Rajasthan Government: भजनलाल सरकार की नीतियों पर निवेशकों को कितना भरोसा? सच्चाई की पड़ताल में दावे उलट निकले
राजस्थान में भजन लाल सरकार ने राइजिंग राजस्थान के माध्यम से औद्योगिक क्रांति का बिगुल बजाया. 22,000 एमओयू के जरिए राज्य में निवेश की बहाल लाने का जनता को सपना दिखाया गया, लेकिन वो सपने डेढ़ साल बाद भी अधूरे हैं. न्यूज नेशन ने जब सच्चाई की पड़ताल की तो तस्वीर सरकारी दावों के बिल्कुल उलट निकली. क्योंकि अब तक केवल 4000 से भी कम परियोजनाओं पर काम शुरू हुआ है. सवाल है कि राजस्थान में उम्मीदों के मुताबिक निवेश क्यों नहीं हो रहा है? क्या सरकारी सिस्टम निवेशकों और उद्यमों की राह में सबसे बड़ा बाधा बन गया है? आखिर राइजिंग राजस्थान सवालों के घेरे में क्यों है? देखिए हमारी इस रिपोर्ट.
22 हजार से ज्यादा एमओयू
भजनलाल सरकार ने राजस्थान के औद्योगिक विकास की नई बुलंदियों पर पहुंचाने का वादा किया. इसी मकसद से राइजिंग राजस्थान समिट का आयोजन किया गया. ₹35 लाख करोड़ तक के निवेश प्रस्ताव, 22 हजार से ज्यादा एमओयू और लाखों युवाओं को रोजगार देने का
वादा किया. सरकार ने राइजिंग राजस्थान को औद्योगिक भविष्य का ब्लूप्रिंट बताया था. देश विदेश की बड़ी कंपनियों के साथ बड़े निवेश समझौते हुए और यह संदेश दिया गया कि राजस्थान अब निवेशकों की पहली पसंद बनने जा रहा है. लेकिन हकीकत की जमीन पर हालात कुछ और ही हैं. राजस्थान में उद्योगों को बढ़ावा देना, दूसरे राज्यों से राजस्थान में निवेश लाना, दुनिया भर के निवेश को राजस्थान में लाकर के यहां पर इंडस्ट्री को बढ़ावा देना. इसके लिए राजस्थान में भाजपा सरकार ने अपने पहले ही साल के अंदर राइजिंग राजस्थान समिट करवाई. तमाम दावे किए गए.
लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद
35 लाख करोड़ के एमओयू होने की बात कही गई. लेकिन आज विपक्ष आरोप लगा रहा है कि एमओयू तो किए गए. बड़े-बड़े आंकड़े राजस्थान की जनता के सामने पेश किए गए लेकिन राजस्थान में 10% भी उस निवेश के बाद में बिजनेस इंडस्ट्रीज नहीं लगाई जा सकी. जिन परियोजनाओं से लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद थी, वह आज भी सरकारी मंजूरियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझी हुई हैं. ऐसे में सवाल बड़ा यही है कि अगर भजन लाल सरकार उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए हर मुमकिन कदम उठाने का दावा कर रही है तो फिर आखिर वो कौन सी अड़चन है जिसकी वजह से निवेशकों और उद्यमियों को राजस्थान का रुख करने में हिचक हो रही है.
8.1 लाख करोड़ का निवेश
राजस्थान सरकार का जो व्यवहारिक पक्ष कमजोर है वो यह है कि एमओयू साइन करने के बाद निवेशक को कनेक्ट तो वह कर रहे हैं लेकिन उसके राह में जो अड़चनें आ रही हैं. उन अड़चनों को दूर करने के लिहाज से सरकारी सिस्टम की तरफ से कोई व्यवहारिक पहल या कदम नहीं उठाए जा रहे. इस कारण इस क्षेत्र के निवेशकों को हिचकिचाहट है. राजस्थान विधानसभा में सरकार ने लिखित में स्वीकार किया कि राइजिंग राजस्थान में 22,299 एमओयू साइन किए गए. लेकिन अब तक केवल 3895 परियोजनाओं पर काम की शुरुआत हो सकी है. इनमें सबसे अधिक 10396 परियोजनाएं उद्योग विभाग की हैं. इसके बाद ऊर्जा विभाग की 472 परियोजनाएं शामिल हैं. इनसे कुल 8.1 लाख करोड़ का निवेश आया. जिससे राज्य में 288302 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है. यानी कि हर 1000 में से 83 परियोजनाएं आज भी धरातल पर उतरने का इंतजार कर रही हैं.
राजस्थान के उद्योग जगत का कहना है कि निवेश की राह में सबसे बड़ी चुनौती अब पूंजी नहीं बल्कि सिस्टम बन चुका है. सरकार की नियत तो सकारात्मक है लेकिन नीतियों में समस्या है. जब तक बुनियादी ढांचे और क्लीयरेंस सिस्टम में तेजी नहीं आएगी तब तक भारीभरकम निवेश का सपना अधूरा ही रहेगा.
काफी बिजली वेस्टेज हो जाती है
सुविधाएं पूरी तरह से बिजनेसमैन को नहीं दी जाती है. उसके अलावा जो सोलर इंडस्ट्रीज लगी है उसके बाद में जो वहां से बिजली निकलती है उसके लिए राजस्थान सरकार के पूरे पास पूरे संसाधन मौजूद नहीं है कि बिजली की किल्लत को रोका जा सके. बिजली को आगे घरों तक पहुंचाया जाता है तो काफी बिजली वेस्टेज हो जाती है जिसका खामियाजा भी कंपनियों को भुगतना पड़ता है. आज भी ग्राउंड पर आने से घबराते हुए नजर आते हैं.
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