सस्ते टिकट ढूंढेगा, होटल रूम भी बुक करेगा डॉट्स:ओपनएआई ने लॉन्च किया नया AI एजेंट; अभी पेड यूजर्स को मिलेगा
सस्ती फ्लाइट टिकट खोजना हो, मनपसंद होटल में रूम रिजर्व कराना हो या फिर बिजली-पानी का बिल समय पर भरना हो। अब इसके लिए आपको घंटों स्क्रीन पर माथापच्ची करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। AI कंपनी ओपनएआई का नया टूल 'डॉट्स' यह सब कुछ खुद-ब-खुद करके देगा। ओपनएआई ने इसे हाल ही में लॉन्च हुए मेटा के 'म्यूज' को टक्कर देने के लिए लॉन्च किया है। यह टूल आम चैटबॉट की तरह केवल चैट करने या सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपके कहे बिना भी कई डिजिटल काम खुद पूरा कर सकता है। इसके पास इंटरनेट पर चलने वाला अपना अलग क्लाउड कंप्यूटर और ब्राउजर है। इसकी मदद से अगर आपका फोन या लैपटॉप बंद भी हो, तब भी यह बैकग्राउंड में आपके सभी जरूरी काम निपटाता रहता है। फिलहाल यह सुविधा सिर्फ प्रो और बिजनेस जैसे पेड प्रीमियम यूजर्स के लिए रोलआउट की गई है। 4,000 से ज्यादा एप्स से कनेक्ट हो सकेगा डॉट्स ओपनएआई के मुताबिक यूजर्स इसे 4,000 से ज्यादा एप्स के साथ आसानी से जोड़ सकते हैं। इसे चैटजीपीटी के अलावा ऑफिस में काम आने वाले स्लैक और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसे प्लेटफॉर्म से भी चलाया जा सकता है। उदाहरण: मान लीजिए आपको ग्राहकों के फीडबैक पर नजर रखना है तो आप इस काम के लिए डॉट्स के लिए लगा सकते हैं। इसके अलावा सॉफ्टवेयर की गलतियां यानी बग्स ढूंढने, उन्हें ठीक करने और नए कोड की टेस्टिंग जैसे काम में भी आप डॉट्स को लगा सकते हैं। बिजनेस और कंपनियों के लिए स्पेशलिस्ट डॉट्स भी तैयार हो रहे ओपनएआई कंपनियों के लिए स्पेशलिस्ट डॉट्स बना रही है। इनकी अपनी अलग डिजिटल पहचान और क्रेडेंशियल्स होंगे। ये इनवॉइस प्रोसेसिंग, कस्टमर सपोर्ट और प्रोक्योरमेंट जैसे काम संभालेंगे। कंपनी का कहना है कि डॉट्स ऐसे कामों को भी संभाल सकता है जो समय के साथ बदलते रहते हैं। सेल्स के काम में लगा एक 'Dot' ग्राहकों की बदलती जरूरतों को ट्रैक कर सकता है, प्रपोजल अपडेट कर सकता है और अगर कहीं इंसानी दखल की जरूरत हो तो यूजर को फ्लैग भी कर सकता है। मेटा का 'म्यूज' 8 सितंबर को लॉन्च हुआ था मेटा ने 8 सितंबर को अपना पर्सनल एआई एजेंट 'म्यूज' लॉन्च किया था। यह सिस्टम यूजर की जरूरत को समझकर खुद योजना तैयार करता है और काम पूरा करता है। अगर यूजर एप बंद भी कर दे, तब भी यह बैकग्राउंड में अपना काम करता रहता है। काम पूरा होने पर या यूजर की मंजूरी की जरूरत पड़ने पर यह स्क्रीन पर नोटिफिकेशन भेज देता है। इसे ऐसे समझें: अगर आप इंस्टाग्राम पर किसी डिश को बनाने की रील या वीडियो सेव करते हैं, तो 'म्यूज' खुद समझ जाएगा कि उसमें क्या-क्या सामग्री लगेगी। इसके बाद यह आपके लिए बाजार से खरीदने वाले जरूरी सामान की पूरी लिस्ट तैयार कर देगा। इसी तरह, डिनर प्लान करते वक्त यह अपने आप ध्यान रखेगा कि आपको खाने में क्या पसंद है और क्या नहीं। चैटबॉट से अलग हैं AI एजेंट: एप बंद होने पर भी काम रहेगा जारी डॉट्स और म्यूज जैसे नए एआई एजेंट पुराने चैटबॉट्स से पूरी तरह अलग हैं। आम चैटबॉट में आपको हर सवाल टाइप करना पड़ता है और फिर उसके जवाब का इंतजार करना होता है। इसके उलट, एआई एजेंट को आप बस अपना काम बता देते हैं। इसके बाद वह पूरा काम खुद ही निपटा लेता है। इसी खूबी के कारण दोनों कंपनियों ने इन एजेंट्स के लिए क्लाउड में अलग से सुरक्षित सिस्टम तैयार किया है, ताकि ये इंटरनेट ब्राउज करने से लेकर दूसरे एप्स तक सुरक्षित तरीके से पहुंच सकें। म्यूज ने यूजर का घर का पता खरीदार को भेजा खुद काम करने वाले यानी ऑटोनॉमस एआई एजेंट जितने मददगार हैं, उनसे जुड़ा खतरा भी उतना ही बड़ा है। अगर सिस्टम से कोई चूक हो जाए, तो यूजर को नुकसान उठाना पड़ सकता है। हाल ही में टेक यूट्यूबर मैट रॉब ने बताया कि जब उन्होंने अपने फेसबुक मार्केटप्लेस का जिम्मा म्यूज को सौंपा, तो उसने बिना पूछे उनका घर का पता खरीदार को भेज दिया। म्यूज ने उनसे पूछे बिना ही कम कीमत में सौदा भी पक्का कर दिया। सुरक्षा से जुड़ी ऐसी ही चिंताओं के चलते अमेजन ने म्यूज को अपने प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक कर दिया है। गलती होने पर कानूनी जवाबदेही तय नहीं AI एजेंट्स के खुद फैसले लेने से यह विवाद खड़ा हो गया है कि किसी गड़बड़ी या नुकसान का जिम्मेदार किसे माना जाएगा। एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने भी शेयर बाजार में लिस्टिंग से जुड़े दस्तावेजों में इस पर चिंता जताई है। कंपनी के अनुसार, अभी यह साफ नहीं है कि मौजूदा कानून इन एजेंट्स पर कैसे लागू होंगे। मुख्य पेंच यह है कि एजेंट का लिया फैसला यूजर पर कानूनी तौर पर बाध्य माना जाएगा या नहीं, और इन एआई सिस्टम्स को एक प्रोडक्ट की कैटेगरी में रखा जाएगा या सर्विस में।
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