अफगानिस्तान का काल बना पाकिस्तान, एयर स्ट्राइक में अब तक 22 लड़ाके मारने का किया दावा
Pakistan Airstrike in Afghanistan: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. पाकिस्तान ने बुधवार देर रात अफगानिस्तान के कुनार और हेलमंद प्रांतों में हवाई हमले किए. अफगानिस्तान की तालिबान सरकार का कहना है कि हमलों में कम से कम 9 लोग मारे गए और 11 घायल हुए. मारे गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. वहीं, पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके हमलों में सशस्त्र संगठनों के 22 लड़ाके मारे गए हैं. दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.
पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय के मुताबिक, उसकी सेना ने अफगानिस्तान में दो जगहों पर सशस्त्र समूहों के ठिकानों को निशाना बनाया. पाकिस्तान का कहना है कि ये हमले विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए थे. उसके मुताबिक, निशाने पर पाकिस्तान तालिबान यानी टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) से जुड़े ठिकाने थे. पाकिस्तान ने दावा किया कि हमलों में 22 लड़ाके मारे गए और बड़ी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद भी नष्ट किया गया. पाकिस्तान का कहना है कि अभियान के दौरान नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए सावधानी बरती गई.
Sole survivor found after Pakistan's airstrike
— Ariana News (@ArianaNews_) October 1, 2026
Ariana News reporter Najibullah Sahel, who visited the site of the reported Pakistani airstrike, says an entire family was killed inside a home, with only one man, identified as Nader Khan, surviving.
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नागरिकों को निशाना बनाने का लगा आरोप
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के दावे से अलग तस्वीर पेश की है. तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि हमले कुनार के शुल्तान इलाके और हेलमंद के गार्मसेर क्षेत्र में हुए. उनके मुताबिक, तीन घरों को नुकसान पहुंचा और कम से कम 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 11 लोग घायल हुए.
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मुजाहिद ने पाकिस्तान की कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे अफगानिस्तान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई बताया. अफगान सरकार लगातार पाकिस्तान के इन आरोपों को खारिज करती रही है कि उसकी जमीन से टीटीपी जैसे संगठन पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं.
तीन महीने की शांति के बाद फिर बढ़ा तनाव
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कुछ समय से सीमा पार हिंसा और आतंकी गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है. करीब तीन महीने की अपेक्षाकृत शांति के बाद दोनों देशों के बीच फिर सैन्य कार्रवाई तेज हुई है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन पर मौजूद टीटीपी और दूसरे सशस्त्र समूह उसके इलाके में हमले करते हैं. अफगानिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है और पाकिस्तान की कार्रवाई को अपनी संप्रभुता में हस्तक्षेप बताता है.
पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान क्षेत्रों में लगातार हिंसा के कारण इस्लामाबाद अफगान सीमा के पार मौजूद सशस्त्र संगठनों पर कार्रवाई का दबाव महसूस करता रहा है. दूसरी ओर, काबुल का कहना है कि पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के लिए अफगानिस्तान पर सैन्य कार्रवाई नहीं करनी चाहिए.
सीमा पार हिंसा में बढ़ रही नागरिकों की परेशानी
दोनों देशों के बीच जारी तनाव का असर आम लोगों पर भी पड़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने पिछले सप्ताह बताया था कि इस साल अफगानिस्तान में सीमा पार हिंसा के कारण 1,100 से ज्यादा नागरिक हताहत हुए हैं. इसमें मारे गए और घायल दोनों लोग शामिल हैं. ताजा हवाई हमलों ने एक बार फिर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को सामने ला दिया है. फिलहाल दोनों देशों की ओर से हमलों में मारे गए लोगों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं और इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
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स्वच्छ भारत मिशन के 12 साल: एआई, रोबोट और ईवी से बदल रही शहरों की सफाई व्यवस्था
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। स्वच्छ भारत मिशन के 12 साल पूरे होने से पहले गुरुवार को जारी एक सरकारी फैक्टशीट में बताया गया कि शहर साफ-सफाई सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बयान में कई उदाहरण देते हुए कहा गया कि स्थानीय निकाय कचरे और जल-निकायों के प्रबंधन के लिए एआई से लेकर ईवी तक के साधनों का इस्तेमाल करके सुरक्षित, साफ और ज्यादा कुशल तरीके अपना रहे हैं।
रायपुर नगर निगम ने यूपीवाईओजी प्लेटफॉर्म पर आधारित एक डिजिटल फिकल स्लज मैनेजमेंट (एफएसएम) डैशबोर्ड प्रोटोटाइप पेश किया। यह प्लेटफॉर्म आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स और नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन से जुड़ा है।
यह सिस्टम निवासियों को ऑनलाइन डी-स्लजिंग (सेप्टिक टैंक की सफाई) सेवाएं बुक करने, डिजिटल रूप से भुगतान करने और प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से ट्रैक करने की सुविधा देता है। पहले, सेप्टिक टैंक की सफाई सेवाओं के लिए उन्हें नगर निगम कार्यालय जाना पड़ता था।
जैसे ही कोई निवासी अपना मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी डालता है, सिस्टम अपने-आप पता ढूंढ लेता है। बयान में बताया गया कि एक सिंगल-पेज फॉर्म के जरिए डी-स्लजिंग सेवा बुक की जा सकती है।
काम पूरा होने के बाद ड्राइवर तस्वीरें अपलोड करते हैं, और डैशबोर्ड शहर को वाहनों की निगरानी करने और संसाधनों की योजना बेहतर ढंग से बनाने में भी मदद करता है। डिजिटल निगरानी, सीवर की मैन्युअल (हाथ से) सफाई से मशीनीकृत सफाई की ओर बढ़ने में मदद करती है।
तिरुवनंतपुरम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने अमायिझानचन नहर की सफाई के लिए एआई-पावर्ड नहर-सफाई सिस्टम, जी-स्पाइडर (एसपीआईडीईआर) रोबोट को पेश किया है।
यह रोबोट जमा हुए कचरे का पता लगाने, उसका आकलन करने और उसे हटाने के लिए मशीन विजन और सेंसर इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करता है। यह अलग-अलग तरह के कचरे, पानी के बहाव की स्थितियों और बनावट से जुड़ी चुनौतियों के हिसाब से रियल-टाइम में खुद को ढाल लेता है। इसके फाइव-डिग्री-ऑफ-फ्रीडम मैकेनिज्म में मिले-जुले और अनियमित आकार के कचरे को उठाने के लिए बायोमिमेटिक पंजे का इस्तेमाल किया जाता है। निकाले गए कचरे को सीधे तय कलेक्शन गाड़ियों में डाल दिया जाता है।
जी-स्पाइडर जहरीली गैसों, दूषित पानी और खतरनाक कचरे के सीधे संपर्क को कम करके कर्मचारियों की सुरक्षा को बेहतर बनाता है। यह पानी के ऊंचे स्तर और लगातार बहाव की स्थितियों में भी काम कर सकता है, जिससे नहर की सफाई का काम तय समय पर और व्यवस्थित तरीके से हो पाता है।
गुंटूर शहर में, 200 से ज्यादा इलेक्ट्रिक ऑटो ने शहर भर में घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने के काम को ज्यादा साफ-सुथरा बना दिया है। हर गाड़ी में जीपीएस ट्रैकिंग लगी है, जिससे कचरा इकट्ठा करने के काम की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकती है। इस पहल से हर साल 71,000 लीटर से ज्यादा डीजल की जरूरत खत्म हो गई है और अनुमान है कि इससे एक दशक में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 21,000 टन की कमी आएगी।
बयान में कहा गया है कि 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन अब डिजिटल, सेंसर-बेस्ड और इलेक्ट्रिक शहरी साफ-सफाई व्यवस्था में बदल गया है।
तमिलनाडु में ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन ने घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने के लिए सभी 15 जोन में 5,478 बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा तैनात किए हैं। ये गाड़ियां रोजाना लगभग 40 किलोमीटर चलती हैं और डीजल से चलने वाली कचरा इकट्ठा करने वाली गाड़ियों की जगह ले रही हैं।
यह फ्लीट हर दिन लगभग 41 टन कार्बन उत्सर्जन कम करता है, जिससे सालाना 15,160 टन की कमी आती है।
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर ने मुख्य इलाकों में घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने के लिए 100 इलेक्ट्रिक वाहन तैनात किए हैं। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) के जरिए रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग से निगरानी और सेवा में पारदर्शिता बनी रहती है।
--आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
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