चीनी राष्ट्रपति का अमेरिका दौरा: ट्रंप ने एयरपोर्ट पर किया शी जिनपिंग का भव्य स्वागत, 1962 के बाद पहली बार हुआ ऐसा
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग तीन दिवसीय दौरे पर अमेरिका पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया। ट्रंप के साथ छह महीने से भी कम समय में यह शी जिनपिंग की दूसरी शिखर बैठक है।
शी जिनपिंग और चीन की फर्स्ट लेडी पेंग लियुआन को लेकर आ रहा विमान बुधवार को स्थानीय समयानुसार शाम 5:39 बजे (गुरुवार सुबह 3:09 बजे IST) जॉइंट बेस एंड्रयूज पर उतरा। शाम 6:01 बजे जब शी और पेंग विमान से बाहर आए तो ट्रंप और अमेरिकी फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप सीढ़ियों के पास उनका इंतजार कर रहे थे।
1962 के बाद यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने एयरपोर्ट पर किसी विदेशी नेता का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया है। इससे पहले तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हेरोल्ड मैकमिलन का एयरपोर्ट पर स्वागत किया था।
#WATCH | Chinese President Xi Jinping and First lady Peng Liyuan arrive in the United States; US President Donald Trump and First Lady Melania Trump receive them at Joint Base Andrews pic.twitter.com/ttOtyjlEnX
— ANI (@ANI) September 23, 2026
100 फीट का रेड कार्पेट, तोपों की सलामी
स्वागत के बाद दोनों राष्ट्राध्यक्ष और उनकी पत्नियां 100 फीट लंबे रेड कार्पेट पर आगे बढ़े। इस दौरान 21 सदस्यीय सम्मान गार्ड 'अटेंशन' की मुद्रा में खड़ा था। औपचारिक तोपों की सलामी दी गई और अमेरिकी वायु सेना के बैंड ने प्रस्तुति दी।
अमेरिका और चीन के राष्ट्रगान बजाए जाने के दौरान अमेरिकी वायु सेना के दो B-1 बॉम्बर विमान एयरबेस के ऊपर से गुजरे।
इसके बाद शी जिनपिंग और पेंग लियुआन काफिले के साथ एयरबेस से रवाना हुए। वहीं, ट्रंप और मेलानिया ट्रंप मरीन वन हेलिकॉप्टर से व्हाइट हाउस लौटे।
चीन के प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन?
शी जिनपिंग के प्रतिनिधिमंडल में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य काई क्यूई और विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं।
ट्रंप-शी की बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
दोनों नेताओं की बातचीत में कई अहम मुद्दे शामिल होने की उम्मीद है। इनमें:
- अमेरिका-चीन व्यापार और टैरिफ
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- तकनीकी प्रतिस्पर्धा
- सैन्य संबंध
- मध्य पूर्व का संघर्ष
- रूस-यूक्रेन युद्ध
- अंतरिक्ष में हथियारों की होड़
रुबियो बोले- अमेरिका-चीन संबंध तय करेंगे 21वीं सदी की दिशा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका और चीन के संबंध 21वीं सदी की दिशा तय करेंगे। उन्होंने दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को स्वीकार करते हुए कहा कि उच्च स्तर पर बातचीत करना जिम्मेदारी है। यह यात्रा मई में ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान हुए भव्य स्वागत के बाद हो रही है।
मेलानिया ने बताया क्यों ट्रंप ने खुद किया स्वागत
मेलानिया ट्रंप ने कहा कि उनके पति और शी जिनपिंग के बीच अच्छे संबंध हैं, इसलिए ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से एयरपोर्ट पहुंचकर उनका स्वागत करने का फैसला किया।
गुरुवार को शी जिनपिंग का व्हाइट हाउस में औपचारिक स्वागत किया जाएगा। इसके बाद वे अमेरिकी सैनिकों का निरीक्षण करेंगे।
ब्लैक-टाई डिनर में टेक दिग्गज भी होंगे शामिल
गुरुवार शाम आयोजित होने वाले ब्लैक-टाई डिनर में टेक इंडस्ट्री की कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क का नाम भी शामिल है।
इससे पहले ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच बंद कमरे में अहम मुद्दों पर बातचीत होगी। दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर मतभेद हैं।
शुक्रवार को फिर व्हाइट हाउस आएंगे शी शुक्रवार को शी जिनपिंग और पेंग लियुआन एक बार फिर व्हाइट हाउस जाएंगे। वहां वे ट्रंप परिवार के साथ निजी तौर पर चाय पीएंगे। इसके बाद दोनों नेशनल आर्काइव्स का दौरा करेंगे।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस दौरान दोनों नेता अमेरिका और चीन के संबंधों से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों को देखेंगे।
EPFO Rule: ईपीएफओ की लिमिट 25 हजार होने पर घटेगी टेक-होम सैलरी? जानें कितना पड़ेगा असर
नौकरीपेशा लोगों की हर महीने मिलने वाली सैलरी और PF की बचत का हिसाब बदल सकता है। केंद्र सरकार ने EPFO के दायरे में आने के लिए सैलरी लिमिट 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए महीना करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे लाखों नए कर्मचारी PF के दायरे में आ सकते हैं। वहीं, जिन कर्मचारियों का PF अभी 15 हजार रुपए की लिमिट के हिसाब से कटता है, उनका हर महीने का योगदान बढ़ सकता है। यानी रिटायरमेंट के लिए ज्यादा पैसा जमा होगा, लेकिन हाथ में आने वाली सैलरी कुछ कम हो सकती है।
अभी कितना कटता है PF?
मौजूदा व्यवस्था में PF के लिए 15 हजार रुपए की वेतन सीमा लागू है। यह लिमिट सितंबर 2014 में तय की गई थी। इस लिमिट के हिसाब से कर्मचारी की तरफ से 12% यानी 1,800 रुपए महीने का योगदान होता है। नियोक्ता की तरफ से भी 12% यानी 1,800 रुपए का योगदान किया जाता है।
अब वेतन सीमा 25 हजार रुपए होने पर इसी हिसाब से कर्मचारी का योगदान बढ़कर 3 हजार रुपए महीने हो सकता है। नियोक्ता का योगदान भी 3 हजार रुपए तक पहुंच जाएगा। यानी मौजूदा लिमिट के मुकाबले कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की तरफ से हर महीने 1,200-1,200 रुपए ज्यादा योगदान होगा।
हाथ में आने वाली सैलरी पर कितना असर?
इस बदलाव का सीधा असर खास तौर पर 15 हजार से 25 हजार रुपए महीने की सैलरी वाले कर्मचारियों पर पड़ सकता है। अगर किसी कर्मचारी का PF अभी 1,800 रुपए महीने कट रहा है और नई लिमिट के बाद यह बढ़कर 3 हजार रुपए हो जाता है तो हर महीने 1,200 रुपए ज्यादा PF में जाएंगे।इस हिसाब से कर्मचारी के PF में एक साल में 14,400 रुपए अतिरिक्त जमा होंगे। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह है कि कर्मचारी के हाथ में हर महीने आने वाली रकम 1,200 रुपए तक कम हो सकती है। यह पैसा खत्म नहीं होगा, बल्कि कर्मचारी की रिटायरमेंट सेविंग में जुड़ेगा।
उदाहरण से समझें पूरा हिसाब
मान लीजिए किसी कर्मचारी पर अभी 15 हजार रुपए की PF लिमिट लागू है। उसका 12% यानी 1,800 रुपए हर महीने PF में जाता है। 25 हजार रुपए की नई लिमिट लागू होने के बाद 12% के हिसाब से यह रकम 3 हजार रुपए हो जाएगी। इस तरह कर्मचारी की तरफ से सालाना PF योगदान 21,600 रुपए से बढ़कर 36 हजार रुपए हो सकता है। यानी सालभर में 14,400 रुपए ज्यादा जमा होंगे। नियोक्ता की तरफ से होने वाला योगदान भी इसी अनुपात में बढ़ेगा।
51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को मिल सकता है फायदा
प्रस्तावित बदलाव का बड़ा मकसद ज्यादा कर्मचारियों को EPFO के दायरे में लाना है। सरकार के अनुमान के मुताबिक वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी PF और इससे जुड़े सोशल सिक्योरिटी सिस्टम के दायरे में आ सकते हैं। इससे ऐसे कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग शुरू हो सकेगी, जो मौजूदा वेतन सीमा के कारण अनिवार्य EPFO कवरेज से बाहर रह जाते हैं।
कंपनियों का खर्च भी बढ़ सकता है
नई लिमिट का असर केवल कर्मचारियों पर नहीं पड़ेगा। कंपनियों की तरफ से किया जाने वाला PF योगदान भी बढ़ेगा। अभी 15 हजार रुपए की लिमिट पर अधिकतम 1,800 रुपए महीने के हिसाब से योगदान का उदाहरण लिया जाए तो 25 हजार रुपए पर यह बढ़कर 3 हजार रुपए हो जाएगा। यानी कंपनी पर भी प्रति कर्मचारी 1,200 रुपए महीने का अतिरिक्त खर्च आ सकता है।
ऐसी कंपनियां जहां सैलरी CTC के आधार पर तय होती है, वहां सैलरी स्ट्रक्चर के दूसरे हिस्सों में बदलाव देखने को मिल सकता है। कंपनियां स्पेशल अलाउंस या दूसरे कंपोनेंट का हिसाब नए सिरे से तय कर सकती हैं।
PF का खर्च कर्मचारी की सैलरी से नहीं निकाल सकती कंपनी
हालांकि कंपनियों के लिए भी इसकी सीमा तय है। सोशल सिक्योरिटी कोड की धारा 124 के मुताबिक नियोक्ता अपने वैधानिक योगदान की भरपाई करने के लिए कर्मचारी की मजदूरी में कटौती नहीं कर सकता।
इसका मतलब है कि सिर्फ इसलिए कर्मचारी की तय मजदूरी कम नहीं की जा सकती कि कंपनी को अब PF में ज्यादा योगदान करना पड़ रहा है। ऐसे में कुछ कंपनियों के लिए कर्मचारियों का कुल CTC बढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है।
फायदा भी, लेकिन हर महीने कैश कम
कर्मचारी के नजरिए से देखें तो इस बदलाव के दो पहलू हैं। पहला, हर महीने PF में ज्यादा पैसा जाएगा और लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए बड़ी रकम जमा हो सकती है। दूसरा, कर्मचारी के हाथ में आने वाली मासिक सैलरी कम हो सकती है। 15 हजार से 25 हजार रुपए की सीमा पर जाने के उदाहरण में यह अंतर 1,200 रुपए महीने तक हो सकता है।
इसलिए नई लिमिट लागू होने पर कर्मचारियों के लिए PF में ज्यादा बचत और मौजूदा खर्च के लिए कम कैश के बीच सीधा फर्क दिखाई दे सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
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