra Jadeja की फॉर्म पर टिकी नजर

 पहले दो मैच में जीत हासिल करके क्लीन स्वीप की दहलीज पर खड़ी भारतीय टीम को वेस्टइंडीज के खिलाफ शनिवार को यहां होने वाले तीसरे और अंतिम एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में अपनी गेंदबाजी की गुत्थी सुलझानी होगी जिसमें अनुभवी रविंद्र जडेजा के प्रदर्शन पर नजर रहेगी। भारत ने सीरीज में दबदबा बनाए रखा है, लेकिन उनके प्रदर्शन के बजाय चर्चा पिच के बल्लेबाजी के अनुकूल होने पर केंद्रित रही है, क्योंकि पिछले वनडे में 800 से अधिक रन बने थे।

 इन परिस्थितियों की आलोचना करने वालों में भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर भी शामिल हैं, जो बल्ले और गेंद के बीच संतुलन देखना चाहते हैं। सीरीज में पहले ही अजेय बढ़त ले चुकी भारतीय टीम अब अपने गेंदबाजों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करेगी। कप्तान शुभमन गिल की अगुवाई में बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन गेंदबाजी कमजोर रही है। 

दोनों मैचों में पहले 10 ओवरों में सिर्फ एक विकेट मिला है और दोनों पावरप्ले में 177 रन लुटाए गए। भारत को बीच के ओवरों में भी विकेट लेने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कुलदीप यादव को अन्य गेंदबाजों से ज्यादा सहयोग नहीं मिल रहा है। जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ी पर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने पिछले आठ मैचों में सिर्फ तीन विकेट लिए हैं। गिल बल्ले से शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज का 2024 से घरेलू वनडे मैचों में औसत 79.3 है और इस सीरीज में वह पहले ही एक शतक और एक दोहरा शतक लगा चुके हैं। गिल की नाबाद 223 रन की पारी की मदद से भारत ने पिछले मैच में रिकॉर्ड 406 रन का लक्ष्य हासिल किया था। 

रोहित शर्मा और विराट कोहली को भी इस सीरीज में उपयोगी पारियां खेलने का मौका मिला। लेकिन अब तक केवल चार भारतीय बल्लेबाजों को ही बल्लेबाजी का मौका मिला है। केएल राहुल, नमन धीर और जडेजा ने अभी तक बल्लेबाजी नहीं की है। भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या गेंदबाजी आक्रमण है। प्रसिद्ध कृष्णा बाएं पैर की हैमस्ट्रिंग (मांसपेशियों में खिंचाव) में चोट के कारण अंतिम वनडे से बाहर हो गए हैं और उनकी जगह अंशुल कंबोज को टीम में शामिल किया गया है। 

मोहम्मद सिराज को पहले दो मैच में खेलने का मौका नहीं मिला लेकिन वह इस मैच में वापसी कर सकते हैं। हैदराबाद के इस तेज गेंदबाज ने श्रीलंका दौरे के बाद से अपनी सर्वश्रेष्ठ लय नहीं पकड़ी है। वह हालांकि सीमित ओवरों के प्रारूप में अपनी छाप छोड़ने के लिए उत्सुक होंगे। भारत के वनडे तेज गेंदबाजी आक्रमण में जगह पाने की होड़ लगातार बढ़ती जा रही है। 

गुरनूर बराड़, प्रसिद्ध और आकिब नबी जैसे खिलाड़ी भी दावेदारों में शामिल हैं, जबकि जसप्रीत बुमराह की जगह पक्की बनी हुई है। इसलिए युवा तेज गेंदबाजों के लिए यह आखिरी वनडे मैच इस साल के अंत में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली पांच मैचों की सीरीज से पहले अपनी दावेदारी मजबूत करने का एक और मौका होगा। मुल्लांपुर में पहली बार पुरुषों का वनडे मैच खेला जा रहा है, ऐसे में गेंदबाजों को उम्मीद होगी कि यहां की पिच तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी की पिचों की तुलना में अधिक मददगार साबित होगी। 

वेस्टइंडीज भले ही सीरीज हार चुका है लेकिन उसके बल्लेबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। जॉन कैंपबेल ने दोनों मैचों में टीम को विस्फोटक शुरुआत दी है, वहीं कप्तान शाई होप ने सही समय पर तेजी दिखाने से पहले पारी को संवारने की अहम भूमिका निभाई है। हालांकि उसकी टीम शेरफेन रदरफोर्ड, रोस्टन चेज़ और कीमो पॉल से उपयोगी योगदान की उम्मीद करेगी।

 टीम इस प्रकार हैं:

 भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, रुतुराज गायकवाड़, केएल राहुल (उपकप्तान), ध्रुव जुरेल, नितीश कुमार रेड्डी, रविंद्र जड़ेजा, कुलदीप यादव, अंशुल कंबोज, गुरनूर बराड़, मोहम्मद सिराज, आकिब नबी, यशस्वी जायसवाल, नमन धीर। 

वेस्टइंडीज: शाई होप (कप्तान), ज्वेल एंड्रयू, जॉन कैंपबेल, कीसी कार्टि, रोस्टन चेस, मैथ्यू फोर्डे, जस्टिन ग्रीव्स, आमिर जांगू, अल्जारी जोसेफ, शमर जोसेफ, विटेल लॉज़, गुडाकेश मोती, कीमो पॉल, शेरफेन रदरफोर्ड, जेडन सील्स। मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 2 बजे शुरू होगा।

Fri, 02 Oct 2026 14:04:00 +0530

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