CM भगवंत सिंह मान ने पंजाब की महिलाओं के खातों में एक बार फिर डाली सम्मान राशि
'मावां-धीआं सतिकार योजना' के तहत 3,000 से 4,500 रुपये सीधे खातों में ट्रांसफर होने की पुष्टि वाले संदेश मिलते ही पंजाब की महिलाओं के चेहरों पर छाई खुशी ने इस भलाई योजना के सकारात्मक प्रभाव पर मोहर लगा दी है. इसके कारण राज्य भर की महिलाएं फिर से भगवंत मान सरकार लाने के हक में नारा लगा रही हैं. गोइंदवाल साहिब में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी सरकार लोगों के टैक्स का पैसा सीधा उनकी भलाई वाली योजनाओं में लगा रही है और दावा किया कि जब तक उनकी सरकार सत्ता में रहेगी, महिलाओं के मोबाइल फोनों पर 'टूं-टूं' के संदेश लगातार पहुंचते रहेंगे. उन्होंने आगे कहा कि अगर कांग्रेस, भाजपा या अकाली दल सत्ता में आते हैं तो महिलाओं की मासिक सम्मान राशि, मुफ्त बिजली और मुफ्त बस यात्रा जैसी सुविधाएं बंद कर दी जाएंगी.
3,000 से 4,500 रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए
अपने 'एक्स' हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, "श्री गोइंदवाल साहिब में हुए समागम में इतनी बड़ी संख्या में पहुंचने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद. आज 'मावां धीआं सतिकार योजना' के तहत मांएँ-बेटियों के खातों में 3,000 से 4,500 रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए हैं. हमारी सरकार लोगों के टैक्स का पैसा सिर्फ और सिर्फ उनकी भलाई पर खर्च कर रही है. इसी ईमानदार नीति की बदौलत पंजाब आज शिक्षा और अन्य जनसेवाओं में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है. इंकलाब जिंदाबाद."
श्री खडूर साहिब में करवाए गए समागम के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने महान सिख गुरु साहिबान की चरण स्पर्श प्राप्त इस पवित्र धरती पर नतमस्तक होकर अपनी श्रद्धा और सम्मान भेंट किया. इस दौरान संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "यह वही पवित्र धरती है, जहां श्री गुरु अमरदास जी ने सती प्रथा का अंत किया और लंगर प्रथा को और मजबूत किया, जिसमें माता खीवी जी ने खुद सेवा निभाई. उन्होंने कहा कि इसी लिए हमने 'मावां-धीआं सतिकार योजना' के लिए इस महान और ऐतिहासिक धरती का चयन किया है."
1,262.54 करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किए
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की मांएँ-बेटियों के लिए अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर महीने की दूसरी किस्त जारी की जा रही है और 36.87 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 1,262.54 करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा, "आज हर महिला को तीन महीने की किस्त एक साथ मिल रही है. इससे पहले 73.99 लाख महिलाओं को सम्मान राशि के रूप में 2,562.33 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं. आज की राशि को मिलाकर अब तक महिलाओं के बैंक खातों में सम्मान राशि के रूप में कुल 3,824.87 करोड़ रुपये सीधे भेजे जा चुके हैं."
97 फीसदी महिलाएं लाभ लेने के योग्य होंगी
उन्होंने कहा, "यह योजना एक सामाजिक क्रांति है, जो हमारी मांएँ-बेटियों का आत्म-विश्वास और स्वाभिमान बढ़ाएगी. यह महिलाओं की आर्थिक आजादी का मार्ग भी है. पंजाब की लगभग 97 फीसदी महिलाएं इस योजना का लाभ लेने के योग्य होंगी. यह देश की अपनी तरह की पहली ऐसी योजना है, जिसके तहत सभी योग्य महिलाओं को सम्मान राशि दी जा रही है. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य सम्मान योजना का लाभ एक करोड़ महिलाओं तक पहुंचाना है."
51 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "इस योजना के तहत कोई शर्तें नहीं हैं. अगर एक ही परिवार में तीन महिलाएं योग्य हैं तो तीनों ही सम्मान राशि लेने की हकदार हैं. योजना के तहत महिलाओं की रजिस्ट्रेशन करवाने में 1.37 लाख 'सतिकार सखियों' ने सबसे बड़ा योगदान दिया है और उन्हें प्रोत्साहन राशि के रूप में अब तक 51 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है."
70,000 से अधिक नौकरियों देने का मामला
उन्होंने आगे बताया, "इसी तरह रजिस्ट्रेशन के काम में सहयोग दे रही आंगनवाड़ी वर्करों को भी 25 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी." मुख्यमंत्री ने कहा, "सरकारों की जिम्मेदारी लोगों से टैक्स इकट्ठा करके उस पैसे को मुड़ लोगों की भलाई के लिए खर्च करने की होती है. चाहे वह विकास कार्य हों, खेतों के काम हों, सड़कों के काम हों, 14,000 किलोमीटर पाइपलाइनें बिछाने की बात हो या 70,000 से अधिक नौकरियों देने का मामला हो—हमारी सरकार लोगों के पैसे का इस्तेमाल लोक भलाई के लिए ईमानदारी से कर रही है. हमारी सरकार इस नेक काम के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही."
यत्नों के नतीजे सामने आने शुरू हो जाएंगे
मुख्यमंत्री ने कहा, "2027 से 2032 तक विकास की रफ्तार और तेज होगी क्योंकि इस कार्यकाल के दौरान सूबा सरकार की ओर से किए गए यत्नों के नतीजे सामने आने शुरू हो जाएंगे." उन्होंने कहा, "हम यूपीएससी की तैयारी के लिए नए केंद्र खोलेंगे ताकि सूबे के बच्चे आईएएस और आईपीएस अधिकारी बन सकें." मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "विरोधी पक्ष कहता था कि मुफ्त बिजली कभी भी हकीकत नहीं बनेगी, पर आज राज्य सरकार योग्य परिवारों को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है. हमने 1,080 करोड़ रुपये की लागत से गोइंदवाल साहिब थर्मल पावर प्लांट खरीदा. पंजाब में ऐसा पहली बार हुआ है और कोयले की कोई कमी नहीं है." उन्होंने कहा, "कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल के नेता एक-दूसरे के खिलाफ नहीं बोलते, पर मुझे निशाना बनाते हैं क्योंकि उन्हें यह बात हजम नहीं हो रही कि एक आम आदमी का पुत्र पूरी तनदेही और सुहिर्दता से राज्य की सेवा कर रहा है."
आरबीआई ने फेमा उल्लंघन मामले में बीपीटीपी लिमिटेड के खिलाफ कंपाउंडिंग आदेश जारी किया
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रियल एस्टेट डेवलपर बीपीटीपी लिमिटेड और उसके दो निदेशकों कबीर चावला तथा सुधांशु त्रिपाठी के खिलाफ विदेशी मुद्रा कानून के उल्लंघन से जुड़े मामले में कंपाउंडिंग आदेश जारी किया है। कंपनी ने 2007 और 2008 में हुए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लेनदेन से जुड़े मामले में कुल 4.84 करोड़ रुपये की कंपाउंडिंग राशि का भुगतान करने पर सहमति जताई है।
यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल कार्यालय द्वारा बीपीटीपी लिमिटेड, जिसे पहले बिज़नेस पार्क टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, में मिले एफडीआई की जांच से सामने आया था।
जांच में मॉरीशस स्थित सीपीआई इंडिया एल लिमिटेड और हार्बर विक्टोरिया इन्वेस्टमेंट होल्डिंग लिमिटेड से कंपनी को मिले करीब 537.5 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश की पड़ताल की गई थी।
आरबीआई ने कहा, “भारतीय रिजर्व बैंक ने 17 सितंबर 2026 को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 की धारा 15(1) तथा इसके तहत बनाए गए नियमों, विनियमों, अधिसूचनाओं और आदेशों के तहत बीपीटीबी लिमिटेड और उसके निदेशकों कबीर चावला तथा सुधांशु त्रिपाठी के मामले में कंपाउंडिंग आदेश जारी किए हैं।”
जांच के अनुसार, बीपीटीबी को 21 अगस्त 2007 को सीपीआई इंडिया एल लिमिटेड से करीब 7.767 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 322.5 करोड़ रुपये) और 9 जुलाई 2008 को हार्बर विक्टोरिया इन्वेस्टमेंट होल्डिंग लिमिटेड से करीब 4.984 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 215 करोड़ रुपये) प्राप्त हुए थे।
जांच में पाया गया कि निवेश समझौतों में पुट ऑप्शन और निवेशकों को निश्चित आंतरिक रिटर्न (आईआरआर) देने से संबंधित प्रावधान शामिल थे। उस समय एफडीआई से जुड़े लागू फेमा प्रावधानों के तहत इस तरह की शर्तें अनुमत नहीं थीं।
ईडी का आरोप था कि कंपनी ने ऑटोमैटिक रूट के तहत विदेशी निवेश हासिल किया, लेकिन निवेशकों को स्वैप और पुट ऑप्शन व्यवस्था के माध्यम से सुनिश्चित रिटर्न देने की पेशकश की गई थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस तरह के समझौते विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 और विदेशी निवेशकों को शेयर जारी करने से संबंधित नियमों एवं विनियमों के प्रावधानों के विपरीत थे।
जांच में यह भी सामने आया कि बीपीरटीपी ने सीपीआई इंडिया एल लिमिटेड से प्राप्त विदेशी निवेश में से करीब 320 करोड़ रुपये अपने प्रोजेक्ट्स में लगाने के बजाय फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड में निवेश किए थे। निवेश समझौते की शर्तों के अनुसार इस राशि का इस्तेमाल कंपनी की परियोजनाओं में किया जाना था। इसे भी फेमा के तहत एक अलग उल्लंघन के रूप में दर्ज किया गया।
--आईएएनएस
डीएससी
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