Tihar Jail में गैंगस्टर नवीन बाली और ढिल्लू का हंगामा, अधिकारियों से की हाथापाई
नयी दिल्ली, एक अक्टूबर राष्ट्रीय राजधानी स्थित तिहाड़ की केंद्रीय जेल संख्या-दो के उच्च सुरक्षा वार्ड में बंद गैंगस्टर नवीन बाली और संदीप उर्फ ढिल्लू ने जेल अधिकारियों के साथ कथित तौर पर हाथापाई की एवं उन्हें धमकी दी। उन्होंने दीवारों तथा अन्य वस्तुओं से बार-बार अपना सिर पटककर खुद को घायल करने का प्रयास किया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह घटना सितंबर के आखिरी हफ्ते में हुई। जेल अधिकारियों के अनुसार, दोनों कैदियों ने उच्च सुरक्षा वार्ड के कथित तौर पर अंदर हंगामा किया, जेल कर्मचारियों को डराया-धमकाया और वार्ड अधिकारियों तथा जेल अधीक्षकों को जान से मारने की धमकी दी। एक सूत्र ने बताया, दोनों गैंगस्टरों, नवीन बाली और संदीप ढिल्लू ने जेल अधिकारियों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और उनसे कहा कि वे उन्हें जान से मार देंगे।
सूत्र ने कहा कि दोनों ने कर्मचारियों को डराकर और उच्च सुरक्षा वार्ड के भीतर अधिकारियों के काम में बाधा डालकर दहशत जैसा माहौल पैदा कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, संदीप उर्फ ढिल्लू ई-मुलाकात के जरिए अपने परिवार के सदस्यों से बात कर रहा था, तभी वह कथित तौर पर आक्रामक हो गया और जेल कर्मचारियों को गालियां देने लगा। एक अधिकारी ने बताया, उसने जेल कर्मचारियों को गालियां देना शुरू कर दिया और उन पर हमला करने की कोशिश की।
इसके बाद, कैदी ने दरवाजों, दीवारों और एक कूलर पर अपना सिर मारना शुरू कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि जेल कर्मचारियों को संदेह हुआ कि ढिल्लू नशीले पदार्थों के प्रभाव में हो सकता है, जिसके बाद उसके मूत्र की जांच की गई। अधिकारी ने कहा, कैदी ने दरवाजों, दीवारों और कूलर पर अपना सिर मारना शुरू कर दिया।
कर्मचारियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा परिवार से बातचीत पूरी कराने के लिए उसे रोका। परिवार से बातचीत पूरी होने के बाद, उसे अपने ब्लॉक में लौटने का निर्देश दिया गया। जेल अधिकारी दोनों कैदियों के आचरण और कथित धमकियों व खुद को चोट पहुंचाने की कोशिश से जुड़ी परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है और इस घटना को सुरक्षा से जुड़े मामले के रूप में देख रहे हैं।
बिहार में बाढ़ नियंत्रण के लिए Water Grid और गाद निकासी जरूरी: Nitin Gadkari
पटना, एक अक्टूबर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बिहार को बाढ़ की समस्या से मुक्त करने के लिए बृहस्पतिवार को व्यापक जल प्रबंधन, नदियों से गाद निकालने (ड्रेजिंग), सुरक्षात्मक दीवारों के निर्माण और जल ग्रिड विकसित करने पर जोर दिया। गडकरी ने पटना में आयोजित ‘बिहार इन्वेस्टर समिट 2026 : द इमर्जिंग इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन ऑफ इंडिया’ के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में यह बात कही। गडकरी ने कहा कि बिहार में बाढ़ की समस्या के समाधान के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए नवोन्मेषी नीतियां अपनाने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर सोचने की आवश्यकता है, ताकि कम लागत में इसका प्रभावी समाधान किया जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह राष्ट्रीय राजमार्ग ग्रिड और बिजली ग्रिड हैं, उसी तरह जल ग्रिड प्रणाली लागू करने तथा एक नदी बेसिन से दूसरे बेसिन में पानी स्थानांतरित करने से राज्य में अतिरिक्त जल प्रवाह का प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है।’’ केंद्रीय मंत्री ने बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए नदियों से गाद निकालने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों से बात की है। हम नि:शुल्क ‘ड्रेजिंग’ करने और उससे निकलने वाली गाद को ले जाने के लिए तैयार हैं।
इस गाद का इस्तेमाल राजमार्गों के निर्माण में सामग्री के रूप में किया जा सकता है। अगर बिहार सरकार ऐसी नीति को मंजूरी देती है तो मैं भरोसा दिलाता हूं कि कम लागत में बाढ़ की समस्या का प्रभावी समाधान किया जा सकता है।’’ गडकरी ने कहा कि तटबंधों और सुरक्षात्मक दीवारों के निर्माण के जरिए गहरे जलमार्ग विकसित करने से अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देने और माल ढुलाई की लागत कम करने में मदद मिल सकती है, जिससे उद्योग, व्यापार, कारोबार और निवेश को लाभ होगा। गडकरी ने अपने कार्यकाल के दौरान नेपाल में कोसी नदी पर बांध परियोजना पूरी नहीं हो पाने पर अफसोस जताया।
उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण और अन्य कारणों से यह परियोजना पूरी नहीं हो सकी, जबकि इसके पूरा होने से बिहार में बाढ़ के खतरे को काफी कम किया जा सकता था। गडकरी ने बिहार में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए किए जा रहे निवेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में राजमार्ग निर्माण के लिए 3.88 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें पूरी हो चुकी, जारी और आगामी परियोजनाएं शामिल हैं।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रा का समय कम करना और आर्थिक संपर्क को मजबूत करना है। उन्होंने कहा, ‘‘बिहार में 3.88 लाख करोड़ रुपये की राजमार्ग परियोजनाओं की योजना है और सरकार का लक्ष्य अपने मौजूदा कार्यकाल के अंत तक करीब पांच लाख करोड़ रुपये के कार्य पूरे करने का है।’’ उन्होंने बताया कि बिहार में 2,910 किलोमीटर लंबी परियोजनाएं करीब 33,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1,878 किलोमीटर की अन्य परियोजनाओं पर करीब 65,100 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आगामी परियोजनाओं पर करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है।
गडकरी ने कहा, ‘‘बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2014 में करीब 4,615 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर लगभग 6,500 किलोमीटर हो गई है।’’ उन्होंने कहा कि 440 किलोमीटर लंबे राम-जानकी मार्ग की अनुमानित लागत करीब 5,440 करोड़ रुपये है और इसका लगभग 27 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। परियोजना को नवंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों को जोड़ने वाले गलियारे के तहत करीब 22,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम चल रहा है और इसका लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, करीब 72,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला गोरखपुर-सिलीगुड़ी गलियारा बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क परियोजना है। गडकरी ने कहा कि इस परियोजना के कुल निवेश में करीब 52,000 करोड़ रुपये बिहार में खर्च होने की उम्मीद है और 526 किलोमीटर लंबे गलियारे में से 410 किलोमीटर हिस्सा बिहार में होगा। उन्होंने कहा कि पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
गडकरी ने कहा कि करीब 10,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला 218 किलोमीटर लंबा बक्सर-भागलपुर उच्च गति गलियारा ‘ब्राउनफील्ड’ और ‘ग्रीनफील्ड’ दोनों हिस्सों में होगा। उन्होंने बताया कि पटना में 13.4 किलोमीटर लंबे अनीसाबाद-दीदारगंज परियोजना का प्रस्ताव भी मंत्रिमंडल को भेजा गया है। इसकी अनुमानित लागत 8,500 करोड़ रुपये है।
अपने संबोधन में गडकरी ने ‘कचरे से संपदा’ (वेस्ट टू वेल्थ) की अवधारणा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी के जरिए कचरे को आर्थिक मूल्य में बदलना भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। उन्होंने अपशिष्ट गाद के शोधन से पानी तैयार करने और जैविक कचरे से सीएनजी बनाने जैसी परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि ठोस और तरल कचरा प्रबंधन की अर्थव्यवस्था अकेले पांच लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राज्य के पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र और उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह भी मौजूद थे।
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