Head lice: कंघी, हेयर टाइज़ और हैट्स से कैसे फैलती हैं सिर की जूं? जानें बचाव के आसान तरीके
सिर की जूं खासकर बच्चों के बीच जल्दी फैल सकती हैं। स्कूल, प्लेडेट्स या ग्रुप में बच्चों का एक-दूसरे के करीब रहना इसके फैलने का एक कारण हो सकता है। Lice Awareness Month के मौके पर यह समझना जरूरी है कि सिर की जूं कैसे फैलती हैं, इसके शुरुआती संकेत क्या हैं और इस समस्या को बिना शर्मिंदगी के कैसे संभाला जा सकता है।
खराब हाइजीन की वजह से नहीं होती सिर की जूं
सिर की जूं को लेकर आम गलतफहमी है कि यह खराब सफाई या हाइजीन की वजह से होती हैं। असल में, किसी को भी सिर की जूं हो सकती हैं और यह मुख्य रूप से करीबी संपर्क के जरिए फैलती हैं। बच्चों में बाल और स्कैल्प के संपर्क में आने वाली निजी चीजें शेयर करने से भी इसके फैलने का जोखिम बढ़ सकता है।
कंघी और ब्रश शेयर करने से बचें
कंघी और ब्रश सीधे बालों और स्कैल्प के संपर्क में आते हैं। इसलिए इन्हें व्यक्तिगत इस्तेमाल तक सीमित रखना एक आसान सावधानी है। खासकर घर या आसपास किसी को सिर की जूं की समस्या होने पर बच्चों को कंघी और ब्रश शेयर करने से बचना चाहिए।
हेयर टाइज़ और रिबन भी रखें अलग
बच्चे अक्सर हेयर टाइज़, रिबन और दूसरे हेयर एक्सेसरीज़ दोस्तों या भाई-बहनों के साथ शेयर कर लेते हैं। हालांकि, ये सिर की जूं फैलने का मुख्य कारण नहीं हैं, लेकिन जूं की स्थिति में ऐसी चीजें शेयर करने से बचना अच्छी आदत है।
हैट्स और कैप्स भी रखें निजी
हैट्स, कैप्स और दूसरे हेडवियर स्कैल्प के संपर्क में रहते हैं। इसलिए इन्हें भी व्यक्तिगत रखना एक छोटा लेकिन उपयोगी कदम हो सकता है, खासकर तब जब किसी को सिर की जूं होने की चिंता हो।
लगातार खुजली हो तो स्कैल्प चेक करें
हर बार स्कैल्प में खुजली होने का मतलब सिर की जूं होना नहीं है। ड्रायनेस, पसीना और स्कैल्प से जुड़ी दूसरी समस्याओं के कारण भी खुजली हो सकती है। लेकिन अगर खुजली लगातार बनी रहती है, स्कैल्प पर कुछ रेंगने जैसा महसूस होता है या बार-बार परेशानी होती है, तो स्कैल्प को ध्यान से चेक करना चाहिए।
खासकर तब, जब बच्चा ऐसे व्यक्ति के करीबी संपर्क में रहा हो जिसे सिर की जूं हैं। बालों से चिपके हुए निट्स (जूं के अंडे) या जीवित जूं दिखाई देना समस्या की जल्दी पहचान में मदद कर सकता है।
जूं मिलने पर जल्द करें ये काम
अगर सिर की जूं पाई जाती हैं, तो उन्हें जल्द संबोधित करना और सही उपचार की दिनचर्या अपनाना जरूरी है। किसी आउटब्रेक या करीबी संपर्क के बाद बच्चों के स्कैल्प की नियमित जांच करने से जूं की समस्या को जल्दी पहचानने में मदद मिल सकती है।
कुछ आसान आदतें भी इस समस्या को संभालने में मदद कर सकती हैं। बच्चों को कंघी और हेयर एक्सेसरीज़ शेयर करने से रोकें, निजी हैट्स और दूसरे हेडवियर अलग रखें, नियमित इस्तेमाल होने वाली निजी चीजों को साफ रखें और अगर खुजली लगातार बनी रहे तो स्कैल्प की जांच करें।
2-अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' का फैसला वापस:वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद व्यापारिक संगठनों का फैसला, UPI चार्ज टालने की मांग रखी
देशभर के बड़े व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाने का फैसला वापस ले लिया है। बुधवार को नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ व्यापारी संगठनों की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। इसके साथ ही व्यापारी संगठनों ने वित्त मंत्री से त्योहारी सीजन को देखते हुए शुल्क टालने की मांग की है। ₹2000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होना है। 20 वरिष्ठ व्यापारी नेताओं ने की वित्त मंत्री से मुलाकात देशभर के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 20 वरिष्ठ व्यापारी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इस बैठक का नेतृत्व चांदनी चौक से सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने किया। यह प्रदर्शन और 'नो यूपीआई डे' का आह्वान 'ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स फेडरेशन' और 'ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन' द्वारा किया गया था। बैठक में व्यापारी नेताओं ने छोटे और मध्यम कारोबारियों पर इस प्रस्तावित शुल्क के संभावित असर को लेकर चिंता जताई। बातचीत और आश्वासन के बाद वापस लिया गया विरोध मीडिया को जानकारी देते हुए प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि वित्त मंत्री के साथ काफी रचनात्मक चर्चा हुई है। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि व्यापारी समुदाय द्वारा उठाई गई मांगों और चिंताओं पर उचित विचार किया जाएगा। खंडेलवाल ने कहा कि इस सकारात्मक आश्वासन के बाद दोनों प्रमुख संगठनों ने 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाने के अपने निर्णय को वापस लेने का फैसला किया है। त्योहारी सीजन को देखते हुए शुल्क टालने की मांग प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से आग्रह किया कि आगामी त्योहारी सीजन और बाजार में बढ़ी हुई व्यावसायिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के क्रियान्वयन को फिलहाल टाल दिया जाए। व्यापारी संगठनों ने इस बात पर जोर दिया कि प्रस्तावित MDR का सबसे ज्यादा प्रभाव छोटे और मध्यम व्यवसायियों (MSMEs) पर पड़ेगा। डिजिटल पेमेंट की रफ्तार बनाए रखने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि मर्चेंट्स पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े। थ्रेसहोल्ड सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करने का सुझाव व्यापारियों ने प्रस्तावित ढांचे के तहत निर्धारित ₹1 लाख की थ्रेसहोल्ड सीमा की समीक्षा करने की मांग की है। उन्होंने सरकार से सुझाव दिया है कि इस सीमा को बढ़ाकर ₹5 लाख किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, व्यापारी संगठनों ने यह भी मांग रखी कि मर्चेंट-टू-मर्चेंट (M2M) यानी एक व्यापारी से दूसरे व्यापारी के बीच होने वाले लेनदेन को MDR के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाए। समस्याओं की जांच के लिए बने विशेष समिति व्यापारी नेताओं ने सरकार के सामने यह मांग रखी कि व्यापारियों की सभी चिंताओं और व्यावहारिक समस्याओं की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाए। यह समिति स्थिति का अध्ययन करे और आगे का एक व्यावहारिक रास्ता सुझाए। वित्त मंत्री बोलीं- सभी हितधारकों के हितों की होगी रक्षा CAIT द्वारा जारी बयान के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सरकार डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही सरकार सभी संबंधित हितधारकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी संकल्पबद्ध है। 'डिजिटल इंडिया को पूरा समर्थन, नीति संतुलित होनी चाहिए' व्यापारी नेताओं ने डिजिटल इंडिया मिशन और यूपीआई की अभूतपूर्व सफलता का पूर्ण समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि यूपीआई आज डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक "वैश्विक मॉडल" बनकर उभरा है। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट का विरोध करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इससे जुड़ी नीतियां संतुलित, समावेशी और उपभोक्ताओं व व्यवसायियों दोनों के विकास के अनुकूल हों। उन्होंने उम्मीद जताई कि निरंतर संवाद से एक व्यावहारिक और टिकाऊ ढांचा विकसित होगा, जिससे देश के लाखों व्यापारियों और MSME के हित सुरक्षित रहेंगे।
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