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भारत-ईयू एफटीए से निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में वियतनाम, मलेशिया जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी : इंडस्ट्री

नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। भारत-ईयू एफटीए से निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में वियतनाम, बांग्लादेश, थाईलैंड, मलेशिया और श्रीलंका जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। यह जानकारी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने बुधवार को दी।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए पॉलीमेडिक्योर के एमडी और सीईओ हिंमाशु वैध ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होना देश के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इससे एक साथ यूरोप के 27 देशों के बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए खुल गए हैं। साथ ही, भारत को यूरोपीय बाजारों में वियतनाम, बांग्लादेश, थाईलैंड, मलेशिया और श्रीलंका जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने आगे कहा कि इस एफटीए से भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजारों में पहुंच मिलेगी। इससे बड़ी मात्रा में निर्यात को बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, उन्होंने कहा कि इस ट्रेड एग्रीमेंट से यूरोपीय टेक्नोलॉजी तक आसान पहुंच सुनिश्चित होगी। वहीं, यूरोपीय कंपनियों को भारत के रूप में तेजी से बढ़ता हुआ बाजार मिलेगा।

वैध ने कहा कि इस एग्रीमेंट से देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने में मदद मिलेगी और भारत में निवेश बढ़ेगा।

आईएएनएस से ​​बात करते हुए, चिकित्सा उपकरण निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएमडी) के अध्यक्ष आर.एस. कंवर ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता बेहद लाभकारी है और दवा क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा, भारत-यूरोपीय संघ एफटीए भारतीय चिकित्सा उपकरण क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक कदम है। जीवन रक्षक दवाओं तक पहुंच दोनों पक्षों के लिए लाभकारी है।

कंवर ने कहा कि चिकित्सा उपकरणों पर शून्य शुल्क एक अच्छी बात है, लेकिन गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता है। तभी भारतीय निर्माता उस बाजार तक पहुंच सकेंगे।

भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच एफटीए का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह एफटीए केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट है।

प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, यह ऐतिहासिक समझौता हमारे किसानों और हमारे छोटे उद्योगों के लिए यूरोपीय मार्केट तक पहुंच को आसान बनाएगा, मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा और हमारे सर्विसेज सेक्टर के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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कौन है बादलों की बेटी शांभवी पाठक? बुलंद हौसले और अधूरे रह गए आसमान के सपने, कैसे भरी थी करियर की उड़ान

Ajit Pawar Plane Crash: अजित पवार के प्राइवेट चार्टर विमान Learjet 45 के हादसे में देश ने सिर्फ एक वरिष्ठ नेता ही नहीं, बल्कि भारतीय कॉर्पोरेट एविएशन के दो प्रशिक्षित पायलट भी खो दिए. इस दर्दनाक हादसे में 25 वर्षीय को-पायलट शांभवी पाठक और पायलट-इन-कमांड सुमित कपूर की जान चली गई. दोनों की उम्र, अनुभव और करियर की राह अलग थी, लेकिन आखिरी उड़ान एक ही साबित हुई.

बचपन से ही रगों में था साहस  

शांभवी पाठक भारतीय एविएशन इंडस्ट्री में उभरता हुआ युवा चेहरा थीं. उनकी रगों में अनुशासन और साहस बचपन से ही था. उनके पिता एक आर्मी ऑफिसर हैं, जिन्होंने अपनी बेटी को हमेशा निडरता के साथ आसमान छूने की सीख दी. शांभवी का ननिहाल उत्तर प्रदेश के कानपुर में है, जबकि उनका परिवार दिल्ली में बस गया था. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई ग्वालियर और दिल्ली के 'एयर फोर्स बाल भारती स्कूल' से की. यहीं से उन्होंने हवाई जहाजों को देखकर अपने करियर की दिशा तय कर ली थी.

न्यूजीलैंड से मुंबई तक का सफर 

शांभवी ने मुंबई यूनिवर्सिटी से एयरोनॉटिक्स/एविएशन की पढ़ाई की और फिर न्यूजीलैंड से कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग ली. उनके पास कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) के साथ फ्लाइट इंस्ट्रक्टर रेटिंग भी थी. करियर की शुरुआत में वह मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब से जुड़ीं और बाद में VSR एविएशन में बतौर 'फर्स्ट ऑफिसर' शामिल हुईं और Learjet जैसे बिजनेस जेट उड़ाने लगीं. बता दें कि यह कोई मामूली बात नहीं है, ऐसे विमानों को अक्सर वीआईपी मूवमेंट के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जहां पायलट की कुशलता पर बड़ी शख्सियतों की सुरक्षा टिकी होती है.

इसके बाद अगस्त 2022 से वह कॉर्पोरेट चार्टर ऑपरेशंस का हिस्सा रहीं. एविएशन से जुड़े लोगों के मुताबिक, उनका करियर अभी शुरुआती दौर में था. उन्हें लगभग 1,500 घंटे की उड़ान का अनुभव था.

सपनों का असमय अंत

महज 25 साल की उम्र में शांभवी ने वह मुकाम हासिल कर लिया था, जिसे पाने में लोगों को दशकों लग जाते हैं. वह अविवाहित थीं और अपनी पूरी जिंदगी देश की सेवा और विमानन क्षेत्र को समर्पित कर देना चाहती थीं. उनके सहयोगियों के अनुसार, वह तकनीकी रूप से बहुत ही शांत और सुलझी हुई पायलट थीं.

जांच का है इंतजार

यह हादसा सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं है. इसने चार्टर एविएशन की सुरक्षा व्यवस्था, पायलट ड्यूटी शेड्यूल और सेफ्टी ऑडिट सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. अब एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह हादसा तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी सिस्टमेटिक लापरवाही का नतीजा था.

यह भी पढ़ें: Ajit Pawar Plane Crash: ओह शिट ओह शिट... मेडे कॉल नहीं हुआ, अजित पवार प्लेन क्रैश से ठीक पहले महिला पायलट के आखिरी शब्द

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