SIM Card को दूसरे नेटवर्क में कैसे करें पोर्ट, TRAI के MNP Rules और पूरा प्रोसेस
अक्सर टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स अपने ग्राहकों को अलग-अलग टैरिफ कीमतों पर अलग-अलग बेनिफिट्स और वैलिडिटी के साथ कई सारे प्रीपेड और पोस्टपेड प्लांस को ऑफर करते हैं। टेलीकॉम कंपनिया गजब-गजब ऑफर्स देती रहती हैं।
अगर आपको लगता है कि आपका मौजूदा प्रीपेड या पोस्टरपेड प्लान आपकी जरुरतों को पूरा नहीं कर रहा है या आपके मुताबिक वैल्यू फॉर मनी नहीं दे रहा है। अन्य टेलीकॉम कंपनी बिल्कुल वही या उसके काफी करीब ऑफर कर रही हो सकती है जिसकी असल में जरुरत है। फिर आप अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करके अपने मौजूदा फोन नंबर को किसी दूसरे नेटवर्क पर पोर्ट करना चूज कर सकते हैं।
अब आपने मौजूदा फोन नंबर से दूसरे नेटवर्क पर सिम को कैसे पोर्ट करवाएं, इसके सभी स्टेप्स आपको नीचे दिए गए हैं।
एक नेटवर्क से दूसरे में मोबाइल नंबर पोर्ट करने की एलिजिबिलिटी
TRAI का कहना है कि मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) फैसिलिटी का फायदा उठाने केलिए-
- अगर आपके सिम कार्ड को एक्टिवेशन को 90 दिन से ज्यादा समय हो गया है।
- यदि आपके पास पोस्ट-पेड़ मोबाइल कनेक्शन है, तो TSP के सभी बकाया बिल पूरी तरह क्लियर होने चाहिए।
- आपने अपने मोबाइल नंबर के चेंज ऑफ ओनरशिप के लिए अप्लाई न किया हो।
- असल में आपका नंबर सब-ज्यूडिस नहीं होना चाहिए या किसी कोर्ट ने इसकी पोर्टेबिलिटी पर रोक बिल्कुल न लगाई हो।
- आपका फोन नंबर किसी भी कॉन्ट्रैक्चुअल ऑब्लिगेशन्स के तहत नहीं होने चाहिए।
- वहीं, आप जिस फोन नंबर को पोर्ट करवना चाहते हैं, उसकी सिम पिछले सात दिनों तक अंदर बदला या रिप्लेस नहीं किया हो।
एक नेटवर्क से दूसरे में अपना मोबाइल नंबर कैसे पोर्ट करें?
- इसके लिए आपको वैलिड यूनिक पोर्टिंग कोड (UPC) जनरेट करें। आप अपने फोन नंबर से एक SMS भेजें UPC जनरेट कर सकते हैं।
- फिर इस मैसेज को कॉपी करें और 1900 पर भेज दें: PORT <10-digit phone number>
- अब आपको 1901 नंबर से UPC मिलेगा, जिससे आपको इस प्रोसेस के दौरान सब्मिट करना होगा।
- फिर अपनी पसंद के TSP के पॉइंट ऑफ सेल पर जाएं> कस्टमर एक्विजशन फॉर्म (CAF) और पोर्टिंग फॉर्म भरें।
- अब अपने नंबर को पोर्ट करने का चार्ज पे करें> KYC प्रक्रिया पूरा करें। रिक्वेस्ट सब्मिट होने को कन्फर्म करते हुए आपको MNP सर्विस प्रोवाइडर की तरफ से एक SMD मिलेगा।
- फिर 3 दिन के अंदर आपका नंबर नए नेटवर्क पर पोर्ट हो जाएगा। वहीं, इसका कन्फर्मेशन भी आपको चार घंटे अंदर SMS के जरिए मिल जाएगा।
- जब आपको उसी फोन नंबर के साथ अपना नया सिम मिल जाए, तो आपको इसे अपने हैंडसेट में लगाना होगा।
- वहीं, वेरिफिकेशन पूरा होते ही आपका सिम एक्टिवेट हो जाएगा।
INDIA Alliance के मार्च पर बोले Shivraj Singh Chouhan, यह Save Democracy नहीं, Save Dynasty मार्च है
चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) और विपक्षी गठबंधन की अलग-अलग बैठकों के बाद, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कांग्रेस और INDIA गठबंधन पर तीखा हमला बोला। चौहान ने विपक्षी गठबंधन की एकजुटता और उसमें राहुल गांधी की हैसियत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता को अभी तक INDIA गठबंधन के निर्विवाद नेता के तौर पर स्वीकार नहीं किया गया है। उनके ये बयान विपक्षी दलों द्वारा विरोध-प्रदर्शन के साझा कार्यक्रम की घोषणा के कुछ घंटों बाद आए। इस कार्यक्रम में 2 से 8 अक्टूबर तक लोकतंत्र बचाओ मार्च और 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों का चुनाव आयोग तक मार्च शामिल है।
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CWC की बैठक में राहुल गांधी की कही गई बातों पर निशाना साधते हुए - जिसमें उन्होंने पार्टी के साथियों से "मुझ पर भरोसा करना शुरू करने" को कहा था - चौहान ने कहा कि इस अपील से ही पता चलता है कि कांग्रेस के अंदर उनकी लीडरशिप को लेकर अभी भी सवाल उठ रहे हैं। चौहान ने कहा कि INDIA गठबंधन राहुल को अपना नेता मानने को तैयार नहीं है। वे बार-बार उन्हें स्थापित करने और फिर से लॉन्च करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि CWC बैठक में गांधी की भरोसे की अपील से पता चलता है कि कांग्रेस को भी उनकी लीडरशिप पर पूरा भरोसा नहीं है। 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक अलग रिपोर्ट के मुताबिक, गांधी ने CWC में अंदरूनी संदेहों पर बात की और पार्टी सदस्यों से अपनी लीडरशिप पर भरोसा करने को कहा।
चौहान ने INDIA गठबंधन के लोकतंत्र बचाओ मार्च शुरू करने के फैसले पर भी निशाना साधा। उन्होंने इसे वंशवाद बचाओ मार्च करार दिया और आरोप लगाया कि विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं के बजाय एक राजनीतिक परिवार को बचाने की कोशिश कर रहा है। इन्होंने 2 से लेकर 8 अक्टूबर तक का एक कार्यक्रम घोषित किया है। यह "Save Democracy" मार्च नहीं, बल्कि "Save Dynasty" मार्च है। लेकिन लोगों ने तय कर लिया है कि अब वंशवादी राजनीति नहीं चलेगी। राहुल गांधी ने पहले बंगाल में बीजेपी की जीत के लिए ममता बनर्जी को दोषी ठहराया था। फिर भी, जब भी चुनाव आते हैं, कांग्रेस अपनी राजनीतिक नाकामियों पर विचार करने के बजाय संस्थाओं पर सवाल उठाने और संवैधानिक निकायों का राजनीतिकरण करने लगती है।
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उन्होंने कहा कि सच बात तो ये है कि INDI गठबंधन राहुल गांधी को नेता मानने के लिए ही तैयार नहीं है। ये अपने आप को फिर से रिलॉन्च करने की कोशिश कर रहे हैं। INDI गठबंधन तो राहुल को नेता मानता ही नहीं, लेकिन कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक में भी राहुल गांधी कह रहे थे कि मुझ पर भरोसा करो, मुझ पर विश्वास करो। मतलब कांग्रेस को ही राहुल गांधी जी पर भरोसा नहीं है। INDI गठबंधन की बैठक का नतीजा क्या निकला? शून्य विजन, 100% हताशा, और हार का एडवांस बहाना। आने वाले चुनाव के पहले ही इन्होंने अपनी हार की भूमिका बना ली है।
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