Pratyusha Banerjee आत्महत्या मामला: 10 साल बाद बॉयफ्रेंड राहुल राज सिंह को बड़ी राहत, बॉम्बे हाईकोर्ट ने किया डिस्चार्ज
Pratyusha Banerjee Case: टीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी की मौत के करीब 10 साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनके पूर्व पार्टनर राहुल राज सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले से डिस्चार्ज कर दिया है। जस्टिस एसजी डिगे की सिंगल बेंच ने बुधवार को यह फैसला सुनाया।
2016 में हुई थी प्रत्युषा की मौत
‘बालिका वधू’ में आनंदी का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाली प्रत्युषा बनर्जी की 1 अप्रैल 2016 को मौत हो गई थी। वह गोरेगांव वेस्ट स्थित अपने किराए के फ्लैट में मृत मिली थीं। प्रत्युषा की मां सोमा बनर्जी की शिकायत के बाद बांगुर नगर पुलिस ने राहुल राज सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया था। उन पर प्रत्युषा को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करने के आरोप लगाए गए थे।
2018 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
राहुल को जुलाई 2016 में बॉम्बे हाईकोर्ट से गिरफ्तारी से पहले जमानत मिल गई थी। करीब दो साल की जांच के बाद पुलिस ने अप्रैल 2018 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद राहुल ने केस से बाहर किए जाने की मांग को लेकर याचिका दायर की। हालांकि, डिंडोशी सेशन कोर्ट ने अगस्त 2023 में उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
सेशन कोर्ट ने क्या कहा था?
2023 में सेशन कोर्ट ने कहा था कि गवाहों के बयानों से ऐसा लगता है कि राहुल की वजह से प्रत्युषा की जिंदगी में काफी परेशानी थी। कोर्ट ने यह भी माना था कि वह शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक परेशानियों के कारण डिप्रेशन में थीं। वहीं, राहुल ने इन आरोपों से इनकार किया था। उनका कहना था कि प्रत्युषा अपने माता-पिता के व्यवहार और लगातार दखल से परेशान थीं।
राहुल ने आखिरी बातचीत का दिया हवाला
राहुल की ओर से सीनियर वकील आबाद पोंडा और श्रेयांश मिथारे ने कोर्ट में कहा कि घटना से करीब एक घंटे पहले राहुल और प्रत्युषा के बीच फोन पर बातचीत हुई थी।
वकीलों के मुताबिक, इस बातचीत में राहुल उन्हें कोई गलत कदम नहीं उठाने के लिए समझा रहे थे। वह अपना प्यार भी जता रहे थे और कह रहे थे कि वह घर आ रहे हैं।
राहुल की ओर से यह भी कहा गया कि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था। उनके वकीलों ने दलील दी कि आखिरी बातचीत से यह पता चलता है कि राहुल का प्रत्युषा को आत्महत्या के लिए उकसाने का इरादा नहीं था।
मां ने राहुल पर लगाए थे आरोप
प्रत्युषा की मां ने राहुल पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि राहुल काफी पजेसिव थे और उन्होंने कई बार प्रत्युषा के साथ मारपीट की। मां ने यह भी आरोप लगाया था कि राहुल ने प्रत्युषा के पैसों का गलत इस्तेमाल किया और उन्हें परिवार से बात करने से रोकते थे। दूसरी ओर, राहुल ने दावा किया था कि प्रत्युषा के माता-पिता उनकी कमाई का इस्तेमाल अपनी जिंदगी पर करते थे। उन्होंने कहा था कि माता-पिता के लगातार दखल की वजह से प्रत्युषा परेशान थीं।
कोर्ट ने कहा- ट्रायल के लिए पर्याप्त सबूत नहीं
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अब राहुल की डिस्चार्ज याचिका मंजूर कर ली है। कोर्ट ने कहा कि मामले को ट्रायल तक ले जाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। कोर्ट के मुताबिक, उपलब्ध सबूतों के आधार पर इसे आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं माना जा सकता। ऐसे में राहुल के खिलाफ ट्रायल चलाना कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा। करीब 10 साल चली इस कानूनी लड़ाई के बाद राहुल राज सिंह को इस मामले से आरोपमुक्त कर दिया गया है। प्रत्युषा का परिवार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है।
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