साइबर लिटरेसी- स्कॉलरशिप के नाम पर स्कैम:छात्र और पेरेंट्स सावधान! पहचानें सही और फर्जी ऑफर का फर्क, आवेदन से जुड़ी 17 सावधानियां
हर साल हजारों छात्र इंटरनेशनल स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करते हैं। इससे उन्हें फीस, आवास और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्चों के लिए आर्थिक मदद मिलती है। लेकिन अब साइबर अपराधियों की नजर इस पर भी पड़ चुकी है। ठग छात्रों को निशाना बना रहे हैं। वे नकली वेबसाइट, ईमेल और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए छात्रों को फर्जी स्कॉलरशिप का ऑफर दे रहे हैं। वे छात्रों को स्कॉलरशिप का झांसा देकर रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग फीस और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे ऐंठ रहे हैं। इतना ही नहीं, ठग छात्रों के पासपोर्ट, बैंक डिटेल्स और दूसरे डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करके कई तरह के फ्रॉड को अंजाम दे रहे हैं। पिछले दिनों गृह मंत्रालय और ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (I4C) ने इस स्कैम को लेकर चेतावनी दी है। इसलिए आज ‘साइबर लिटरेसी’ में ‘इंटरनेशनल स्कॉलरशिप स्कैम’ के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- ‘स्कॉलरशिप स्कैम’ क्या है? जवाब- यह एक साइबर फ्रॉड है, जिसमें ठग फर्जी स्कॉलरशिप का झांसा देकर स्टूडेंट्स और गार्जियंस को निशाना बनाते हैं। इसका मकसद लोगों से पैसे उगाहना और पर्सनल व बैंकिंग डिटेल्स जैसी संवेदनशील जानकारी चुराना है। सवाल- साइबर ठग स्टूडेंट्स को इस स्कैम में कैसे फंसाते हैं? जवाब- ठग फर्जी स्कॉलरशिप के विज्ञापन, ईमेल, मैसेज और वेबसाइट के जरिए छात्रों से संपर्क करते हैं। इसके बाद वे रजिस्ट्रेशन फीस, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और प्रोसेसिंग फीस जैसे बहानों से पैसे ऐंठते हैं। स्कैम का पूरा खेल ग्राफिक से समझिए- सवाल- ठग किन स्टूडेंट्स को निशाना बनाते हैं? जवाब- ठग आमतौर पर उन स्टूडेंट्स को निशाना बनाते हैं, जो विदेश में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप की तलाश में हैं। वे खासकर ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन और रिसर्च प्रोग्राम के लिए स्कॉलरशिप खोज रहे स्टूडेंट्स को फर्जी ऑफर भेजते हैं। सवाल- फर्जी स्कॉलरशिप आवेदन के क्या संभावित रिस्क हैं? जवाब- इसमें आर्थिक नुकसान के साथ–साथ स्टूडेंट की पर्सनल डिटेल्स गलत हाथों में चली जाती है। ठग इसका इस्तेमाल बैंकिंग फ्रॉड या अन्य साइबर अपराधों के लिए कर सकते हैं। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- स्कैमर्स किन बहानों से पैसे मांगते हैं? जवाब- ठग स्टूडेंट्स को ये भरोसा दिलाते हैं कि स्कॉलरशिप प्रक्रिया पूरी करने के लिए फीस जमा करना जरूरी है। वे अलग-अलग बहानों से पैसे मांगते हैं, ताकि स्टूडेंट्स बिना ज्यादा जांच-पड़ताल के रकम ट्रांसफर कर दें, जैसेकि- सवाल- असली और फर्जी स्कॉलरशिप का फर्क कैसे समझें? जवाब- इनके बीच कुछ स्पष्ट अंतर होते हैं, लेकिन जल्दबाजी में स्टूडेंट्स अक्सर इन पर ध्यान नहीं देते। दोनों का अंतर ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या असली स्कॉलरशिप के लिए कोई फीस लगती है? जवाब- ज्यादातर स्कॉलरशिप में कोई प्रोसेसिंग और वेरिफिकेशन फीस नहीं ली जाती है। हालांकि कुछ संस्थानों में आवेदन शुल्क हो सकता है, लेकिन इसकी जानकारी हमेशा आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से दी जाती है। अगर स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर बार-बार पैसे मांगे जाएं, तो सतर्क हो जाना चाहिए। सवाल- स्कॉलरशिप आवेदन करते समय स्टूडेंट्स को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- स्कॉलरशिप की जानकारी हमेशा यूनिवर्सिटी, सरकारी विभाग या संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट से ही चेक करनी चाहिए। सभी सावधानियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- स्कॉलरशिप आवेदन करते समय कौन-से संकेत दिखें तो सतर्क हो जाएं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या एजेंट के जरिए आवेदन करना सुरक्षित है? जवाब- साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर राहुल मिश्रा के मुताबिक, रजिस्टर्ड और भरोसेमंद एजेंट के जरिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन बिना जांच-पड़ताल के बैंक डिटेल्स, OTP, पासवर्ड या ओरिजिनल डॉक्यूमेंट न दें। अगर कोई एजेंट स्कॉलरशिप दिलाने की गारंटी दे या पहले पैसे मांगे, तो सतर्क हो जाएं। सवाल- अगर स्कॉलरशिप स्कैम का शिकार हो जाएं तो क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में बिना देर किए कुछ जरूरी कदम उठाएं- ध्यान रखें, जितनी जल्दी कार्रवाई करेंगे, नुकसान का रिस्क उतना ही कम होगा। सवाल- स्कॉलरशिप स्कैम की शिकायत कहां करें? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- *************** ग्राफिक्स- अजीत सिंह ………………….. ये खबर भी पढ़ें साइबर लिटरेसी- गूगल रिव्यू के नाम पर स्कैम: युवक के 7 लाख ठगे, घर बैठे कमाई के झांसे में न आएं, जानें स्कैम से कैसे बचें? पिछले दिनों भोपाल के एक 29 साल के युवक के साथ ठगी की वारदात हुई। स्कैमर्स ने ‘गूगल रिव्यू’ से कमाई के नाम पर उससे कई लाख ठग लिए। ठगों ने पहले टेलीग्राम पर संपर्क किया और गूगल रिव्यू देने के बदले पैसे कमाने का ऑफर दिया। ये खबर भी पढ़ें…
रिलेशनशिप एडवाइज- मेरे होने वाले पति डिवोर्सी हैं:उन्होंने अपनी एक्स वाइफ को भी हमारी शादी में इनवाइट किया है, क्या ये नॉर्मल है?
सवाल- मेरी उम्र 43 साल है और जल्दी ही मैं शादी करने वाली हूं। जिनसे शादी हो रही है, वो डिवोर्सी हैं। मुझे यह जानकर बहुत आश्चर्य हुआ कि हमारी शादी का इनविटेशन उन्होंने अपनी पूर्व पत्नी को भी भेजा है। उनके बीच अभी भी बात होती है। मैं समझती हूं कि उनका एक बेटा है और वो साथ मिलकर को-पेरेंटिंग कर रहे हैं। लेकिन वो एक-दूसरे से कुछ ज्यादा ही गर्मजोशी से मिलते हैं। मानो उनके बीच कोई झगड़ा ही न हो। अगर सबकुछ इतना अच्छा था तो फिर डिवोर्स ही क्यों हुआ? कहीं ऐसा तो नहीं कि वो दोनों अब भी साथ हैं। मैं क्या करूं? एक्सपर्ट– डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा आपकी चिंता समझ में आती है। शादी से ठीक पहले अगर होने वाला पार्टनर अपनी पूर्व पत्नी के साथ काफी सहज और गर्मजोशी से मिलता-जुलता दिखे, तो मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन अभी सिर्फ इस आधार पर यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि दोनों फिर से साथ हैं। डिवोर्स का मतलब यह नहीं होता कि दो लोग हमेशा एक-दूसरे से नफरत करें। खासकर तब, जब उनका एक बच्चा है और दोनों साथ मिलकर को–पेरेंटिंग कर रहे हैं। इसलिए बच्चे की पढ़ाई, स्वास्थ्य, छुट्टियों और दूसरी जरूरतों के लिए दोनों को संपर्क में रहना पड़ सकता है। इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि वे आपस में बात क्यों करते हैं। असली सवाल ये है कि वे किस तरह की बात करते हैं और उनके रिश्ते की सीमाएं क्या हैं। ये सिर्फ आपका शक है, फैक्ट नहीं सबसे पहले आपको दोनों चीजों के फर्क को समझने की जरूरत है। आपने देखा कि दोनों गर्मजोशी से मिलते हैं। यह एक तथ्य है। लेकिन “शायद वे अब भी साथ हैं” यह सिर्फ एक आशंका है। दोनों के बीच अंतर करना बहुत जरूरी है। जब हमें रिश्ते को लेकर डर होता है, तो दिमाग अधूरी जानकारी को अपने डर के हिसाब से जोड़ने लगता है। इसलिए आप खुद से पूछें- इसलिए सिर्फ मुस्कुराकर बात करना, अपनी शादी में इनवाइट करना या बच्चे से जुड़े कार्यक्रमों में साथ दिखना अपने आप में भावनात्मक रिश्ते का प्रमाण नहीं है। शादी से पहले एक जरूरी बातचीत करें हालांकि आपके मन में जो सवाल उठ रहे हैं, उसे दबाकर रखना ठीक नहीं है। इसलिए अपने पार्टनर से खुलकर बात करें। लेकिन सिर्फ बात करें, कोई आरोप न लगाएं। आप कह सकती हैं— “मैं बच्चे के साथ तुम्हारे रिश्ते का सम्मान करती हूं। मुझे तुम्हारा को-पेरेंटिंग करना भी समझ में आता है। लेकिन अपनी पूर्व पत्नी के साथ तुम्हारा रिश्ता देखकर मेरे मन में कुछ सवाल हैं। मैं शादी से पहले इन्हें स्पष्ट करना चाहती हूं।” इसके बाद कुछ सीधे सवाल पूछें। याद रखें, ये सवाल पूछने का मकसद जासूसी करना नहीं है। आप यह समझना चाहती हैं कि जिस रिश्ते में प्रवेश करने जा रही हैं, उसमें पुराने रिश्ते की जगह क्या है। डिवोर्स की वजह जानना क्यों जरूरी? आपका ये सवाल है कि “अगर सब इतना अच्छा था तो डिवोर्स क्यों हुआ?” यह सवाल वाजिब है। लेकिन इसका जवाब हमेशा सीधा नहीं होता। कई शादियां इसलिए टूटती हैं क्योंकि पति-पत्नी की प्राथमिकताएं अलग हो जाती हैं। कहीं लंबे समय तक मतभेद होते हैं। कहीं भरोसे की समस्या होती है। कहीं दोनों समझ जाते हैं कि वे साथ रहकर खुश नहीं हैं। हर शादी हमेशा सिर्फ इसलिए नहीं टूटती कि दोनों एक–दूसरे के दुश्मन हो गए थे। कई बार लोग एक–दूसरे के लिए सही मैच नहीं होते। इसलिए भी वे आपसी रजामंदी से अपने रास्ते अलग कर लेते हैं। डिवोर्स के बाद दोनों के बीच झगड़े खत्म हो जाना इस बात का प्रमाण नहीं है कि शादी के समय भी रिश्ता अच्छा था। इसलिए उनसे उनके अतीत की पूरी कहानी जानने की कोशिश करें। लेकिन उनकी पूर्व पत्नी से पूछताछ करने या उसके सोशल मीडिया की निगरानी करने से बचें। असली जवाब उनके व्यवहार में मिलेगा उनकी बात सुनने के साथ उनका व्यवहार भी देखें। जैसेकि– आपको सिर्फ एक घटना नहीं देखनी है। व्यवहार का पैटर्न देखना है। इनमें से कोई एक बात अपने आप में यह साबित नहीं करती कि दोनों फिर से साथ हैं। लेकिन कई संकेत लगातार दिखाई दें, तो बातचीत जरूरी है। इन सच्चाइयों का स्वीकार जरूरी इस शादी में सिर्फ एक पुरुष और एक महिला नहीं जुड़ रहे हैं। एक बच्चा भी इस रिश्ते का हिस्सा होगा। इसका मतलब है कि पूर्व पत्नी आपके होने वाले पति की जिंदगी से पूरी तरह बाहर नहीं जाएंगी। बच्चे के कारण उनका संपर्क लंबे समय तक बना रह सकता है। इस वास्तविकता को शादी से पहले स्वीकार करना जरूरी है। अंत में सबसे जरूरी बात आपको अपने होने वाले पति की पूर्व पत्नी से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी है। आपको यह भी साबित नहीं करना है कि आप उनसे बेहतर हैं। आपको सिर्फ यह समझना है कि क्या आपका पार्टनर पुराने रिश्ते की जिम्मेदारियों और अपने नए रिश्ते के बीच स्वस्थ सीमा बना पा रहा है। इसलिए स्पष्ट बातचीत करें। फैसला डर के आधार पर नहीं, स्पष्टता के आधार पर लें। ………………………. ग्राफिक- विपुल शर्मा ……………………….. ये खबर भी पढ़ें… रिलेशनशिप एडवाइज- क्या पार्टनर का फोन चेक करना गलत है:मुझे हसबैंड पर शक है, क्या चुपके से उनका फोन खोलकर देख लूं, क्या करूं पार्टनर के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखे तो मन में शक पैदा होना स्वाभाविक है। ये बातें असुरक्षा बढ़ा सकती हैं। ऐसे में फोन चेक करके सच जानने की इच्छा होना भी स्वाभाविक है।लेकिन मेरा सुझाव है कि शक होते ही उसे सच मान लेना ठीक नहीं। पूरी खबर पढ़ें…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 











