RDA भूखंड आवंटन पर Chhattisgarh में विवाद, Congress ने मंत्री Kedar Kashyap का इस्तीफा मांगा
रायपुर, एक अक्टूबर छत्तीसगढ़ में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने राजधानी रायपुर के बाहरी इलाके में प्रस्तावित नगर विकास योजना के तहत राज्य के मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी एक कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया है। कांग्रेस ने वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री कश्यप से इस्तीफे की मांग की और प्रस्तावित आवंटन की स्वतंत्र एवं उच्च-स्तरीय जांच कराने को कहा। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन आरोपों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया।
यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला और प्रदेश कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड, जिसमें कश्यप की पत्नी शांति कश्यप निदेशक हैं, को कचना में कंपनी के पास मौजूद जमीन के बदले सड्डू में 23,327 वर्ग फुट का भूखंड आवंटित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी की मूल जमीन कचना की नालापारा बस्ती में एक संकरी सड़क पर स्थित है, जहां आने-जाने का रास्ता मुश्किल से छह-सात फुट चौड़ा है और उस जमीन की कीमत कुछ लाख रुपये ही है। उन्होंने बताया कि एमआर-43 नगर विकास योजना के तहत आरडीए ने मालिकों से मूल जमीन लेकर उसके बदले मूल भूखंड के क्षेत्रफल के 40 प्रतिशत के बराबर विकसित भूखंड देने का प्रावधान किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आरडीए की वेबसाइट पर करीब 23,327 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले भूखंड संख्या 25 को कंपनी को उसकी मूल जमीन के बदले आवंटित किए जाने का उल्लेख है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क विकसित होने के बाद प्रस्तावित भूखंड की कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि कचना की जमीन के बदले सड्डू में भूखंड किस आधार पर दिया जा रहा है।
कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के प्रावधानों का भी हवाला दिया और सवाल उठाया कि कंपनी को दिया जाने वाला भूखंड उसकी मूल जमीन से सटा हुआ क्यों नहीं है। कांग्रेस ने इस आवंटन की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्च-स्तरीय जांच की मांग की। इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रदेश भाजपा प्रवक्ता शिवनारायण पांडेय ने कहा कि बड़े भूखंड ऐसी जगहों पर आवंटित करना नीतिगत फैसला है, जहां आमतौर पर आवागमन की बेहतर सुविधा हो।
उन्होंने कहा कि आरडीए और वरिष्ठ मंत्री कश्यप पर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद, मनगढ़ंत और राजनीतिक निराशा से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘नगर विकास योजना कोई नयी अवधारणा नहीं है। जमीन लेने के दो तरीके हैं।
एक भूमि अधिग्रहण है, जिसके लिए मुआवजा दिया जाता है और दूसरा जमीन का विकास कर मूल जमीन के क्षेत्रफल का 40 प्रतिशत हिस्सा जमीन मालिक को वापस देना है। बाकी जमीन का इस्तेमाल विकास कार्यों के लिए किया जाता है।’’ पांडेय ने कहा कि बड़े भूखंड बेहतर आवागमन सुविधा वाले क्षेत्रों में देने का निर्णय नीतिगत है। उन्होंने कहा कि मंत्री को भाजपा ने जमीन आवंटित नहीं की है।
उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस सदस्य रिकॉर्ड देखें तो उन्हें पता चलेगा कि कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को इसी योजना के तहत 80 हजार वर्ग फुट का भूखंड आवंटित किया गया था, जो इससे करीब तीन गुना बड़ा है। उन्होंने दावा किया कि नीति के तहत बड़े भूखंड सड़कों के किनारे दिए जाते हैं, जहां आवागमन की सुविधा बेहतर हो, ताकि यातायात संबंधी समस्या पैदा किए बिना व्यावसायिक परियोजनाएं विकसित की जा सकें। पांडेय ने कहा कि जमीन खास तौर पर मंत्री की पत्नी की कंपनी को आवंटित नहीं की गई है और ऐसे 17 लोग हैं जिनके बड़े भूखंडों को फिर से व्यवस्थित किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि मंत्री की पत्नी की कंपनी की जमीन विकास योजना लागू होने से पहले से मौजूद थी और योजना तैयार होने के बाद नहीं खरीदी गई थी। आरडीए के उपाध्यक्ष डॉ. जे. पी. शर्मा ने भी पक्षपात के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा, ‘‘आवंटन नियमों के अनुसार और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए किया गया है, न कि किसी व्यक्ति का चेहरा देखकर।
जमीन मालिकों के अनियमित आकार वाले भूखंडों को नियमित आकार के भूखंडों में पुनर्गठित किया गया और अनियमित हिस्से आरडीए ने अपने पास रख लिए।
Delhi High Court ने UAPA मामले में ISIS समर्थक समूह के आरोपी को दी जमानत
नयी दिल्ली, एक अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने आतंकवाद-रोधी कानून के तहत दर्ज एक मामले में आईएसआईएस समर्थक समूह ‘हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम’ के कथित सदस्य मोहम्मद शहजाद कमाल को बृहस्पतिवार को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति अरुण भारद्वाज की पीठ ने कहा कि आरोपी पांच साल से अधिक समय से हिरासत में है और उसके खिलाफ दर्ज मामले में उसे लगातार हिरासत में रखे जाने को उचित नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है। कमाल को 2018 में एनआईए की ओर से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले के सिलसिले में 31 अगस्त 2021 को गिरफ्तार किया गया था।
उसने निचली अदालत की ओर से 29 मई 2024 को उसकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद उच्च न्यायालय का रुख किया था। अदालत ने आदेश में कहा, ‘‘निचली अदालत द्वारा पारित आदेश को बरकरार नहीं रखा जा सकता और इसलिए उसे निरस्त किया जाता है। अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है।’’ राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के अनुसार, कमाल ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने के लिए आपराधिक साजिश रची और प्रतिबंधित संगठन आईएसआईएस से संबद्ध आतंकवादी गिरोह ‘हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम’ की “जिहादी गतिविधियों” के लिए धन मुहैया कराने में मदद की।
एनआईए के मुताबिक, कमाल ने आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए कई मौकों पर कथित तौर पर धन मुहैया कराया। अदालत ने आरोपी को 50 हजार रुपये के जमानती बॉण्ड और इतनी ही राशि के दो मुचलकों पर रिहा करने का निर्देश दिया। अदालत ने उस पर कई शर्तें भी लगाईं, जिनमें अपना पासपोर्ट जमा करना और उत्तर प्रदेश के हापुड़ स्थित अपने पैतृक स्थान को छोड़कर बाहर नहीं जाना शामिल है।
हालांकि, मुकदमे में पेश होने या एनआईए कार्यालय में रिपोर्ट करने के लिए दिल्ली जाने की अनुमति होगी। अदालत ने उसे मामले के संबंध में कोई सार्वजनिक बयान देने या ऐसी किसी गतिविधि में शामिल होने से भी रोक दिया, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था या मुकदमे की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। साथ ही, उसे किसी भी सोशल मीडिया मंच या अन्य माध्यम से राष्ट्र-विरोधी सामग्री प्रसारित करने से भी मना किया गया है।
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