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सैमसंग का बड़ा ऑफर: नए गैलेक्सी फोल्डेबल स्मार्टफोन्स के लिए शुरू की 30 महीने की नो-कॉस्ट ईएमआई सुविधा

नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। सैमसंग ने भारत में अपने नए फोल्डेबल स्मार्टफोन्स को ग्राहकों के लिए अधिक किफायती बनाने के उद्देश्य से 30 महीने की नो-कॉस्ट ईएमआई योजना लॉन्च की है। इस नई फाइनेंसिंग सुविधा के तहत ग्राहक बिना किसी डाउन पेमेंट के कंपनी के नवीनतम फोल्डेबल स्मार्टफोन खरीद सकते हैं।

यह ऑफर हाल ही में लॉन्च किए गए गैलेक्सी जेड फोल्ड8 अल्ट्रा, गैलेक्सी जेड फोल्ड8 और गैलेक्सी जेड फ्लिप8 पर उपलब्ध है।

कंपनी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य ग्राहकों पर एकमुश्त भुगतान का बोझ कम करना और प्रीमियम फोल्डेबल तकनीक तक अधिक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करना है।

सैमसंग के अनुसार, नई गैलेक्सी जेड सीरीज सात पीढ़ियों के फोल्डेबल इनोवेशन का नतीजा है। कंपनी ने यूजर्स की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए डिजाइन, मजबूती, प्रदर्शन और उपयोग अनुभव में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।

इन स्मार्टफोन्स में बेहतर हिंज टेक्नोलॉजी, उन्नत डिस्प्ले इंजीनियरिंग, अधिक टिकाऊ डिजाइन और फ्लैगशिप स्तर का प्रदर्शन दिया गया है। साथ ही इनमें गैलेक्सी एआई-आधारित कई स्मार्ट फीचर्स भी शामिल किए गए हैं।

नई ईएमआई स्कीम के तहत गैलेक्सी जेड फोल्ड8 अल्ट्रा को मात्र 6,667 रुपए प्रति माह की ईएमआई पर खरीदा जा सकता है। कंपनी के मुताबिक, यह मासिक किस्त पिछले मॉडल गैलेक्सी जेड फोल्ड7 की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत कम है।

वहीं गैलेक्सी जेड फोल्ड8 के लिए ईएमआई 6,000 रुपए प्रति माह से शुरू होती है। दूसरी ओर, गैलेक्सी जेड फ्लिप8 को ग्राहक केवल 4,167 रुपए प्रति माह की शुरुआती ईएमआई पर अपना बना सकते हैं।

सैमसंग ने बताया कि 30 महीने की यह नो-कॉस्ट ईएमआई सुविधा सैमसंग फाइनेंस+ के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए कंपनी ने डीएमआई फाइनेंस, टीवीएस क्रेडिट, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और पूनावाला फिनकॉर्प के साथ साझेदारी की है।

कंपनी का मानना है कि लंबी अवधि वाली यह फाइनेंसिंग योजना ग्राहकों को अधिक वित्तीय लचीलापन देगी और उन्हें भारी अग्रिम भुगतान किए बिना प्रीमियम फोल्डेबल स्मार्टफोन खरीदने का अवसर प्रदान करेगी।

सैमसंग का कहना है कि यह ऑफर केवल वित्तीय सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए अधिक से अधिक उपभोक्ता गैलेक्सी एआई-आधारित नई तकनीकों और उन्नत फोल्डेबल अनुभव का लाभ उठा सकेंगे।

कीमतों की बात करें तो गैलेक्सी जेड फोल्ड8 अल्ट्रा की शुरुआती कीमत 1,99,999 रुपए रखी गई है। यह स्मार्टफोन वायलेट शैडो, ग्रेफाइट, क्रीम और ग्रीन शैडो रंगों में उपलब्ध है, जिसमें ग्रीन शैडो केवल ऑनलाइन ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगा।

गैलेक्सी जेड फोल्ड8 की शुरुआती कीमत 1,79,999 रुपए है, और यह लैवेंडर, ग्रेफाइट, क्रीम और ऑनलाइन-एक्सक्लूसिव पिस्ताचियो रंग विकल्पों में उपलब्ध है।

वहीं गैलेक्सी जेड फ्लिप8 की शुरुआती कीमत 1,24,999 रुपए है। यह पिंक, ग्रेफाइट, क्रीम और मिंट रंगों में उपलब्ध है, जिसमें मिंट रंग केवल ऑनलाइन बिक्री के लिए रखा गया है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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दमोह: ई-टोकन बंद, पुरानी व्यवस्था शुरू.. फिर भी घंटों लाइन में लगने के बाद खाली हाथ लौट रहे किसान, नहीं मिल रही खाद

मध्य प्रदेश में किसानों को खाद के लिए एक बार फिर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के दमोह जिले से आ रही तस्वीरें प्रदेशव्यापी खाद संकट की भयावहता को बयां कर रही हैं, जहाँ खाद वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और किसान बेबसी में सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।

दमोह जिले के खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें और भीड़ बता रही है कि हालात कितने बिगड़ चुके हैं। किसान देर रात से ही इन केंद्रों के बाहर जमा हो जाते हैं, सुबह से शाम तक अपनी बारी का इंतजार करते हैं और अंत में अक्सर खाली हाथ ही लौटने को मजबूर होते हैं। यह सिलसिला अब रोजमर्रा की कहानी बन गया है, जिससे अन्नदाता का धैर्य टूट रहा है।

सरकार ने पुरानी व्यवस्था को किया बहाल

दरअसल, इस परेशानी की शुरुआत सरकार के उस निर्णय से हुई, जिसमें खाद वितरण के लिए ई-विकास पोर्टल के ज़रिए ऑनलाइन टोकन व्यवस्था लागू की गई थी। किसानों को टोकन तो मिल रहे थे, लेकिन उन्हें खाद फिर भी नहीं मिल पा रही थी। यह व्यवस्था भी किसानों की परेशानी कम करने में नाकाम साबित हुई। अब अचानक सरकार ने अपने नियम में संशोधन करते हुए पुरानी व्यवस्था को बहाल कर दिया है। ऑनलाइन टोकन की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है और किसानों को सीधे केंद्र पर आकर कागज़ दिखाने, टोकन लेने और कतार में लगने का निर्देश दिया गया है।

कलेक्टर ने किसानों को बताया नया नियम

दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने किसानों को इस नए नियम से अवगत कराया कि अब ऑनलाइन टोकन की ज़रूरत नहीं, बल्कि सीधे केंद्र पर जाकर पुराने तरीके से टोकन लिया जा सकता है। यह घोषणा व्यवस्था को सुचारु करने की बजाय, उसे और जटिल कर गई। इस बदलाव ने हालात को और बिगाड़ दिया है। जहाँ पहले ई-टोकन के बावजूद खाद नहीं मिल रही थी, अब तो एक साथ हज़ार से दो हज़ार किसान एक-एक केंद्र पर पहुँच रहे हैं।

भगदड़ जैसे हालात में किसान परेशान

इन केंद्रों पर भारी भीड़ के चलते भगदड़ जैसी स्थिति है। किसान आपस में धक्का-मुक्की कर रहे हैं, अपनी बारी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। चिपचिपी उमस और भीषण गर्मी में कई किसान चक्कर खाकर गिर रहे हैं, लेकिन इतनी मशक्कत के बावजूद उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है। शनिवार तक जब ई-टोकन से खाद बांटी जा रही थी, तब भी किसानों को खाद नहीं मिल रही थी। अब जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में किसान पहुँच गए हैं, तो स्थिति का बिगड़ना स्वाभाविक था। किसानों के बीच खाद पाने की होड़ और अधिक बढ़ गई है, जिससे कानून व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

दमोह जिले में बनाए गए तमाम खाद वितरण केंद्रों में एक जैसा ही आलम है। कहीं किसानों के बीच धक्का-मुक्की और टकराव हो रहा है, तो कहीं जिला मुख्यालय पर किसान अपनी हताशा व्यक्त करने के लिए चक्का जाम कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी फसलें खाद के बिना बर्बाद हो रही हैं और सरकार या प्रशासन उनकी समस्या पर गंभीर नहीं है। वहीं, तेंदूखेड़ा के तहसीलदार विवेक व्यास अब ‘कल से बेहतर व्यवस्था’ बनाने की बात कह रहे हैं, लेकिन वर्तमान में जो हालात हैं, वे किसानों की उम्मीदों को तोड़ रहे हैं।

खाद और यूरिया के पर्याप्त स्टॉक होने का दावा

बहरहाल, सरकार और प्रशासन लगातार खाद और यूरिया के पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन गोदामों में खाद का भरा रहना तब तक किसी काम का नहीं, जब तक वह सही समय पर किसानों के खेतों तक न पहुँच पाए। किसानों को इस बात से कोई मतलब नहीं कि खाद गोदामों में है या नहीं, उन्हें तो अपनी फसल बचाने के लिए खाद चाहिए। यदि खाद की कमी के कारण किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं, तो इसका असर केवल उन पर ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यह संकट केवल वितरण का नहीं, बल्कि व्यवस्था की खामी का है, जिसका खामियाजा अन्नदाता को भुगतना पड़ रहा है।

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