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SIR में गड़बड़ी पर कर्नाटक सीएम धरने पर बैठे:बेंगलुरु में कई मंत्रियों के साथ प्रदर्शन; 45 लाख वोटरों के नाम हटाने की साजिश का आरोप

कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार SIR में गड़बड़ियों को लेकर राज्य चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा कि फॉर्म 7 के दुरुपयोग में शामिल लोगों के खिलाफ जब तक रिपोर्ट दर्ज नहीं होगी, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे। यह प्रदर्शन राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार के कार्यालय के बाहर हो रहा है। उनका कहना है कि SIR में गड़बड़ियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। इससे पहले उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि 45 लाख से ज्यादा वोटरों के नामों में गड़बड़ियां सामने आई हैं। थोक में फॉर्म-7 आवेदन देकर ृवोटरों के नाम हटाने की साजिश की जा रही है। राज्य सरकारें या उनकी पुलिस चुनाव आयुक्तों पर उनके सरकारी काम को लेकर सीधे केस दर्ज नहीं कर सकती हैं। कर्नाटक में SIR अगस्त में खत्म हुई कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया जून से 8 अगस्त 2026 तक चली। इससे पहले राज्य में कुल 5.54 करोड़ मतदाता थे। SIR के दौरान 1 करोड़ (करीब 1.08 करोड़) नाम हटाए गए, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या घटकर लगभग 4.46 करोड़ रह गई। इ सके अलावा विसंगतियों के चलते करीब 43 लाख मतदाताओं को नोटिस भी जारी किए गए। दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद आखिरी लिस्ट साल के अंत में जारी होगी। दावा- पहले से भरे हुए फॉर्म-7 जमा किए गए शिवकुमार ने बताया कि विजयपुरा, भालकी, बेलगावी, मैसूरु, मुदिगेरे और बेंगलुरु समेत कई विधानसभा क्षेत्रों में लोगों को पहले से भरे हुए फॉर्म-7 दिए गए। इन फॉर्म में वोटरों के नाम, पते और EPIC नंबर पहले से दर्ज थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 70% से ज्यादा बूथों में BJP और पार्टी से जुड़े नेताओं ने फॉर्म-7 लिए हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कुछ लोगों ने दर्जनों और कुछ ने सैकड़ों आवेदन जमा किए। उन्होंने 84, 92, 241 और 423 फॉर्म जमा करने वाले लोगों के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि इन आवेदनों का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों, दलितों, अनुसूचित जातियों और आदिवासी वोटरों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। खबर अपडेट हो रही है…

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SC का TMC के 4 अकाउंट्स अनफ्रीज करने से इनकार:कलकत्ता हाईकोर्ट से कहा- जल्द सुनवाई करें, पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़ा है विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उन चार बैंक अकाउंट्स को ऑपरेट करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया, जिन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस ने साइबर क्राइम की शिकायत के सिलसिले में फ्रीज कर दिया था। मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा- चुनाव आयोग ने पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया है और खातों में मौजूद फंड का असली हकदार कौन है, यह बड़ा सवाल अभी कलकत्ता हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए वे इस मामले की गहराई में नहीं जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले के गुण-दोष में नहीं जाना चाहते और अनुच्छेद 136 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं हैं। हम कलकत्ता हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह इस मामले की सुनवाई में तेजी लाए। हाईकोर्ट के आदेश पर खाते हुए हैं फ्रीज टीएमसी ने बीते 27 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट से पश्चिम बंगाल पुलिस की तरफ से बैंकों में फ्रीज किए गए अपने चार खातों को चलाने की अनुमति मांगी थी। पार्टी का तर्क था कि इन खातों को फ्रीज करने से जुड़ी एफआईआर (FIR) में प्रक्रियागत कमियां थीं। लेकिन, हाईकोर्ट ने इन खातों को अनफ्रीज करने से मना कर दिया था। टीएमसी के इन चार बैंक अकाउंट्स में 804 करोड़ रुपए जमा हैं। अदालत का मानना था कि ऐसी राहत देने से उसका वह पिछला आदेश कमजोर हो जाता, जिसमें पार्टी को केवल अपने रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने की छूट दी गई थी। मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप, ED कर रहा है जांच दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है। ईडी (ED) का आरोप है कि कोलकाता स्थित 'केयरवेल एविएशन' के जरिए 160 करोड़ रुपये के पार्टी फंड की हेराफेरी की गई है। इसी जांच के तहत ईडी ने एचडीएफसी बैंक में टीएमसी के तीन खातों में मौजूद 440 करोड़ रुपए फ्रीज किए हैं। दो TMC गुटों के दावे पर चुनाव आयोग का फैसला बाकी कोर्ट ने कहा कि खातों को किस गुट को दिया जाना है, इस पर पहले चुनाव आयोग को फैसला करना चाहिए। TMC में एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला है, जबकि दूसरा पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला है। बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने की जांच रिपोर्ट भी कोर्ट के सामने रखी गई। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने 7 जुलाई को पुलिस साइबर सेल की ओर से चार बैंक खाते फ्रीज किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था। TMC की तरफ से कोर्ट में मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि 9 जुलाई के आदेश के तहत करीब 200 कर्मचारियों की सैलरी और पार्टी के कुछ कार्यालयों का किराया दिया जा रहा है। पहले बागी गुट की शिकायत पर खाते फ्रीज किए थे 18 जून को बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि TMC के एक निजी बैंक में मौजूद तीन खाते अपराध की कमाई रखने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं। FIR दर्ज होने के अगले ही दिन इन खातों से डेबिट लेनदेन पर रोक लगा दी गई। यह शिकायत TMC के बागी गुट के नेताओं, विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा की ओर से की गई थी। यही शिकायत बैंक खातों के फ्रीज होने का आधार बनी। --------------- ये खबर भी पढ़ें... बंगाल- कांग्रेस कैंडिडेट को मिली जमानत पर सरकार कोर्ट पहुंची:सुप्रीम कोर्ट बोला- आपकी याचिका खारिज होगी, लेकिन हम ऐसा सोमवार को करेंगे पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को मिली अंतरिम जमानत के खिलाफ बंगाल की भाजपा सरकार बुधवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से कहा कि मिलन प्रधान हत्या के केस में गिरफ्तार किए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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IND vs WI: 351 रन बनाकर भी हारा भारत, वेस्टइंडीज ने किया रिकॉर्ड चेज, शे होप ने अकेले छीनी जीत

IND vs WI 3rd ODI: भारत और वेस्टइंडीज के बीच वनडे सीरीज का आखिरी मैच न्यू चंडीगढ़ के पीसीए इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला गया. इस मैच में वेस्टइंडीज की टीम ने 352 रन का टारगेट चेज किया. Sat, 03 Oct 2026 23:03:48 +0530

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