फॉग में भी ट्रेन की सुरक्षा पर नजर रखेगा ‘कवच’, रतलाम में 68 इंजन हुए अपग्रेड, 28 पर काम जारी
ट्रेन हादसों को रोकने और रेल सफर को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए रतलाम रेल मंडल में स्वदेशी ‘कवच’ सिस्टम पर तेजी से काम चल रहा है। दरअसल रतलाम के डीजल लोको शेड में 96 इंजनों को इस ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम से अपग्रेड किया जा रहा है। इनमें 68 इंजन तैयार हो चुके हैं। कवच खराब मौसम, फॉग, ओवरस्पीड और सिग्नल से जुड़ी स्थिति में लोको पायलट की मदद करेगा और जरूरत पड़ने पर ट्रेन में अपने आप ब्रेक लगाने में भी मदद करेगा।
दरअसल रेलवे दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर मिशन रफ्तार के तहत ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक करने की तैयारी कर रहा है। रतलाम के लोकोमोटिव केयर सेंटर यानी डीजल लोको शेड में इंजनों को इस सिस्टम के लिए अपग्रेड किया जा रहा है।
पैसेंजर और गुड्स दोनों तरह की ट्रेनों के इंजन शामिल
बता दें कि इनमें पैसेंजर और गुड्स, दोनों तरह की ट्रेनों के इंजन शामिल हैं। अब तक 7 पैसेंजर ट्रेन और 61 गुड्स ट्रेन के इंजनों में कवच सिस्टम अपडेट किया जा चुका है। बाकी इंजनों में भी अपग्रेडेशन का काम जारी है। रेलवे के लिए यह सिस्टम खास तौर पर उन परिस्थितियों में मददगार होगा जब लोको पायलट को खराब मौसम, फॉग या सिग्नल से जुड़ी किसी स्थिति में परेशानी का सामना करना पड़े।
रतलाम में 68 इंजनों में कवच अपग्रेड
दरअसल कवच सिस्टम का एक अहम काम ट्रेन के सुरक्षित संचालन में लोको पायलट की मदद करना है। रेल अधिकारियों के अनुसार अगर किसी वजह से लोको पायलट ब्रेक लगाने में चूक जाता है या सिग्नल दिखाई नहीं देता और ट्रेन के लाल सिग्नल पार करने की स्थिति बनती है तो कवच सिस्टम अपने आप ब्रेक लगाने में मदद कर सकता है। इसका मकसद ट्रेन को सुरक्षित तरीके से रोकने में सहायता करना है। सिस्टम तेज गति को कंट्रोल करने और सिग्नल की जानकारी समय पर देने में भी मदद करता है। अगर एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आमने-सामने आने की स्थिति बनती है तो कवच ऑटोमैटिक ब्रेकिंग के जरिए ट्रेन को रोकने में मदद करता है। इसके अलावा पीछे से होने वाली टक्कर के खतरे को कम करने, गति प्रतिबंध का पालन कराने और लोको पायलट को रियल टाइम सिग्नल की जानकारी देने में भी इसकी भूमिका है।
224 रूट किलोमीटर में कवच सिस्टम एक्टिव
रतलाम रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार पांडेय के अनुसार नागदा से गोधरा के बीच 224 रूट किलोमीटर में कवच सिस्टम एक्टिव किया जा चुका है। इसमें 154 किलोमीटर रतलाम रेल मंडल और 70 किलोमीटर वडोदरा रेल मंडल में आता है। इस सेक्शन में कवच का काम पहले ही पूरा हो चुका है। इसके अलावा रतलाम-चंदेरिया सेक्शन में करीब 40 प्रतिशत काम पूरा हो गया है, जबकि उज्जैन-इंदौर सेक्शन के लिए काम स्वीकृत हो चुका है।
‘कवच’ सिस्टम कैसे काम करता है?
दरअसल कवच रेलवे की स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है। इसे आरडीएसओ ने विकसित किया है। ट्रेन के लोको में लगाए गए सेंसर, GPS और रेडियो कम्युनिकेशन की मदद से यह सिस्टम ट्रेन की स्थिति और सिग्नल से जुड़ी जानकारी पर नजर रखता है। इसका इस्तेमाल ट्रेन के सुरक्षित संचालन में लोको पायलट की सहायता के लिए किया जाता है।
“गृहमंत्री को भी सिर्फ फीता काटने तक..” अमित शाह के भोपाल दौरे पर उमंग सिंघार ने साधा निशाना, उठाया बालाघाट का मुद्दा
भोपाल: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर को मध्यप्रदेश दौरे पर आने वाले हैं। उनके प्रस्तावित दौरे को लेकर भोपाल प्रशासन एवं सरकार की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अमित शाह के दौरे से पहले लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को राज्य के दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने बालाघाट पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की एवं उनकी समस्याएं सुनीं। लेकिन अब अमित शाह के दौरे एवं बालाघाट मुद्दे को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है।
जानकारी के अनुसार, एक तरफ राहुल गांधी ने बच्चों की मौत, स्वास्थ्य सुविधाओं, पेयजल, रोजगार, वन अधिकार और सरकारी योजनाओं को लेकर सरकार से सवाल किए और कहा कि वे इन मुद्दों को लोकसभा में उठाएंगे। वहीं, दूसरी ओर विपक्ष ने बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले अमित शाह पर निशाना साधा है।
अमित शाह के दौरे को लेकर उमंग सिंघार ने उठाए सवाल
एमपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर अमित शाह के प्रस्तावित राज्य के दौरे को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के पास डेयरी प्लांट के उद्घाटन के लिए समय है लेकिन क्या वे बालाघाट जाकर वहां की स्थिति का जायजा लेने और प्रभावित आदिवासी परिवारों से मिलने का भी समय निकालेंगे?
बालाघाट की घटना पर सरकार से जवाब की मांग
सिंघार ने बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी स्वयं प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्री को भी केवल उद्घाटन कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता चुनावी कार्यक्रमों और उद्घाटन के भाषणों के बजाय बालाघाट की घटना पर सरकार से जवाब चाहती है।
अमित शाह के भोपाल कार्यक्रम की खास बातें
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भोपाल के भेल दशहरा मैदान में पशुपालकों और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों एवं पदाधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
- कार्यक्रम में प्रदेश के 35 हजार से अधिक गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्य शामिल होंगे।
- भोपाल, सीहोर, बैतूल, राजगढ़, हरदा, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, विदिशा, रायसेन और नर्मदापुरम समेत कई जिलों से प्रतिभागी पहुंचेंगे।
- कार्यक्रम में दुग्ध संयंत्र, डेयरी प्रसंस्करण और गुणवत्ता जांच लैब से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की सौगात मिलेगी।
- उज्जैन में 255 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले डेयरी प्लांट का भी कार्यक्रम में उल्लेख रहेगा।
- भोपाल में फर्मेंटेड प्रोडक्ट मिल्क प्लांट की परियोजना भी शामिल है।
- भोपाल पश्चिमी बायपास का भूमिपूजन किया जाएगा।
- प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के तहत हुई गतिविधियों की जानकारी अमित शाह को दी जाएगी।
- बलराम कृषि महोत्सव के आयोजन की विस्तृत जानकारी भी प्रस्तुत की जाएगी।
- गृह, पशुपालन एवं डेयरी, सहकारिता, लोक निर्माण और परिवहन विभाग के कार्यों का प्रेजेंटेशन होगा।
- भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ के पशुपालकों को बोनस वितरित किया जाएगा।
- गौशालाओं के लिए सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
- गोपालक दीदियों का सम्मान किया जाएगा।
- गोपालक दीदियों को डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र वितरित किए जाएंगे।
गृह मंत्री श्री @AmitShah जी 2 दिनों के लिए मध्य प्रदेश आ रहे हैं।
डेयरी प्लांट का उद्घाटन करने का समय तो आपके पास है, लेकिन क्या आप बालाघाट जाने का कष्ट करेंगे? जहां आपकी सरकार की नाकामी के चलते 40 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत हो गई!
जब जननायक श्री @RahulGandhi जी स्वयं धरातल…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) October 1, 2026
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