SC on UPI: SC का यूपीआई पर MDR पर रोक लगाने से इनकार, RBI और NPCI को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल भुगतान प्रणाली से जुड़े एक अहम मामले में सुनवाई करते हुए 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई (UPI) लेन-देन पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने इस नई व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और कानूनी आधार पर सवाल
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने अधिवक्ता रंजन दत्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट के सामने यह सवाल उठाया गया कि यदि सरकार सीधे तौर पर इस धन को एकत्र नहीं कर रही है, तो इस तरह के शुल्क को लागू करने का कानूनी आधार क्या है?
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरामन ने अदालत को बताया कि एमडीआर न तो कोई टैक्स है और न ही सरकार द्वारा एकत्र किया जाने वाला कोई शुल्क। सरकार का स्पष्ट तर्क है कि यह चार्ज पूरी तरह से पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर का है, जिसे यूपीआई लेन-देन को प्रोसेस करने वाली संस्थाओं जैसे बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच साझा किया जाता है।
आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों के लिए क्या बदलेगा?
नया एमडीआर फ्रेमवर्क लागू होने के बाद भी आम उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल हैं। सरकार और विशेषज्ञों के अनुसार, इस नए सिस्टम का असर आम यूजर पर किस तरह पड़ेगा, इसे इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- पूरी तरह मुफ्त रहेंगे P2P लेनदेन: दो व्यक्तियों के बीच होने वाले सभी यूपीआई लेन-देन, राशि चाहे जितनी भी हो, पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे।
- 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट फ्री: यदि कोई ग्राहक किसी दुकानदार को 2,000 रुपये तक का भुगतान यूपीआई के जरिए करता है, तो उस पर कोई एमडीआर नहीं लगेगा। उदाहरण के लिए, यदि आप किसी दुकान पर 1,500 रुपये का भुगतान करते हैं, तो नए सिस्टम के आने से आपको अचानक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
- 96% मर्चेंट लेनदेन प्रभावित नहीं: सरकारी अनुमान के मुताबिक, इस नए फ्रेमवर्क से करीब 96 प्रतिशत यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पूरी तरह अप्रभावित और सुरक्षित रहेंगे। छोटे व्यापारी जो यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से प्रति माह 1 लाख रुपये तक प्राप्त करते हैं, उनके लिए एमडीआर शून्य बना रहेगा।
नए फ्रेमवर्क के तहत शुल्क और श्रेणियां
नए ढांचे के अंतर्गत अलग-अलग क्षेत्रों और बड़ी राशि के लेन-देन के लिए निम्नलिखित नियम तय किए गए हैं:-
- मानक एमडीआर: पात्र लेन-देन के लिए मानक एमडीआर 0.4 प्रतिशत निर्धारित किया गया है, जिसे 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेन-देन पर अधिकतम 300 रुपये तक सीमित किया गया है। मिसाल के तौर पर, यदि एमडीआर के दायरे में आने वाला 10,000 रुपये का भुगतान किया जाता है, तो 0.4 फीसदी की दर से यह शुल्क 40 रुपये होगा।
- चुनिंदा क्षेत्रों के लिए फ्लैट शुल्क: रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे कुछ विशेष क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतानों पर 5 रुपये का फ्लैट एमडीआर लगेगा। इसके अलावा कैपिटल मार्केट से जुड़े भुगतान पर 0.02 प्रतिशत का निचला एमडीआर लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।
उपभोक्ताओं पर सीधे बोझ को लेकर सख्त निर्देश
सरकार और वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि यह शुल्क मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर का आंतरिक मामला है और ग्राहकों से यह राशि अलग से नहीं वसूली जानी चाहिए। इसके साथ ही, यूपीआई ऐप्स को भी यह हिदायत दी गई है कि वे इस नए फ्रेमवर्क की आड़ में उपयोगकर्ताओं पर किसी भी तरह की प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए शुल्क नहीं थोप सकते।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संतुलित दृष्टिकोण से तकनीकी सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए फंड जुटाया जा सकेगा, साथ ही छोटे व्यापारियों और आम जनता पर भी अनावश्यक बोझ नहीं पड़ेगा।
UPI पेमेंट पर क्यों लगेगा चार्ज?: किसकी होगी कमाई, MDR पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार-RBI से पूछे सवाल
UPI Charges: 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। अदालत ने फिलहाल इस व्यवस्था पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
सरकार की नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाना है। सरकार का कहना है कि यह चार्ज ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा, बल्कि मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में लागू होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
MDR व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य पक्षों को चार सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने टिप्पणी की कि मामला मुख्य रूप से कानूनी से ज्यादा तकनीकी प्रकृति का है।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस व्यवस्था से बड़ी संख्या में होने वाले सामान्य UPI लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे। सरकार के अनुसार, P2M ट्रांजैक्शन के करीब 96 प्रतिशत हिस्से पर MDR का असर नहीं पड़ेगा।
15 अक्टूबर से क्या बदलने वाला है?
नए फ्रेमवर्क के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा P2M UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लागू होगा। वहीं Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांसफर पर कोई MDR नहीं लगेगा। 2,000 रुपये तक के सामान्य मर्चेंट पेमेंट भी इस MDR से बाहर रखे गए हैं।
बड़े मूल्य के कुछ लेन-देन के लिए MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। वहीं कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले सेक्टर के लिए अलग फ्लैट MDR व्यवस्था निर्धारित की गई है।
ग्राहक से सीधे चार्ज नहीं लिया जाएगा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि मर्चेंट इस शुल्क का बोझ सीधे ग्राहकों पर न डालें। साथ ही UPI ऐप प्रोवाइडर्स को प्लेटफॉर्म फीस या किसी छिपे हुए चार्ज के जरिए ग्राहक से रकम लेने की अनुमति नहीं होगी।
इसका मतलब यह है कि प्रस्तावित MDR का ढांचा मुख्य रूप से मर्चेंट और पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ा है। हालांकि, इस व्यवस्था के भविष्य में ग्राहकों और कारोबारियों पर पड़ने वाले असर को लेकर अलग-अलग पक्षों की चिंताएं सामने आई हैं।
क्या Person-to-Person UPI भी महंगा होगा?
नहीं। सरकार के मौजूदा फ्रेमवर्क के अनुसार P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति को किया जाने वाला UPI ट्रांसफर MDR के दायरे में नहीं है। यानी किसी व्यक्ति को UPI के जरिए पैसे भेजने पर केवल ट्रांजैक्शन की राशि अधिक होने के कारण यह MDR लागू नहीं होगा।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने केंद्र का जवाब महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल अदालत ने नए MDR ढांचे पर रोक नहीं लगाई है, इसलिए 15 अक्टूबर से प्रस्तावित व्यवस्था पर तत्काल रोक नहीं लगी है।
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