12 साल के बेटे के सामने पति को दबिया से काटने वाली पत्नी को उम्रकैद, मां ने ही पहुंचवाया था जेल
पूर्णिया जिले के धमदाहा में पिछले साल 12 साल के बेटे के सामने अपने पति की निर्मम हत्या करने वाली पत्नी को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। पारिवारिक कलह से तंग आकर पत्नी ने घर में ही सो रहे अपने पति पर दबिया से वार किया था।
उत्तराखंड में बुजुर्गों के लिए बढ़ी सामाजिक सुरक्षा, पेंशन से इलाज तक कई योजनाओं का सहारा
Uttarakhand News: उत्तराखंड में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आर्थिक मदद के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी सरकार का जोर है. राज्य में वृद्धावस्था पेंशन से लेकर मुफ्त इलाज और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने तक कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं. इन योजनाओं का मकसद बुजुर्गों को आर्थिक परेशानी से राहत देने के साथ उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है.
उत्तराखंड की वृद्धावस्था पेंशन योजना में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पात्र बुजुर्गों को हर महीने ₹1,500 की पेंशन दी जा रही है. खास बात यह है कि पात्र पति और पत्नी दोनों इस योजना का लाभ ले सकते हैं. यानी पात्र बुजुर्ग दंपति को मिलाकर हर महीने ₹3,000 की पेंशन मिल सकती है. समाज कल्याण विभाग के मुताबिक, इस योजना के लिए आवेदक की मासिक आय सभी स्रोतों से ₹4,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए या वह बीपीएल कार्डधारक होना चाहिए.
पेंशन की रकम सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. योजना में समय-समय पर बदलाव भी किए गए हैं. समाज कल्याण विभाग के रिकॉर्ड में वृद्धावस्था पेंशन योजना में संशोधन से संबंधित 21 अक्टूबर 2022 का शासनादेश और पेंशन योजनाओं को ऑनलाइन लागू करने से जुड़ा 26 सितंबर 2023 का आदेश दर्ज है.
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इलाज के खर्च की चिंता कम करने की कोशिश
बुजुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा है. आयुष्मान योजना के तहत पात्र परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने पर सालाना ₹5 लाख तक के इलाज की सुविधा मिलती है. उत्तराखंड सरकार के अनुसार, अप्रैल 2025 के अंत तक राज्य में 59.74 लाख आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके थे और 15 लाख से अधिक कार्डधारकों का मुफ्त इलाज सूचीबद्ध अस्पतालों में कराया जा चुका था.
आयुष्मान योजना में सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है. इसमें अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के कुछ खर्च भी शामिल हैं. उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, योजना के तहत परिवार को सालाना ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है.
बुजुर्गों को जरूरी उपकरण भी उपलब्ध
उम्र बढ़ने के साथ कई बुजुर्गों को चलने-फिरने, देखने या सुनने में परेशानी होती है. ऐसे लोगों की जरूरत को देखते हुए राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत चश्मा, व्हीलचेयर, चलने की छड़ी, ट्राइपॉड, सुनने की मशीन और नकली दांत जैसे सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है.
इन सुविधाओं का उद्देश्य बुजुर्गों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाना है. खासकर ऐसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये उपकरण उपयोगी हैं, जिन्हें उम्र से जुड़ी शारीरिक परेशानियों के कारण दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है.
वृद्धाश्रम और हेल्पलाइन की सुविधा
बेसहारा और जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों में वृद्धाश्रम और देखभाल केंद्र संचालित किए जा रहे हैं. यहां रहने, भोजन और स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था है. वरिष्ठ नागरिकों की शिकायत, सहायता और मार्गदर्शन के लिए 14567 हेल्पलाइन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
इसके अलावा पेंशन व्यवस्था को ऑनलाइन करने से लाभार्थियों के लिए आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की कोशिश की गई है. समाज कल्याण विभाग के मुताबिक, पेंशन योजनाओं के ऑनलाइन क्रियान्वयन के लिए विभागीय स्तर पर व्यवस्था लागू है.
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सरकार का जोर आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा पर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और कल्याण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया है. राज्य सरकार का फोकस बुजुर्गों को नियमित आर्थिक सहायता देने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाने पर है.
इस पूरी व्यवस्था में वृद्धावस्था पेंशन बुजुर्गों को नियमित आर्थिक सहारा देती है, जबकि आयुष्मान जैसी स्वास्थ्य योजनाएं इलाज के खर्च का बोझ कम करने में मदद करती हैं. वहीं सहायक उपकरण और देखभाल केंद्र बुजुर्गों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करते हैं. इस तरह राज्य में बुजुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा को सिर्फ पेंशन तक सीमित रखने के बजाय आर्थिक मदद, स्वास्थ्य और देखभाल से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.
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