Flydubai FZ1073: भारतीय कैप्टन पर चाकू नहीं कुल्हाड़ी से हुआ हमला, हालत गंभीर थी; इजरायली डॉक्टर ने मच्छार को बचाया
विमानन सुरक्षा के इतिहास में यह अपनी तरह की पहली और डरावनी घटना है, जहां किसी आपातकालीन जीवन रक्षक उपकरण का इस तरह दुरुपयोग किया गया हो। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई (Flydubai FZ1073) की उड़ान में हुई इस वारदात ने दुनिया भर के सुरक्षा विशेषज्ञों को हिलाकर रख दिया है।
एक तरफ जहां एयरपोर्ट पर यात्रियों के छोटे नेल कटर तक जब्त कर लिए जाते हैं, वहीं कॉकपिट में पहले से ही एक धारदार कुल्हाड़ी मौजूद रहती है। को-पायलट जैसे भरोसेमंद व्यक्ति द्वारा इसका इस्तेमाल किए जाने से साफ है कि केवल बाहरी सुरक्षा काफी नहीं है। हालांकि, विमान में सफर कर रहे एक इजरायली डॉक्टर ने समय रहते अपनी सूझबूझ और बहादुरी का परिचय दिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और घायल कैप्टन की जान बच गई।
'चाकू से नहीं, क्रैश एक्स से हुआ हमला...' कैप्टन स्मित मच्छार पर गंभीर वार
जांच से यह साफ हुआ है कि हमलावर ओमानी को-पायलट बाहर से किसी भी तरह का चाकू या बाहरी हथियार तस्करी कर कॉकपिट में नहीं लाया था। उसने विमान के भीतर कॉकपिट में पहले से ही सुरक्षित रूप से रखे गए फायर एक्स यानी 'क्रैश एक्स' (Crash Axe) का इस्तेमाल किया।
अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के अनुसार यह विशेष कुल्हाड़ी फैक्ट्री में ही विमान के साथ फिट की जाती है और इसे हर फ्लाइट के कॉकपिट में रखना अनिवार्य कानूनी नियम है। इस अचानक हुए खूनी हमले में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की गर्दन और सिर पर बेहद गंभीर चोटें आईं और उनकी हालत बेहद नाजुक हो गई थी।
इजरायली डॉक्टर बने देवदूत, ऐसे बचाई कैप्टन की जान
जब कॉकपिट के अंदर यह खौफनाक संघर्ष चल रहा था और कैप्टन स्मित मच्छार गंभीर रूप से घायल होकर खून से लथपथ हो गए थे, तब फ्लाइट में अफरातफरी मच गई। ऐसे में विमान में यात्रा कर रहे एक इजरायली डॉक्टर ने अपनी पेशेवर सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया।
डॉक्टर ने न सिर्फ हमलावर को-पायलट को अन्य लोगों की मदद से काबू में किया और दबोचा, बल्कि गंभीर रूप से घायल कैप्टन को तुरंत जरूरी चिकित्सीय सहायता देकर उनकी जान बचाई।
क्या है 'क्रैश एक्स' का असली मकसद और इसका इतिहास?
आम लोगों की सोच अक्सर विमान सुरक्षा नियमों और कॉकपिट के उपकरणों को लेकर काफी हद तक गलत होती है। कई लोग यह मानते हैं कि कड़ी सुरक्षा के कारण कॉकपिट में कोई भी खतरनाक हथियार नहीं पहुंच सकता, लेकिन इस कुल्हाड़ी का असली और एकमात्र मकसद किसी पर हमला करना बिल्कुल नहीं, बल्कि किसी बड़ी आपात स्थिति में यात्रियों और क्रू की जान बचाना होता है।
विमान दुर्घटना या क्रैश होने की स्थिति में कई बार एयरफ्रेम मुड़ जाता है और विमान के सामान्य निकास द्वार पूरी तरह जाम हो जाते हैं। ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में क्रू सदस्य इस कुल्हाड़ी की मदद से मलबा हटाकर या विमान के कमजोर हिस्सों को काटकर बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार करते हैं।
कॉकपिट की आग बुझाने और पैनल काटने का विशेष उपकरण
यह कुल्हाड़ी केवल बाहर निकलने का जरिया नहीं है, बल्कि इसके अन्य तकनीकी उपयोग भी हैं। कॉकपिट के अंदर दीवारों, छत की लाइनिंग और फर्श के पैनलों के ठीक पीछे कई बार बिजली के छिपे हुए तार या सर्किट्स में शॉर्ट सर्किट से आग लग जाती है, तक ऐसी आग तक सामान्य तरीकों से पहुंचना नामुमकिन होता है।
ऐसे में क्रू सदस्य इसी आपातकालीन कुल्हाड़ी से पैनल को काटकर तुरंत आग बुझाने का काम करते हैं। यह विशेष उपकरण विमान की मुख्य संरचना के अंदर छिपी हुई और छुअन से दूर की आग को नियंत्रित करने के लिए ही विशेष तौर पर डिजाइन किया गया है, न कि किसी की जान लेने के लिए।
एविएशन इंडस्ट्री के सामने खड़े हुए नए और गंभीर सुरक्षा सवाल
इस घटना ने विमानन सुरक्षा के मौजूदा और पारंपरिक नियमों पर बहुत गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि अब समय आ गया है जब केवल यात्रियों की चेकिंग तक सीमित न रहकर, क्रू सदस्यों की मानसिक स्थिति, उनके विस्तृत बैकग्राउंड चेक और कॉकपिट के अंदर रखे जाने वाले उपकरणों की डिजिटल या कड़ी निगरानी को और अधिक सख्त बनाया जाए।
एविएशन इंडस्ट्री को अब इस बात पर बहुत गंभीरता से विचार करना होगा कि कहीं कोई जीवन रक्षक और आपातकालीन औजार भविष्य में किसी बड़ी आपदा या हमले का कारण न बन जाए। यह घटना यह कड़वी सच्चाई याद दिलाती है कि सुरक्षा नियम चाहे जितने भी कड़े क्यों न हों, उनका गलत इस्तेमाल संभव है।
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