Captain Smit Machhar बचपन से ही शांत और सुलझे थे, विमान हादसे को टालने वाले पायलट के दोस्त ने बताया
मुंबई, एक अक्टूबर दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाने और यात्रियों की जान की रक्षा करके सुर्खियों में आए भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार बचपन से ही बेहद सूझबूझ वाले और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने वाले व्यक्ति थे। मच्छार के बचपन के मित्र प्रतीक गांधी ने यह बात कही। गांधी मुंबई में उसी इमारत में रहते हैं जहां पायलट का परिवार रहता है।
उन्होंने कहा, ‘‘वह बचपन से ही बेहद शांत और संयमित था। हमारी हाउसिंग सोसाइटी में वह सबसे ‘सुलझा हुआ’ बच्चा था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब हमने यह खबर सुनी तो हम सभी हैरान रह गए। पहले हमें एहसास ही नहीं हुआ कि वह हमारा स्मित है।
हमें पता चला है कि उसका ऑपरेशन हुआ है और उसकी हालत ठीक है।’’ गांधी ने कहा, ‘‘ अभी उनके परिवार ने कोई जानकारी नहीं दी है। वे यहां नहीं हैं। सभी लोग दुबई में हैं।’’ बुधवार रात इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मच्छार की सराहना करते हुए उन्हें ‘‘सच्चा नायक’’ बताया।
उन्होंने कहा कि घायल होने के बावजूद मच्छार ने जवाबी कार्रवाई की और 9/11 जैसी त्रासदी को होने से रोकने में कामयाबी हासिल की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी उनकी सराहना की और ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कैप्टन स्मित मच्छार एक नायक हैं। सबसे गंभीर खतरे का सामना करते हुए और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए अदम्य साहस और अटूट संकल्प दिखाया।
उनके साहस ने सैकड़ों लोगों की जान बचाने में मदद की और बड़ी त्रासदी टाली।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को कैप्टन मच्छार पर गर्व है। मच्छार के पड़ोसियों और परिचितों ने भी उनके साहस की सराहना की। उन्होंने पायलट के जल्द स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना की और घटना की खबर सामने आने के बाद के तनावभरे माहौल को याद किया।
उनके एक पड़ोसी ने कहा कि पायलट की सूझबूझ और कार्रवाई से विमान में सवार 180 से अधिक लोगों की जान बचाने में मदद मिली। उन्होंने मच्छार के साहस की सराहना की। पड़ोसी ने कहा, ‘‘उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी।’’ उन्होंने बताया कि मच्छार के परिवार को उसकी हालत को लेकर गहरी चिंता है, लेकिन उन्हें उसके साहस पर गर्व भी है।
पड़ोसियों ने यह भी बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने मच्छार के परिवार को हवाई अड्डे जाने में कैसे मदद की। एक अन्य पड़ोसी ने कहा, ‘‘ हम तुरंत उनके घर पहुंचे। हमने उनके सामान को नीचे लाने में मदद की।
सामान कार में रखा और उन्हें रवाना किया।’’ उन्होंने बताया कि तनावपूर्ण स्थिति के बीच परिवार को खुद गाड़ी चलाने नहीं दी गई बल्कि स्थानीय निवासी अक्षय दोशी उन्हें हवाई अड्डे लेकर गए। पड़ोसी ने कहा, ‘‘ मच्छार ने जो किया है, उस पर सभी को बहुत गर्व है। लेकिन जब तक वहां से उनकी हालत के बारे में कोई खबर नहीं मिलती, तब तक हमें चिंता है।’’ एक अन्य पड़ोसी ने कहा कि पूरा समुदाय उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘ मैं उनके और उनके परिवार, खासकर उनकी मां, पिता और भाई के लिए दिल से प्रार्थना कर रहा हूं। यह बेहद चिंता और तनाव का समय है। हम प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी मेडिकल रिपोर्ट सामान्य आए।’’ मच्छार ने 2007-08 में मुंबई के वेलिंगकर इंस्टीट्यूट से ऑनलाइन मैनेजमेंट डिग्री कोर्स भी किया था।
इस संस्थान ने भी उनकी जमकर सराहना की। वीस्कूल, वेलिंगकर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. पंकज नाटू ने उन्हें ‘‘आसमान में सच्चा हीरो’’ बताया। नाटू ने अपने संदेश में कहा, ‘‘आपका साहस, अनुशासन और समर्पण हम सभी को प्रेरित करता है।
यह देखकर गर्व होता है कि वेलिंगकर का एक पूर्व छात्र इतनी ऊंची उड़ान भर रहा है।
CJI को लिखी चिट्ठी पर जस्टिस संजीव शर्मा का पलटवार, संदीप मेहता के आरोप बेबुनियाद
राजस्थान हाई कोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता की ओर से उन पर लगाए गए भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग के आरोप "पेशेवर ईर्ष्या" का नतीजा हो सकते हैं और शीर्ष अदालत के जज को हाई कोर्ट के कामकाज में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। जस्टिस शर्मा ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा मुझे हैरानी है; अगर कोई शिकायत होती है, तो क्या वह सबसे पहले (भारत के) चीफ जस्टिस के पास नहीं जानी चाहिए? जजों के बीच इस तरह के मामले पहले भी कई बार सामने आए हैं। लेकिन ये कभी अखबारों की सुर्खियों में नहीं आए। कोई भी सोशल मीडिया पर नहीं जाता।
इसे भी पढ़ें: CEC Gyanesh Kumar के फैसलों की SIT जांच की मांग, याचिकाओं पर अगले हफ्ते सुनवाई पर सहमत हुए CJI
उन्होंने आगे कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर वह सही तरीके से काम नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। मेरी वकालत की प्रैक्टिस बहुत अच्छी थी, लेकिन मैंने उसे सिर्फ इसलिए छोड़ दिया ताकि मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे समाज को वापस दे सकूं। इसीलिए मैंने वह गरिमा बनाए रखी... जजों का ट्रायल सोशल मीडिया पर नहीं होना चाहिए। इससे आम लोगों का भरोसा नहीं डगमगाना चाहिए। अगस्त में जस्टिस मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत से आग्रह किया था कि वे "तुरंत प्रभाव से" राजस्थान हाई कोर्ट के प्रमुख के तौर पर किसी दूसरे राज्य के मुख्य न्यायाधीश को नियुक्त करें। उन्होंने आरोप लगाया था कि जस्टिस शर्मा अपनी प्रशासनिक शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और अमीर मुक़दमेबाज़ों" को फ़ायदा पहुँचाने के लिए केस लिस्टिंग में हेरफेर कर रहे हैं। HT को मिली 2, 10 और 17 अगस्त की तीन चिट्ठियों में, जस्टिस मेहता ने जस्टिस शर्मा पर कुप्रबंधन, गलत तौर-तरीके, भाई-भतीजावाद" और पक्षपात के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 'मास्टर ऑफ़ रोस्टर' के तौर पर अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए वे चुनिंदा केस अपनी बेंच में ट्रांसफर कर रहे थे।
इसे भी पढ़ें: Justice Devendra Kumar Upadhyaya: Supreme Court कॉलेजियम ने की पदोन्नति की सिफारिश
हालाँकि, जस्टिस शर्मा ने तब एक बयान जारी कर सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि ये आरोप दुश्मनी की वजह से लगाए गए थे। जब उनसे पूछा गया कि उन्हें क्यों लगता है कि जस्टिस मेहता ने ये आरोप लगाए हैं, तो उन्होंने 'द इंडियन एक्सप्रेस' से कहा: "मुझे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं है। हो सकता है कि यह सिर्फ़ पेशेवर जलन हो। 2011 में, हम दोनों को सीनियर एडवोकेट बनाया गया था। मुझे बिना किसी आवेदन के प्रमोट किया गया था। पूरी फुल कोर्ट ने मुझे सीनियर एडवोकेट के तौर पर चुना था। जबकि उन्होंने इसके लिए आवेदन किया था। और मैं पहली पीढ़ी का वकील हूँ। मेरे परिवार में कोई वकील नहीं रहा है, जबकि वे एक प्रतिष्ठित न्यायिक परिवार से आते हैं... हम दोनों को एक साथ सीनियर एडवोकेट बनाया गया था, और जब प्रमोशन की बात आई, तो उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि मैं (चीफ़ जस्टिस) न बन पाऊँ। और इस बात का भी असर होता है; जज इस बात से प्रभावित होते हैं कि आप किस परिवार से आते हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









