Responsive Scrollable Menu

Viral: फोन पर बात करते-करते रेलवे ट्रैक पर पहुंचा शख्स, तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से मौत; CCTV में कैद हुआ हादसा

पंजाब के जालंधर से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मोबाइल फोन पर बात करते हुए रेलवे ट्रैक के पास चल रहे एक युवक की तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। पूरी घटना पास में लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह हादसा एक बार फिर रेलवे ट्रैक के आसपास मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के खतरों की याद दिलाता है।

फोन पर बातचीत में इतना व्यस्त था कि नहीं दिखी ट्रेन
जानकारी के मुताबिक यह हादसा 1 अगस्त को DAV Heart Railway Station के पास हुआ। CCTV फुटेज में युवक मोबाइल पर बात करते हुए रेलवे ट्रैक के किनारे चलता हुआ दिखाई देता है। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रेन उसकी ओर आती है, लेकिन वह फोन पर बातचीत में इतना व्यस्त रहता है कि उसे ट्रेन के आने का एहसास नहीं होता।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आसपास मौजूद लोगों ने उसे कई बार आवाज देकर सावधान करने की कोशिश की, लेकिन उसने उनकी चेतावनी नहीं सुनी। कुछ ही क्षण बाद ट्रेन ने उसे टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

मृतक की पहचान सुखविंदर कुमार के रूप में हुई
मृतक की पहचान सुखविंदर कुमार उर्फ टिंकू के रूप में हुई है, जो जम्मू के विजयपुर का रहने वाला था। वह पिछले चार वर्षों से जालंधर में रह रहा था और एक सब्जी की दुकान पर काम करता था। उसके मालिक सौरभ ने बताया कि हादसे वाले दिन सुखविंदर शाम करीब 5:30 बजे काम खत्म कर घर के लिए निकला था। रास्ते में उसे किसी का फोन आया और वह बातचीत करते हुए रेलवे ट्रैक की ओर बढ़ गया।

प्रारंभिक जांच में मोबाइल बना हादसे की वजह
प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि सुखविंदर मोबाइल पर बातचीत में इतना व्यस्त था कि उसे न तो सामने से आती ट्रेन दिखाई दी और न ही आसपास मौजूद लोगों की आवाज सुनाई दी। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है।

पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव
सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के हेड कांस्टेबल प्रीतपाल सिंह ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया गया है। परिवार के बयान दर्ज करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रेलवे ट्रैक के पास सतर्क रहने की अपील
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोग रेलवे ट्रैक के आसपास मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने और पूरी सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं। थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।

Continue reading on the app

Modi के Gujarat की Hilsa Fish के आयात पर Tarique Rahman ने लगा दी रोक, India-Bangladesh रिश्तों में आई नई टेंशन

भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंध पहले ही खराब दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात की हिलसा मछली का आयात रोक कर इस चिंगारी को और भड़का दिया है। हम आपको बता दें कि मंगलवार शाम बांग्लादेश ने भारत से हिलसा मंगाने वाले आयात परमिट रद्द कर दिए। पिछले करीब दो महीनों में बांग्लादेश लगभग 550 टन भारतीय हिलसा मंगा चुका था, लेकिन अब अचानक इस व्यापार पर रोक लगा दी गई है। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह फैसला ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश खुद हिलसा की कमी और बढ़ती कीमतों से जूझ रहा है। यानी जिस भारतीय हिलसा की जरूरत बांग्लादेश के अपने बाजार को पड़ रही थी, उसी पर रोक लगाकर ढाका ने भारत के साथ पहले से तनावपूर्ण चल रहे रिश्तों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

देखा जाये तो यह फैसला ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश में हिलसा की स्थानीय पकड़ पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले कमजोर हुई है और वहां कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। बांग्लादेशी मछुआरा महासंघ के अध्यक्ष रवींद्रनाथ बर्मन ने आरोप लगाया कि कुछ व्यापारियों ने भारत की गुजरात वाली हिलसा को बांग्लादेशी हिलसा बताकर बेचने की कोशिश की, जिससे उपभोक्ताओं के साथ धोखा हुआ।

इसे भी पढ़ें: BRICS की सफलता और Mecca Pact की विफलता देख Bangladesh ने बदला रुख, नवंबर में India आने को आतुर हैं PM Tarique Rahman

लेकिन असली कहानी इससे कहीं बड़ी है। हिलसा सिर्फ एक मछली नहीं है। बंगाली समाज में इसका स्वाद, परंपरा, धार्मिक रीति और सांस्कृतिक पहचान से गहरा संबंध है। बांग्लादेश इसे अपनी राष्ट्रीय मछली मानता है, जबकि पश्चिम बंगाल में भी पद्मा की हिलसा को विशेष प्रतिष्ठा हासिल है। हम आपको बता दें कि पद्मा गंगा की एक प्रमुख वितरिका है, जो आगे मेघना से मिलकर बंगाल की खाड़ी में जाती है। यही वजह है कि पद्मा और मेघना की हिलसा भारत में महंगी कीमत पर भी खरीदी जाती है।

विडंबना देखिए कि बांग्लादेश लंबे समय से भारत को सीमित मात्रा में हिलसा भेजता रहा है, लेकिन दूसरी तरफ भारत से सैकड़ों टन हिलसा खरीद भी रहा है। पिछले दो महीनों में भारत से करीब 500 टन हिलसा बांग्लादेश पहुंची और अतिरिक्त 150 से 200 टन की प्रक्रिया भी चल रही थी। इनमें बड़ी मात्रा गुजरात के भरूच और नर्मदा क्षेत्र की हिलसा की बताई गई है।

इसका कारण स्वाद से ज्यादा अर्थशास्त्र है। बांग्लादेश में पद्मा और मेघना की अच्छी हिलसा लगभग 2,200 से 2,800 टका प्रति किलो तक पहुंच सकती है, जबकि गुजरात की हिलसा वहां के थोक बाजार में लगभग 500 से 700 टका प्रति किलो की लागत पर पहुंचती है और खुदरा बाजार में करीब 1,500 से 1,800 टका प्रति किलो में बिक सकती है। यानी बांग्लादेश के लिए गुजरात की हिलसा स्थानीय कमी को पूरा करने का अपेक्षाकृत सस्ता माध्यम बन गई है।

यही वह कारण है जहां बांग्लादेश का मौजूदा फैसला सवालों के घेरे में आता है। अगर भारतीय हिलसा वहां की आपूर्ति व्यवस्था, प्रसंस्करण उद्योग और कीमतों को संभालने में उपयोगी है, तो अचानक आयात परमिट रोकने से सबसे सीधा असर वहां के बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ भारत में भी इसका असर होगा। पश्चिम बंगाल के व्यापारियों के अनुसार गुजरात में मौजूदा हिलसा की उपलब्धता भी सीमित हो चुकी है और कोलकाता के बाजार में म्यांमार की हिलसा ही एक प्रमुख विकल्प बच सकती है।

भारत के लिए दूसरी बड़ी चुनौती घरेलू उत्पादन की है। पश्चिम बंगाल में हिलसा का उत्पादन वर्ष 2001 के करीब 80 हजार टन से घटकर 2013 में लगभग 15 हजार टन और 2020 में करीब 10 हजार टन रह गया था। इसके पीछे बंगाल की खाड़ी में अत्यधिक मछली पकड़ने को एक प्रमुख कारण बताया गया है। इसी कमी ने गुजरात की हिलसा के लिए बाजार तैयार किया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार गुजरात ने 2025-26 में करीब 14,588 टन हिलसा का उत्पादन किया।

वहीं बांग्लादेश में भी हिलसा का उत्पादन गिरा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वार्षिक उत्पादन 2022 के 5,71,324 टन से घटकर 2025 में करीब 5 लाख टन रह गया। इसी दौरान कीमतों में भारी उछाल आया। ऐसे में भारत से आने वाली अपेक्षाकृत सस्ती हिलसा की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।

मगर सबसे बड़ा खतरा उपभोक्ता भरोसे का है। पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे बाजारों में गुजरात और गंगा की हिलसा में अंतर करना कई खरीदारों के लिए आसान नहीं है। कुछ व्यापारियों ने खुद माना कि खरीदार को यह पता लगाना कठिन हो सकता है कि मछली वास्तव में कहां की है। ऐसे में गलत नाम से बिक्री का आरोप सिर्फ व्यापारिक विवाद नहीं, बल्कि खाद्य पारदर्शिता का मुद्दा भी बन जाता है।

इस पूरे घटनाक्रम का व्यापक निहितार्थ साफ है। हिलसा अब सिर्फ स्वाद और परंपरा का विषय नहीं रही। यह सीमा-पार व्यापार, कीमत, स्थानीय उत्पादन, उपभोक्ता विश्वास और दोनों देशों के बाजारों की परस्पर निर्भरता का प्रतीक बन चुकी है। बांग्लादेश भारत से हिलसा खरीदकर अपनी कमी पूरी करता है, जबकि भारत में बंगाली उपभोक्ता बांग्लादेशी पद्मा हिलसा के लिए तरसते हैं। देखा जाये तो एक ही मछली है, लेकिन सीमा के दोनों ओर उसकी आर्थिक और सांस्कृतिक भूमिका अलग है।

देखना होगा कि बांग्लादेश का यह परमिट-रोक फैसला अस्थायी प्रशासनिक कदम साबित होता है या हिलसा व्यापार में एक लंबी खींचतान की शुरुआत करता है। दुर्गापूजा से ठीक पहले लिया गया यह फैसला भारत के बाजार में पद्मा हिलसा की संभावित उपलब्धता पर भी असर डाल सकता है। उधर, बांग्लादेश के लिए भी चुनौती कम नहीं है क्योंकि जिस भारतीय आपूर्ति ने उसकी घरेलू और औद्योगिक जरूरतों में एक खाली जगह भरी है, उसे अचानक रोकने का असर अंततः वहां के बाजार पर ही दिखाई देगा।

बहरहाल, हिलसा की यह कहानी अब सिर्फ स्वाद, परंपरा और बंगाली भावनाओं की कहानी नहीं रह गई है। यह भारत और बांग्लादेश के बीच बदलते व्यापारिक समीकरणों और एक-दूसरे पर निर्भर बाजारों की भी कहानी है। बांग्लादेश जिस भारतीय हिलसा को अपनी आपूर्ति की कमी पूरी करने के लिए खरीदता है, वही बांग्लादेशी पद्मा हिलसा भारत में दुर्लभता और प्रतिष्ठा के कारण सोने के भाव बिकती है। यानी एक ही मछली सीमा के इस पार भावनाओं की कीमत तय करती है और उस पार जरूरत की। ऐसे में अचानक व्यापार पर लगाई गई रोक सिर्फ मछली की आवाजाही रोकने का फैसला नहीं है। यह दोनों तरफ के बाजार, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ती है कि आखिर हिलसा के बहाने रिश्तों और व्यापार का यह खेल कब तक चलता रहेगा?

-नीरज कुमार दुबे

Continue reading on the app

  Sports

पाकिस्तान के खिलाफ खौल उठता है तिलक वर्मा का खून, अभिषेक शर्मा के बाद जड़ी दूसरी सबसे तेज फिफ्टी

Tilak Varma 21 balls fifty against Pakistan: एशियन गेम्स 2026 के गोल्ड मेडल मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान के सामने 200 से ज्यादा का लक्ष्य रखा. सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा के 61 रनों के बाद उप-कप्तान तिलक वर्मा ने मैदान पर आंधी ला दी. तिलक ने सिर्फ 22 गेंदों में नाबाद 51 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें 3 चौके और 4 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे. एशिया कप के बाद पाकिस्तान के खिलाफ एक बार फिर फाइनल में अर्धशतक जड़कर तिलक ने साबित कर दिया कि वह बड़े मैचों के असली क्लच प्लेयर हैं. Sat, 3 Oct 2026 12:17:56 +0530

  Videos
See all

Akhilesh Yadav on CEC Gyanesh Kumar: ज्ञानेश कुमार पर भड़के अखिलेश! | SIR Controversy | CJP protest #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-03T07:15:32+00:00

Asian Games 2026: भारतीय टीम ने नहीं मिलाया पाकिस्तान से हाथ | Team India | Pakistan | Cricket #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-03T07:12:42+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers