सपा के Rajya Sabha प्रत्याशी धनराज नथवानी के पास 373 करोड़ रुपये की संपत्ति
राज्यसभा चुनाव के लिये समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवार धनराज परिमल नथवानी ने अपने, अपनी पत्नी और दो आश्रितों के नाम पर 373 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति घोषित की है। उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी वार्षिक आय 19.61 करोड़ रुपये बताई है। नथवानी (40) को सपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है।
पार्टी ने बुधवार को वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव के साथ उनके नाम की घोषणा की और इसके बाद नथवानी ने लखनऊ में अपना नामांकन दाखिल किया। नथवानी द्वारा दाखिल हलफनामे के मुताबिक उनके नाम पर 77.75 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है जबकि उनकी पत्नी के नाम पर 211.10 करोड़ रुपये की चल संपत्ति घोषित की गई है। शपथपत्र के अनुसार दो आश्रितों के नाम पर क्रमशः करीब 1.95 करोड़ रुपये और 1.20 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है।
नथवानी की चल संपत्ति में करीब 55.76 करोड़ रुपये के शेयर, बॉन्ड, ऋणपत्र और म्यूचुअल फंड में निवेश शामिल हैं। इसके अलावा उनके बैंक खातों में लगभग 10.63 करोड़ रुपये जमा हैं, जबकि करीब 6.92 करोड़ रुपये व्यक्तिगत ऋण एवं प्राप्य राशि के रूप में दर्ज हैं। डाकघर बचत योजनाओं और बीमा में करीब 2.81 करोड़ रुपये का निवेश है।
हलफनामे के विवरण के मुताबिक नथवानी की पत्नी ने शेयर, बॉन्ड और अन्य वित्तीय साधनों में करीब 199.44 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। उनके पास लगभग 1.87 करोड़ रुपये की बैंक जमा राशि तथा 8.54 करोड़ रुपये के आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं हैं। शपथपत्र के मुताबिक नथवानी की स्वयं अर्जित अचल संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 27.67 करोड़ रुपये और उनकी पत्नी की ऐसी संपत्तियों का मूल्य 53.59 करोड़ रुपये है, जबकि इन संपत्तियों की खरीद लागत क्रमशः 7.93 करोड़ रुपये और 32.49 करोड़ रुपये बताई गई है।
हलफनामे के मुताबिक नथवानी पर करीब 3.01 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं, जिनमें 41.59 लाख रुपये सरकारी बकाया और करीब 2.59 करोड़ रुपये बैंक तथा अन्य संस्थानों के ऋण शामिल हैं। उनकी पत्नी की देनदारियां करीब 18.56 लाख रुपये हैं। विवरण के मुताबिक वर्ष 2025-26 में नथवानी ने अपनी आमदनी 19.61 करोड़ रुपये और पत्नी की आय करीब 1.48 करोड़ रुपये बताई है।
उनकी आय के स्रोतों में पेशेवर आय, किराया, पूंजीगत लाभ और अन्य स्रोत शामिल हैं। हलफनामे में नथवानी का पेशा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पेशेवर सलाहकार तथा गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के निदेशक के रूप में दर्ज है। उन्होंने तीन निजी कंपनियों में शेयरधारक होने की भी घोषणा की है।
नथवानी ने अपने खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं होने और किसी मामले में दोषी नहीं ठहराए जाने की जानकारी दी है। हलफनामे के अनुसार नथवानी की उच्चतम शैक्षणिक योग्यता कॉरपोरेट कानून और जनसंपर्क प्रबंधन में विशेषज्ञता के साथ एमबीए है, जो उन्होंने सितंबर 2008 में दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पूरी की थी।
Delhi में शुरू हुई World Gastroenterology Congress, 61 देशों के 3000 विशेषज्ञ जुटे
विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कांग्रेस (डब्ल्यूसीओजी) 2026 बुधवार को यहां आरंभ हुआ, जिसमें वैश्विक और भारतीय ‘गैस्ट्रोएंटरोलॉजी’ विशेषज्ञों ने जठरांत्र (पाचन तंत्र) और यकृत (लीवर) संबंधी बीमारियों के बदलते प्रकोप, जल्द निदान की आवश्यकता तथा रोकथाम और उपचार के लिए विकसित हो रहे तौर-तरीकों पर विचार-विमर्श किया। भारत में पहली बार हो रही इस चार-दिवसीय कांग्रेस में 61 देशों के कम से कम 3,000 प्रतिनिधि शामिल हुए हैं, जिनमें दुनिया भर के जाने-माने चिकित्सक और अनुसंधानकर्ता भी शामिल हैं। पहले दिन संक्रामक, चयापचय, सूजन और कैंसर जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पाचन तंत्र से जुड़ी) बीमारियों के बढ़ते दायरे पर चर्चा की गई।
‘एच. पाइलोरी’ और आंतों में कीड़ों से होने वाली बीमारियां अब भी बड़ी आबादी को प्रभावित कर रही हैं। ‘मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लीवर डिजीज’ (एमएएसएलडी), ‘इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज’ (आईबीडी), ‘गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर’ और पाचन तंत्र की पुरानी बीमारियां स्वास्थ्य प्रणाली पर नई चुनौतियां और मांगें खड़ी कर रही हैं। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के जठरांत्र विज्ञान और मानव पोषण इकाई विभाग के प्रोफेसर एवं इस कांग्रेस की स्थायी आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. गोविंद मखारिया ने कहा कि पेट और आंत की बीमारियों का बोझ अपने पैमाने और क्लिनिकल प्रोफ़ाइल, दोनों ही तरह से बदल रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘एच पाइलोरी जैसे संक्रमण और परजीवी बीमारियों के साथ-साथ चयापचय और जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां भी तेज़ी से अहम होती जा रही हैं। इसलिए, चाहे यकृत की बीमारी हो, कोलोरेक्टल कैंसर, सीलिएक बीमारी या आईबीडी, इनका समय पर पता लगाना बहुत ज़रूरी है।’’ डॉ. मखारिया ने कहा, ‘‘डब्ल्यूसीओजी 2026 इन प्राथमिकताओं को एक साथ लाती है और अलग-अलग आबादी में बीमारी की रोकथाम, पहचान और इलाज पर ध्यान देने का मौका देती है।’’ विशेषज्ञों ने कम उम्र में होने वाले ‘कोलोरेक्टल कैंसर’ के मामलों में दुनिया भर में हो रही बढ़ोतरी पर ध्यान केंद्रित किया। इसमें जोखिम बढ़ाने वाले बदलते कारक, जोखिम का पता लगाने के तरीके, जांच की भूमिका और नए ‘नॉन-इनवेसिव’ बायोमार्कर जैसे विषय शामिल थे।
विशेषज्ञों ने उन लोगों की पहचान जल्दी करने की जरूरत पर चर्चा की, जिन्हें जोखिम ज़्यादा है, खासकर उन जगहों पर जहां जांच की सुविधाएं सीमित हैं। उन्होंने इस काम में मदद करने वाले नए तरीकों की संभावनाओं पर भी बात की।
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