नीमच में कांग्रेस नेता पर हमला, सिर पर गंभीर चोट, अस्पताल में जुटे समर्थक, आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
नीमच: मध्यप्रदेश के नीमच जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। जहां बरूखेड़ा मार्ग स्थित परशुराम कॉलोनी में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ओम शर्मा पर जानलेवा हमले की सूचना मिली है। हमले में कांग्रेस नेता के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। उनको इलाज के लिये जिला अस्पताल भेजा गया। इसके बाद उनकी गंभीर हालत देखते हुये उन्हें उदयपुर रेफर कर दिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, दोपहर के समय परशुराम कॉलोनी क्षेत्र में ओम शर्मा पर कुछ लोगों ने अचानक हमला कर दिया। हमले में उनके सिर पर गंभीर चोट आई, जिससे काफी खून बहने लगा। घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों का जिला अस्पताल पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। इस घटना के बाद शहर में हड़कंप मच गया है।
पुलिस ने घटनास्थल का लिया जायजा
बता दें कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस की प्रशासन भी एक्टिव हो गया है। पुलिस की टीम ने मौक पर पहुंचकर पूरी स्थिति का जायजा लिया। मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की जांच की जा रही है। घायलों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस नेताओं ने उठाई आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग
वहीं, इस घटना की खबर लगते ही नीमच जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती समेत कई नेता एवं कार्यकर्ता जिला अस्पताल पहुंचे हैं। तरुण बाहेती ने घायल ओम शर्मा के स्वास्थ्य की जानकारी ली और डॉक्टरों से बेहतर इलाज सुनिश्चित करने को कहा। अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई, जहां नेताओं और समर्थकों ने खुलेआम आक्रोश जताया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
तरुण बाहेती ने बताया कि ओम शर्मा जोकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता है उनके साथ काफी ज्यादा मारपीट की गई है। उनकी सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। उनकी हालत को देखते हुए उदयपुर रेफर कर दिया गया है एवं परिजनों को भी सूचना दे दी गई है। बाहेती ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी मिली है कि जमीन का कोई मामला है, इन्होंने अपने प्लॉट के सामने वाले एक शख्स के खिलाफ आपत्ति ली, जिस वजह से यह मारपीट की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि जिस तरह से हमला हुआ है इसमें एक या दो लोग नहीं बल्कि कई लोगों के शामिल होने की आशंका है।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी वन्यजीव सप्ताह की बधाई, कहा “प्रोजेक्ट चीता की सफलता से मिली MP को नई पहचान”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर प्रदेशवासियों और वन संरक्षण से जुड़े कर्मचारियों को बधाई दी हैं। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण ने मध्यप्रदेश में वन पर्यटन को बढ़ावा दिया है और प्रोजेक्ट चीता की सफलता ने प्रदेश के संरक्षण प्रयासों को नई पहचान दी है। उन्होंने वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए सामूहिक भागीदारी की जरूरत बताई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में चीतों के सफल पुनर्स्थापन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से मिली यह सराहना वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए उत्साह बढ़ाने वाली है। उन्होंने प्रोजेक्ट चीता की सफलता का श्रेय वनकर्मियों, अधिकारियों, वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों के समर्पित प्रयासों को दिया।
पीएम मोदी ने वन्यजीव संरक्षण की उपलब्धियों का उल्लेख किया
सीएम मोहन यादव ने कहा कि वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना जरूरी है। संरक्षण के इन प्रयासों से वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मध्यप्रदेश में वन पर्यटन को भी नई दिशा और गति मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन्यजीव सप्ताह पर जारी संदेश में पिछले एक दशक में भारत की वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी उपलब्धियों का उल्लेख किया है। प्रधानमंत्री ने प्रोजेक्ट चीता को इसका प्रमुख उदाहरण बताया। इसके अलावा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, गैंडा, घड़ियाल, स्लॉथ बियर, नदी डॉल्फिन और हिम तेंदुए जैसी प्रजातियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी जिक्र किया है।
बिग कैट प्रजातियों के संरक्षण पर जोर
प्रधानमंत्री के संदेश में इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस के जरिए बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण में भारत की भूमिका का उल्लेख किया गया। इसमें बाघ, शेर, तेंदुआ और जगुआर जैसी प्रजातियों के संरक्षण से जुड़े अनुभवों को साझा करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। अपने संदेश में उन्होंने वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए उनके आवासों के बीच बेहतर संपर्क और वन्यजीव कॉरिडोर के संरक्षण को जरूरी बताया गया। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर लगातार काम किए जाने की बात कही गई है।
वन्यजीव संरक्षण के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए समय पर सूचना, त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन, स्थानीय स्तर पर जागरूकता और राज्यों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया।
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