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रतन टाटा के करीबी मेहली मिस्त्री का इस्तीफा:टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट से हटेंगे; 30 सितंबर को कार्यकाल खत्म होगा

रतन टाटा के करीबी रहे मेहली मिस्त्री ने कोलकाता स्थित टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट से अलग होने का फैसला किया है। उनका कार्यकाल 30 सितंबर को खत्म होगा और उन्होंने कहा है कि वे दोबारा इस पद की जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे। मेहली मिस्त्री ने इस फैसले की जानकारी 15 सितंबर को एक ईमेल के जरिए दी। उन्होंने टाटा मेडिकल सेंटर के CEO से कहा कि उनके हटने के फैसले को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया जाए। मिस्त्री ने यह ईमेल टाटा ट्रस्ट्स के नए चेयरमैन नोएल टाटा समेत परिवार के अन्य ट्रस्टियों को भी भेजा है। कम खर्च में कैंसर का इलाज करता है यह अस्पताल कोलकाता का टाटा मेडिकल सेंटर बिना किसी मुनाफे के चलाया जाने वाला अस्पताल है, जिसमें 436 बेड हैं। यहां बेहद कम और किफायती खर्च पर कैंसर का इलाज किया जाता है। इलाज के साथ-साथ यह सेंटर कैंसर की शुरुआती पहचान, बीमारी को फैलने से रोकने, मरीजों की देखरेख और इलाज के बाद उनकी देखभाल संभालने का काम भी करता है। ₹1000 करोड़ से ज्यादा का निवेश संभालने वाली कंपनी भी छोड़ी टाटा ग्रुप से जुड़ी संस्थाओं में मिस्त्री की जिम्मेदारी धीरे-धीरे खत्म हो रही है। इससे पहले उन्होंने 'RNT एसोसिएट्स' कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दिया था। यह वही कंपनी है जो रतन टाटा के व्यक्तिगत निवेशों जैसे ओला इलेक्ट्रिक और अर्बन कंपनी में लगे पैसे को संभालती है और इसका कुल पोर्टफोलियो ₹1,000 करोड़ से भी ज्यादा का है। RNT एसोसिएट्स छोड़ने से पहले वे रतन टाटा से जुड़े दो अन्य चैरिटी ट्रस्टों का पद भी छोड़ चुके थे। रतन टाटा की वसीयत के लागू होने के बाद जब इन ट्रस्टों की जिम्मेदारी नए लोगों को मिली, तब इस कंपनी का मैनेजमेंट भी नए ट्रस्टियों को सौंप दिया गया। मुख्य टाटा ट्रस्ट्स से भी पहले ही हट चुके हैं मिस्त्री टाटा ग्रुप के दो सबसे बड़े और मुख्य चैरिटी ट्रस्टों 'सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट' और 'सर रतन टाटा ट्रस्ट' से मेहली मिस्त्री अक्टूबर 2025 में ही हट चुके हैं। हालांकि, पहले उन्हें जीवनभर ट्रस्टी बनाए रखने की बात हुई थी, लेकिन बाद में उन्हें दोबारा इस पद की मंजूरी नहीं मिल सकी। उस दौरान मिस्त्री ने चैरिटी कमिश्नर का रुख भी किया था, ताकि उनकी बात भी सुनी जाए। बाद में उन्होंने खुद ही मामला शांत कर दिया और कहा कि वे रतन टाटा के उसूलों पर चलते हुए टाटा ट्रस्ट्स को किसी भी विवाद में नहीं घसीटना चाहते। फिलहाल टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट से जुड़े हैं टाटा ग्रुप के मुख्य ट्रस्टों से हटने के बाद भी मिस्त्री 'सर रतन टाटा ट्रस्ट' के अधीन आने वाले 'टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट' से जुड़े हैं। हालांकि, 30 सितंबर को कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट में भी उनकी भूमिका आधिकारिक रूप से खत्म हो जाएगी।

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India First LNG Train: देश की पहली एलएनजी ड्यूल-फ्यूल ट्रेन पटरी पर दौड़ने को तैयार; डीजल की खपत में होगी 40% तक की बचत

भारतीय रेलवे के इतिहास में पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक परिवहन की दिशा में एक नया पन्ना जुड़ गया है। हाइड्रोजन ट्रेनों के सफल प्रयोग के बाद अब रेलवे ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) यानी तरल प्राकृतिक गैस से चलने वाली देश की पहली ड्यूल-फ्यूल ट्रेन को पटरी पर उतार दिया है।

इस अभिनव पहल का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को सुरक्षित रखना और रेलवे के ईंधन खर्च में भारी कमी लाना है। यह ट्रेन गुजरात के साबरमती रेलवे स्टेशन से अपनी सेवा की शुरुआत कर रही है।

​कैसे काम करती है एलएनजी ड्यूल-फ्यूल तकनीक? 
इस ट्रेन में अत्याधुनिक ड्यूल-फ्यूल (एलएनजी और डीजल) तकनीक का उपयोग किया गया है। जिस प्रकार सीएनजी या पेट्रोल पर गाड़ियां काम करती हैं, उसी तर्ज पर यह इंजन भी दोनों ईंधनों के मिश्रण या विकल्प पर काम करेगा।

ट्रेन के ड्राइविंग पावर कार (DPC) में लगभग 2,200 लीटर की क्षमता वाला विशेष एलएनजी टैंक फिट किया गया है। एक बार पूरी तरह से रिफिल होने पर यह ट्रेन बिना किसी बाधा के लंबी दूरी तय करने में सक्षम है।

​एलएनजी ट्रेन के प्रमुख फायदे और तकनीकी खूबियां 
​डीजल की भारी बचत: इस ड्यूल-फ्यूल प्रणाली के सफल उपयोग से पारंपरिक डीजल की खपत में सीधे तौर पर लगभग 40 प्रतिशत तक की बड़ी कमी दर्ज की जाएगी।

​पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण: यह तकनीक पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन काफी हद तक घट जाता है।

​आर्थिक रूप से किफायती: ईंधन के इस सस्ते और सुलभ विकल्प के उपयोग से रेलवे के परिचालन की लागत में भारी कमी आएगी, जिससे भारतीय रेलवे को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलेगा।

​क्षमता और पावर में निरंतरता: आधुनिक इंजनों की ताकत और खिंचाव क्षमता से बिना किसी समझौते के यह तकनीक ट्रेन को सुचारू और सुरक्षित रूप से चलाने में मदद करती है।

​भविष्य के लिए भारतीय रेलवे का हरित दृष्टिकोण 
भारतीय रेलवे का यह कदम देश को नेट-रोड के लक्ष्य की ओर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा। इस प्रकार की हरित तकनीकों के विस्तार से न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि देश के ऊर्जा आयात पर निर्भरता भी कम होगी। यात्रियों को अब कम लागत और प्रदूषण मुक्त तथा आधुनिक तकनीक से लैस यात्रा का अनूठा अनुभव प्राप्त होगा।

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  Sports

वनडे सीरीज में सबसे ज्यादा शिकार करने वाले 5 विकेटकीपर, बल्लेबाजों को नहीं दिया सांस लेने का मौका

5 wicket keepers Most dismissals in a ODI series: वनडे क्रिकेट इतिहास में विकेटकीपरों का प्रदर्शन हमेशा से मैच का रुख बदलने वाला रहा है. अमेरिका के एसके पटेल ने आईसीसी वर्ल्ड कप लीग 2 के 27 मैचों में सर्वाधिकशिकार करके शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि नीदरलैंड्स के एसए एडवर्ड्स और स्कॉटलैंड के एमएच क्रॉस ने भी बेहतरीन निरंतरता दिखाई. वहीं, ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज एडम गिलक्रिस्ट ने शान से इस लिस्ट में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं. नेपाल के आसिफ शेख ने भी अपनी छाप छोड़ी है. Fri, 2 Oct 2026 07:03:52 +0530

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