मेघालय: तुरा मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की भारी कमी, योग्य फैकल्टी सदस्यों की पहचान के लिए उठाए जा रहे कदम
शिलांग, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। मेघालय में प्रस्तावित तुरा मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की भारी कमी बनी हुई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के नियमों के अनुसार, हर साल 50 एमबीबीएस छात्रों के दाखिले के लिए 97 टीचिंग स्टाफ की जरूरत होती है, जबकि अभी सिर्फ 37 टीचिंग स्टाफ ही मौजूद हैं। इस संबंध में अधिकारियों ने गुरुवार को जानकारी दी।
सरकारी मेडिकल कॉलेज को शुरू करने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण आयुक्त और सचिव डॉ. जोरम बेडा की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से समीक्षा की गई।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज को चालू करने में टीचिंग फैकल्टी की कमी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
विभाग ने कहा कि वह इस कमी को पूरा करने के लिए एक साल से ज्यादा समय से काम कर रहा है और योग्य फैकल्टी सदस्यों की पहचान करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
इन कोशिशों में नौकरी कर रहे इच्छुक और योग्य डॉक्टरों की पहचान करना, टीचिंग स्टाफ की भर्ती के लिए तीन बार अलग-अलग विज्ञापन निकालना और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी को दूर करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए तुरा में मौजूद डॉक्टरों से बातचीत करना शामिल था।
इन कोशिशों के बावजूद उपलब्ध फैकल्टी सदस्यों की संख्या एनएमसी की जरूरत से काफी कम है। इस स्थिति को देखते हुए, समीक्षा बैठक में यह सुझाव दिया गया कि तुरा सिविल अस्पताल परिसर में बन रहे 150-बिस्तर और 80-बिस्तर वाले अस्पताल ब्लॉक का काम पूरा किया जाए और उन्हें मरीजों की देखभाल के लिए चालू किया जाए।
अधिकारियों ने कहा कि इस कदम से यह पक्का हो जाएगा कि तुरा में बनाया जा रहा बड़ा हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर गारो हिल्स इलाके के लोगों को फायदा पहुंचाना शुरू कर दे, भले ही मेडिकल कॉलेज तुरंत पूरी तरह से चालू न हो पाए।
इन अतिरिक्त सुविधाओं से तुरा सिविल अस्पताल में बेड की कुल क्षमता में भी काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इस अस्पताल को प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज से जुड़े टीचिंग हॉस्पिटल के तौर पर काम करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
विभाग का कहना है कि अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने से स्वास्थ्य सेवा की तत्काल जरूरतों और मेडिकल कॉलेज की लंबी अवधि की जरूरतों, दोनों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनमें स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक, तुरा सिविल अस्पताल और तुरा एमसीएच अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और मैनपावर असेसमेंट कमेटी के सदस्य शामिल थे।
उम्मीद है कि अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर का काम आगे बढ़ने के साथ-साथ अधिकारी जरूरी टीचिंग स्टाफ की व्यवस्था करने की कोशिशें जारी रखेंगे।
--आईएएनएस
एएसएच/वीसी
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'2017 के बाद सरकार ने पुलिस सुधारों को आगे बढ़ाया', CM योगी ने विपक्ष पर बोला हमला
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 2017 की पहले की सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पहले प्रदेश के हर जिले में दुर्दांत माफिया का बोलबाला था. समानांतर सरकारें चलती थीं. माफिया के सामने नाक रगड़ी जाती थी. घुटने टेके जाते थे और पुलिस मजबूर थी. राजनीतिक नेतृत्व की रीढ़ ही टेढ़ी हो तो कानून-व्यवस्था को सीधा कैसे कर सकता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को लोकभवन सभागार में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर उन्होंने 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाई, वीर पुलिसकर्मियों को पदक प्रदान किए और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद सरकार ने पुलिस सुधारों को आगे बढ़ाया.
इंटरसेप्टर वाहन पुलिस बल को समर्पित किए गए
प्रकाश सिंह ने जिस पुलिस रिफॉर्म की वकालत की थी, उसे उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे पहले लागू किया. प्रदेश में अब सात पुलिस कमिश्नरेट काम कर रहे हैं. यूपी पुलिस के सामने विचार, वीरता और तकनीक, तीनों का समन्वय दिखाई दे रहा है. ‘संघर्ष’ के माध्यम से पुलिस सेवा के अनुभव और चुनौतियां सामने आई हैं तो जांबाजों की वीरता का सम्मान हुआ है और सड़क सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक इंटरसेप्टर वाहन पुलिस बल को समर्पित किए गए हैं.
समाज में सुरक्षा का वातावरण हो: योगी
उन्होंने कहा कि बंद कमरे में बैठकर किसी के प्रति कोई भी टिप्पणी करना आसान है. कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो और उसे अपने पद का कितना भी गुरूर हो, सुरक्षा हटा दी जाए तो अराजकता के माहौल में उसे भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगेगी. स्वस्थ चिंतन तभी संभव है, जब समाज में सुरक्षा का वातावरण हो. सुरक्षित माहौल में ही समृद्धि की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है. यूपी पुलिस की थीम ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ इसी भावना को व्यक्त करती है. जब तराई क्षेत्र आतंकवाद की चपेट में था, तब पुलिस व सेना की सुरक्षा में ही आवागमन संभव था. सूर्यास्त के बाद आवाजाही लगभग बंद हो जाती थी. उस समय डीजीपी के रूप में प्रकाश सिंह ने इन चुनौतियों का सामना किया. पुलिस सुधारों के लिए प्रकाश सिंह को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी. उत्तर प्रदेश ने पुलिस सुधारों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.
पग-पग पर चुनौतियों का सामना किया: योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैचारिकी केवल शब्द या आलेख नहीं होती, बल्कि वह व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों को भी समाहित करती है. प्रकाश सिंह ने अपने सेवाकाल में पग-पग पर इन चुनौतियों का सामना किया और अपनी पूरी सेवा को कुशलतापूर्वक पूरा किया. लंबे समय तक विभिन्न संस्थानों में व्याख्यानों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने वाली उनकी वैचारिकी अब पुस्तक के रूप में सामने आई है. आचार और विचार में जब समन्वय होता है और दोनों एक ही दिशा में आगे बढ़ते हैं, तभी परिणाम सामने आता है.
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