Explainer: किसी फिल्म को सुबह का, तो किसी को रात का शो क्यों मिलता है? थिएटर में शो टाइमिंग कैसे होती है तय?
Film Theatre Show Timing: जब कोई फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होती है तो उसके शो किस टाइम पर होंगे, यह फैसला सिर्फ थिएटर का मालिक नहीं करता है. इसके पीछे की कई चीजें को देखा जाता है कि फिल्म की डिमांड कितनी है. एडवांस बुकिंग, स्टार कास्ट, फिल्म का टारगेट ऑडियंस, रिलीज का दिन कौन सा है. इतना ही नहीं कहीं इस दिन दूसरी रिलीज तो रिलीज नहीं हो रही और उस थिएटर में स्क्रीन की संख्या कितनी है. इन सब चीजों को भी देखा जाता है. आम तौर पर थिएटर मैनेजमेंट और फिल्म की टीम मिलकर शो की टाइमिंग को लेकर प्लान बनाते हैं. जिसके बाद कुछ फिल्मों को सुबह से ही कई शो मिल जाते हैं, जबकि कुछ फिल्मों को दोपहर, शाम और रात के शो ज्यादा मिलते हैं. इसका सीधा कनेक्शन होता है कि कैसे ज्यादा से टिकट बेच सकें.
सुबह के शो किस फिल्म को ज्यादा मिलते हैं?
सुबह के शो को आमतौर पर पहला शो स्लॉट माना जाता है. कई मल्टीप्लेक्स में सुबह 8 या 9 बजे से फिल्म के शो शुरू हो जाते हैं. हालांकि टाइम हर शहर और थिएटर के हिसाब से अलग भी होता है. अगर किसी फिल्म की एडवांस बुकिंग अच्छी हो रही है तो उस फिल्म को सुबह के शो ज्यादा मिल सकते हैं. खासकर बड़ी स्टार कास्ट वाली फिल्मों में पहले दिन से ही ऑडियंस की एक्साइटमेंट देखने को मिलती है. कुछ फिल्मों में सुबह के शो इसलिए भी रखे जाते हैं क्योंकि ऑडियंस पूरे दिन अलग-अलग टाइम पर फिल्म देखने आ सकती है. जिससे एक ही स्क्रीन पर दिन में ज्यादा शो चलाने का मौका मिलता है.
रात के शो इतने खास क्यों माने जाते हैं?
शाम और रात का टाइम थिएटर के लिए काफी अहम माना जाता है. दरअसल, कई सारे लोग ऑफिस और स्कूल-कॉलेज के बाद फिल्म देखने निकलते हैं. इसलिए शाम से लेकर रात के टाइम में टिकट की डिमांड अक्सर बढ़ जाती हैं. इसी वजह से कई फिल्मों के प्राइम टाइम शो शाम और रात में रखे जाते हैं. वहीं, अगर किसी फिल्म की ऑडियंस फैमिली, यंग लोग या वीकेंड पर बाहर जाने वाले लोग हैं, तो थिएटर मालिक शो की टाइमिंग उसी हिसाब से तय करते हैं.
फिल्म की एडवांस बुकिंग से भी बदलती है शो की टाइमिंग
आज के टाइम में एडवांस बुकिंग शो प्लानिंग के लिए बहुत अहम होती है. अगर किसी फिल्म के कुछ शो पहले ही हाउसफुल चल रहे हैं तो थिएटर के पास उन शो की जगह और शो जोड़ने का ऑप्शन होता है. मान लीजिए किसी फिल्म का सुबह 10 बजे वाला शो हाउसफुल हो गया है. लेकिन दोपहर का शो धीमा है. थिएटर मैनेजमेंट इस सिचुएशन में सुबह के आसपास एक और शो लगाने के बारे में सोच सकता है. यानी शो टाइमिंग पहले से पूरी तरह फिक्स नहीं होती बल्कि थिएटर मालिक बुकिंग का रिस्पॉन्स देखकर इसमें बदलाव भी कर सकते हैं.
स्टार की फैन फॉलोइंग का भी होता है असर
फिल्म में कौन सा बड़ा स्टार है, यह भी शो प्लानिंग पर असर डालती है. किसी बड़े एक्टर या एक्ट्रेस की फिल्म के लिए फैंस पहले दिन सुबह से ही थिएटर जाने लगते हैं. ऐसे में थिएटर के पास ज्यादा शो चलाने का मौका होता है. वहीं, कुछ फिल्मों के लिए फैंस सुबह जल्दी शो दिखाने की डिमांड भी करते हैं. वहीं कुछ फिल्मों की ऑडियंस शाम या रात में ज्यादा थिएटर जाती है. ऐसे में थिएटर मैनेजमेंट टिकट की डिमांड को देखकर स्लॉट तय करते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि हर बड़े स्टार की फिल्म को सुबह या रात में ही ज्यादा शो मिलेंगे. बता दें कि इसका असली फैसला फिल्म की डिमांड और थिएटर की प्लानिंग पर डिपेंड करता है.
वीकडे और वीकेंड की टाइमिंग अलग हो सकती है
आपको बता दें कि शुक्रवार से रविवार तक थिएटर शो की टाइमिंग अलग हो सकती है. जहां वीकडे में सुबह और दोपहर के शो की डिमांड कुछ जगह कम हो सकती है, जबकि शाम को ज्यादा डिमांड हो सकती है. दरअसल, लोग वीकेंड पर लोग ज्यादा फ्री होते हैं. इसलिए सुबह, दोपहर, शाम और रात में भी टिकट की डिमांड बढ़ सकती है. इसी वजह से शनिवार और रविवार को थिएटर एक फिल्म के ज्यादा शो चला सकता है.वहीं, अगर किसी फिल्म को वीकेंड पर अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, तो थिएटर अगले कुछ दिनों के लिए भी उसके शो चला सकता है.
शहर के हिसाब से भी बदलती है टाइमिंग
हर शहर में ऑडियंस का फिल्म देखने का टाइम एक जैसा नहीं होता. इंडिया में कई बड़े शहरों में ऑफिस टाइम, ट्रैफिक और मेट्रो जैसी चीजों का असर शो की टाइमिंग पर पड़ता है. कुछ शहरों में रात के शो की डिमांड ज्यादा हो होती है तो कुछ में लोग शाम या दोपहर में फिल्म देखना पसंद कर सकते हैं. थिएटर इसी लोकल ऑडियंस के हिसाब से अपने शो की टाइमिंग प्लान करते हैं. एक ही फिल्म को अलग-अलग शहरों में अलग शो टाइमिंग मिलना नॉर्मल होता है.
मल्टीफ्लेक्स में एक ज्यादा स्क्रीन पर चलाई जा सकती है फिल्म
मल्टीप्लेक्स में कई स्क्रीन होती हैं. जिसके चलते एक ही फिल्म को एक से ज्यादा स्क्रीन मिल सकती हैं. अगर किसी फिल्म की डिमांड बहुत ज्यादा है तो उसे ज्यादा स्क्रीन दी जाती है. लेकिन अगर एक ही दिन कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं, तो स्क्रीन को लेकर मुकाबला हो सकता है. जिसके चलते थिएटर को सभी फिल्मों के बीच स्क्रीन और शो बांटने पड़ते हैं. मान लीजिए किसी मल्टीप्लेक्स में 5 स्क्रीन हैं और एक ही दिन 3 बड़ी फिल्में रिलीज हुई हैं. अब थिएटर को यह तय करेगा कि किस फिल्म को डिमांड के हिसाब से कितने शो दिए जाएं.
दूसरी फिल्मों की रिलीज भी बदल देती है पूरा प्लान
आपको बता दें कि किसी फिल्म की शो टाइमिंग अकेले तय नहीं होती. उस पर हाल ही में रिलीज होने वाली दूसरी फिल्मों का भी असर पड़ता है. अगर एक ही दिन कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं तो थिएटर सभी को शो देने की कोशिश करता है. अगर किसी फिल्म की एडवांस बुकिंग ज्यादा है, तो उसे ज्यादा शो मिलते हैं. वहीं कम बुकिंग वाली फिल्म के शो कम दिए जाते हैं और शो की टाइमिंग भी ज्यादा खास नहीं होती है. कई बार फिल्म रिलीज होने के बाद भी यह प्लान बदल जाता है क्योंकि जिस फिल्म के टिकट ज्यादा बिकने लगते हैं, उसके शो बढ़ाए दिए जाते हैं.
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