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यूपीआई के दबदबे वाले बाजार में एप्पल पे की एंट्री, आईफोन यूजर्स को मिलेगा आसान और सुरक्षित कार्ड पेमेंट का विकल्प

नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। एप्पल ने भारत में अपनी डिजिटल भुगतान सेवा एप्पल पे लॉन्च कर दी है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में एप्पल पे की एंट्री हुई है जब भारत दुनिया के सबसे उन्नत डिजिटल भुगतान बाजारों में से एक है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) देश के कुल डिजिटल भुगतान लेनदेन का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालता है।

मार्केट रिसर्च फर्म सीएमआर के इंडस्ट्री रिसर्च ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट प्रभु राम ने कहा कि एप्पल पे का भारत में लॉन्च कंपनी के हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और सेवाओं के इकोसिस्टम को और मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि एप्पल अब अपने ग्राहकों को एकीकृत और सहज भुगतान अनुभव प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

फिलहाल एप्पल पे एक्सिस बैंक द्वारा जारी वीजा और मास्टर कार्ड क्रेडिट कार्ड्स को आईफोन, आईपैड और एप्पल वॉच पर सपोर्ट करेगा। कंपनी जल्द ही मैक डिवाइसों के लिए भी यह सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बना रही है।

प्रभु राम ने कहा कि भारत के चौथे सबसे बड़े क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता एक्सिस बैंक के साथ शुरुआत एप्पल के लिए महत्वपूर्ण है। बैंक के पास लगभग 1.62 करोड़ सक्रिय क्रेडिट कार्ड हैं। वहीं देश में कुल क्रेडिट कार्ड संख्या 12.2 करोड़ से अधिक हो चुकी है और कॉन्टैक्टलेस भुगतान का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि एप्पल पे के आने से यूपीआई की स्थिति पर कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। उनके अनुसार, यूपीआई भारतीय उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के भुगतान का मुख्य आधार बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि एप्पल पे का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यह एप्पल डिवाइस इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए कार्ड भुगतान को अधिक सहज और सुविधाजनक बना देगा तथा एप्पल के इकोसिस्टम के साथ उनकी जुड़ाव को और मजबूत करेगा।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक का भी मानना है कि एप्पल पे भारतीय बाजार में कार्ड उपयोग को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने कहा कि चेकआउट के समय ओटीपी की आवश्यकता समाप्त होने से एप्पल डिवाइस उपयोगकर्ताओं के लिए भुगतान प्रक्रिया कहीं अधिक आसान हो जाएगी।

पाठक के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि आने वाले समय में कितने बड़े बैंक एप्पल पे प्लेटफॉर्म से जुड़ते हैं। यदि अधिक बैंक इसमें शामिल होते हैं तो इसके संभावित उपयोगकर्ताओं का दायरा तेजी से बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत में यूपीआई अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखेगा, लेकिन एप्पल पे से एप्पल को अपने प्रीमियम ग्राहक आधार के बीच एक बेहतर और अधिक एकीकृत भुगतान अनुभव देने का अवसर मिलेगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कोविड-19 के बाद भारत में क्रेडिट कार्ड उपयोग और एनएफसी (नियर फील्ड कम्युनिकेशन) आधारित भुगतान प्रणाली दोनों में दो अंकों की दर से वृद्धि हुई है। इसी कारण एप्पल पे को भारत में बढ़ती डिजिटल भुगतान आदतों का लाभ मिल सकता है।

कंपनी के अनुसार, एक्सिस बैंक के वीजा और मास्टर कार्ड क्रेडिट कार्ड धारक अपने कार्ड एप्पल पे में जोड़कर देशभर के हजारों ऑफलाइन और ऑनलाइन व्यापारियों के यहां भुगतान कर सकेंगे। इसके अलावा, जहां भी एनएफसी भुगतान स्वीकार किए जाते हैं, वहां एप्पल पे का उपयोग किया जा सकेगा।

एप्पल ने कहा कि यह सेवा ग्राहकों को स्टोर्स, मोबाइल ऐप्स और वेबसाइटों पर तेज, सुरक्षित और निजी भुगतान अनुभव देगी। भुगतान के समय न तो पीआईएन दर्ज करने की आवश्यकता होगी और न ही ओटीपी की जरूरत पड़ेगी, जिससे लेनदेन प्रक्रिया और अधिक सरल हो जाएगी।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Explainer:  ईरानी Dhow से पाकिस्तान तक..., समुद्र के रास्ते भारत में ड्रग्स कैसे पहुंचाते हैं तस्कर?

Indian Coast Guard Drug Seizure: अरब सागर में भारतीय तटरक्षक बल ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. कोस्ट गार्ड ने लक्षद्वीप के पश्चिम में एक ईरानी नाव से 526 किलो हेरोइन और मेथामफेटामाइन जब्त की गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जा रही है. इस पूरे ऑपरेशन में 5 पाकिस्तानी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है।

यह पूरा ऑपरेशन कैसे अंजाम दिया गया?

खुफिया जानकारी मिलने के बाद कोस्ट गार्ड ने समुद्र और हवा दोनों तरफ से निगरानी शुरू की. जांच टीम ने संदिग्ध नाव पर लगातार नजर रखी गई और आखिरकार 25 सितंबर को इसका पीछा कर इसे रोका गया. बता दें इस पूरे अभियान में गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) और एक केंद्रीय एजेंसी भी कोस्ट गार्ड के साथ शामिल रही.

जब्त की गई नाव और तस्करों का अभी क्या हुआ?

जानकारी के अनुसार नाव, उसमें सवार पांचों पाकिस्तानी क्रू मेंबर और बरामद ड्रग्स को कोस्ट गार्ड के जहाजों की निगरानी में सशस्त्र सुरक्षा के साथ मुंबई लाया गया है. यहां पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए बहु-एजेंसी जांच शुरू कर दी गई है.

तस्कर समुद्र के रास्ते 'Dhow' यानी परंपरागत नाव का इस्तेमाल ही क्यों करते हैं?

जांच एजेंसियों के अधिकारियों के अनुसार Dhow असल में लकड़ी से बनी एक पुरानी शैली की पारंपरिक नाव होती है, जिसे सदियों से अरब सागर, फारस की खाड़ी और हिंद महासागर के इलाकों में मछली पकड़ने और सामान ढोने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. तस्कर इन नावों को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि ये आम मछुआरा नावों जैसी दिखती हैं, इनमें आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम नहीं लगे होते और ये बड़े जहाजों के मुकाबले रडार की नजरों से आसानी से बच निकलती हैं. इनका इस्तेमाल दशकों से इस पूरे क्षेत्र में तस्करी के लिए होता आया है.

अरब सागर का यह रूट तस्करी के लिए इतना अहम क्यों है?

भारत का पश्चिमी समुद्री किनारा, खासकर गुजरात का तट, तथाकथित 'गोल्डन क्रीसेंट' क्षेत्र के काफी करीब पड़ता है. बता दें यह वह इलाका है जिसमें अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान शामिल हैं और दुनिया की सबसे बड़ी हेरोइन उत्पादक बेल्ट में गिना जाता है. यहां से समुद्री रास्ते के जरिए ड्रग्स की खेप पाकिस्तान के ग्वादर या कराची जैसे तटीय इलाकों से ईरानी नावों में लादकर भारतीय समुद्री सीमा की तरफ भेजी जाती है.

पाकिस्तान और ईरान का इस तस्करी नेटवर्क में क्या कनेक्शन रहा है?

बीते सालों में हुई इसी तरह की कई घटनाओं में यह पैटर्न बार-बार सामने आया है. ड्रग्स की खेप अक्सर पाकिस्तान में तैयार या इकट्ठा की जाती है, इसके बाद इसे ईरानी नावों में लादकर समुद्री रास्ते से आगे भेजा जाता है, जबकि नाव चलाने वाला क्रू पाकिस्तानी या ईरानी नागरिक होता है. बता दें यह तरीका जानबूझकर अपनाया जाता है ताकि तस्करी नेटवर्क की असली जड़ें छिपाई जा सकें और किसी एक देश पर सीधा आरोप लगाना मुश्किल हो जाए.

क्या यह गुजरात तट पर ऐसी पहली घटना है?

गुजरात का समुद्री तट लंबे समय से नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए एक संवेदनशील इलाका रहा है. बीते वर्षों में भी कोस्ट गार्ड और गुजरात ATS ने पाकिस्तानी और ईरानी नावों से कई बार भारी मात्रा में हेरोइन बरामद की है जिसमें कई बार तस्करों ने पकड़े जाने से बचने के लिए नाव में आग तक लगा दी थी. इससे साफ है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं बल्कि एक लगातार चलने वाले तस्करी नेटवर्क का हिस्सा है.

इस बार जब्त की गई खेप पहले के मुकाबले कितनी बड़ी है?

कोस्ट गार्ड के अपने रिकॉर्ड के मुताबिक अप्रैल 2025 में भी गुजरात तट के पास करीब 307.5 किलो नशीले पदार्थ जब्त किए गए थे, जिनकी कीमत 1,800 करोड़ रुपये आंकी गई थी. इस लिहाज से 526 किलो और 3000 करोड़ रुपये की यह ताजा खेप पिछले कुछ समय की सबसे बड़ी बरामदगियों में गिनी जा रही है.

जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?

फिलहाल जांच का सबसे अहम पहलू यह पता लगाना है कि इस खेप को अंतिम रूप से कहां पहुंचाया जाना था और भारत में इसका असली प्राप्तकर्ता कौन था. बीते मामलों में देखा गया है कि समुद्र में तस्कर तो पकड़े जाते हैं लेकिन जमीन पर बैठे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचना एजेंसियों के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है.

क्या कोस्ट गार्ड और ATS की भूमिका पर कोई सवाल भी उठते हैं?

ऐसे हर बड़े ऑपरेशन के बाद सुरक्षा विशेषज्ञ यह सवाल जरूर उठाते हैं कि इतने संवेदनशील समुद्री रास्ते पर बार-बार तस्करी की कोशिशें क्यों हो पाती हैं और निगरानी तंत्र को कैसे और चुस्त बनाया जा सकता है. हालांकि इसी के साथ यह भी माना जाता है कि खुफिया जानकारी के आधार पर समय रहते ऐसी बड़ी खेप को पकड़ लेना, एजेंसियों के तालमेल और तैयारियों का ही नतीजा है.

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  Sports

एशियन गेम्स में भारत का एक दिन का रिकॉर्ड: 15 पदक सबसे ज्यादा, कई दिन खाली भी रहे

भोपाल। एशियन गेम्स में भारत के पदक सफर की चर्चा अक्सर पूरे टूर्नामेंट की मेडल टैली के आधार पर होती है, लेकिन एक दिन में सबसे ज्यादा और सबसे कम पदक जीतने का आंकड़ा भी दिलचस्प है। भारत का एक दिन में सर्वाधिक पदक जीतने का रिकॉर्ड 15 है, जो 1 अक्टूबर 2023 को हांगझोउ एशियन गेम्स में बना था। इसके उलट जिन दिनों भारतीय खिलाड़ियों के किसी पदक मुकाबले का फैसला नहीं हुआ, उन दिनों भारत का खाता शून्य पदक पर भी रहा है।

1 अक्टूबर 2023: एक दिन में 15 पदक का रिकॉर्ड

हांगझोउ एशियन गेम्स में 1 अक्टूबर 2023 भारत के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। प्रतियोगिता के आठवें दिन भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में कुल 15 पदक जीते। इसमें 3 स्वर्ण, 7 रजत और 5 कांस्य शामिल थे। यह एशियन गेम्स के इतिहास में भारत का एक दिन का सबसे बड़ा पदक प्रदर्शन है। इस दिन एथलेटिक्स भारत के लिए सबसे बड़ा पदक स्रोत रहा और अकेले एथलेटिक्स में 9 पदक आए।

रिकॉर्ड दिन पर किन खिलाड़ियों ने दिलाए पदक?

1 अक्टूबर 2023 को भारत के खाते में आए 15 पदकों में एथलेटिक्स, शूटिंग, गोल्फ और बैडमिंटन समेत कई खेलों का योगदान रहा।

स्वर्ण पदक

  • अविनाश साबले - पुरुष 3000 मीटर स्टीपलचेज
  • तजिंदरपाल सिंह तूर - पुरुष शॉटपुट
  • पुरुष ट्रैप टीम - शूटिंग

रजत पदक

  • मुरली श्रीशंकर - पुरुष लंबी कूद
  • अजय कुमार सरोज - पुरुष 1500 मीटर
  • हरमिलन बैंस - महिला 1500 मीटर
  • ज्योति याराजी - महिला 100 मीटर बाधा दौड़
  • अदिति अशोक - महिला गोल्फ
  • महिला ट्रैप टीम - शूटिंग
  • भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम

कांस्य पदक

  • निखत जरीन - बॉक्सिंग
  • नंदिनी अगासरा - हेप्टाथलॉन
  • जिंसन जॉनसन - पुरुष 1500 मीटर
  • सीमा पूनिया - डिस्कस थ्रो
  • कायनान डेरियस - पुरुष ट्रैप

इस तरह एक ही दिन में 3 गोल्ड, 7 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज मिलाकर कुल 15 पदक भारत के खाते में आए।

एथलेटिक्स बना रिकॉर्ड दिन का सबसे बड़ा आधार

इस रिकॉर्ड प्रदर्शन में एथलेटिक्स की सबसे बड़ी भूमिका रही। भारत ने ट्रैक एंड फील्ड में कुल 9 पदक जीते। अविनाश साबले ने पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज में स्वर्ण जीता, जबकि तजिंदरपाल सिंह तूर ने शॉटपुट में अपना खिताब बरकरार रखा। मुरली श्रीशंकर ने लंबी कूद में रजत, अजय कुमार सरोज और हरमिलन बैंस ने 1500 मीटर में रजत जीते। ज्योति याराजी ने 100 मीटर बाधा दौड़ में रजत हासिल किया। हेप्टाथलॉन में नंदिनी अगासरा और 1500 मीटर में जिंसन जॉनसन ने कांस्य जीता।

सबसे कम पदक: शून्य भी हो सकता है एक दिन का आंकड़ा

एक दिन में भारत के सबसे कम पदकों की बात करें तो इसका सीधा आंकड़ा 0 है। हालांकि, इसे किसी एक आधिकारिक “सबसे खराब दिन” के रिकॉर्ड के तौर पर देखना सही नहीं होगा। एशियन गेम्स में सभी खेलों के फाइनल रोज नहीं होते। कई दिन ऐसे होते हैं जब भारतीय खिलाड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा तो लेते हैं, लेकिन किसी पदक मुकाबले का फैसला उस दिन नहीं होता। ऐसी स्थिति में भारत की उस दिन की पदक संख्या शून्य रहती है। इसलिए 15 पदक एक स्पष्ट ऐतिहासिक एकदिनी रिकॉर्ड है, जबकि 0 पदक किसी एक विशिष्ट रिकॉर्ड वाले दिन के बजाय प्रतियोगिता की प्रकृति के कारण होने वाला न्यूनतम दैनिक आंकड़ा है।

2026 में 29 सितंबर को आए 8 पदक

जारी आइची-नागोया एशियन गेम्स में भी 29 सितंबर भारत के लिए पदकों से भरा दिन रहा। भारत ने उस दिन 8 पदक जीते। इनमें 2 स्वर्ण, 1 रजत और 5 कांस्य शामिल रहे। इसके साथ भारत ने 50 पदकों का आंकड़ा पार किया। 29 सितंबर को भारत के स्वर्ण पदक महिला 4x400 मीटर रिले टीम और निशानेबाज नीरू ढांडा ने जीते। नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण हासिल किया। इसके अलावा महिला ट्रैप टीम ने रजत पदक जीता। एथलेटिक्स में पूजा सिंह, मिश्रित 4x100 मीटर रिले टीम, गुलवीर सिंह और पुरुष 4x400 मीटर रिले टीम ने कांस्य पदक जीते। बॉक्सिंग में नरेंद्र बरवाल ने भी कांस्य हासिल किया।

2026 की स्थिति क्यों अलग है?

2026 के एशियन गेम्स अभी जारी हैं। 29 सितंबर के खेल खत्म होने के बाद भारत के खाते में 52 पदक—6 स्वर्ण, 21 रजत और 25 कांस्य थे। 30 सितंबर की अपडेट में अलग-अलग स्रोतों पर पदक संख्या आगे बढ़ चुकी है, इसलिए जारी प्रतियोगिता में आंकड़ा लगातार बदल रहा है। इस वजह से 2026 की तुलना 2023 के अंतिम 107 पदकों से अभी करना उचित नहीं होगा। 2023 का अभियान पूरा होने के बाद भारत ने 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य समेत 107 पदक जीते थे।

भारत के एक दिन के पदक प्रदर्शन को ऐसे समझें

स्थिति    पदक    उदाहरण

  • अब तक का सर्वाधिक एकदिनी प्रदर्शन    15    1 अक्टूबर 2023, हांगझोउ
  • 2026 में एक दिन का बड़ा प्रदर्शन    8    29 सितंबर 2026
  • न्यूनतम संभव दैनिक आंकड़ा    0    जब किसी भारतीय पदक मुकाबले का फैसला न हो
  • 2023 का कुल रिकॉर्ड    107    पूरे हांगझोउ एशियन गेम्स

15 पदक वाला दिन क्यों खास था?

  • 1 अक्टूबर 2023 का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि 15 पदक एक ही दिन के अलग-अलग खेलों से आए थे। इसमें एथलेटिक्स ने अकेले 9 पदक दिए, जबकि शूटिंग, गोल्फ और बैडमिंटन ने भी भारत की पदक संख्या बढ़ाई।
  • इस एक दिन के प्रदर्शन ने भारत को उस समय प्रतियोगिता में 50 से ज्यादा पदकों के आंकड़े तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई थी। बाद में भारत ने हांगझोउ में कुल 107 पदकों के साथ अपना उस समय तक का सर्वश्रेष्ठ एशियन गेम्स प्रदर्शन पूरा किया।

2026 में 15 पदक के रिकॉर्ड पर नजर

आइची-नागोया एशियन गेम्स में भारत के पास अभी कई स्पर्धाओं में पदक जीतने के मौके हैं। 29 सितंबर को मिले 8 पदकों ने एक दिन में ज्यादा पदक जीतने की दौड़ को फिर चर्चा में ला दिया है, लेकिन 15 पदकों का 2023 वाला रिकॉर्ड अभी बरकरार है। एशियन गेम्स के बाकी दिनों में भारत कितने पदक जीतता है, यह अलग-अलग स्पर्धाओं के फाइनल और भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। प्रतियोगिता पूरी होने के बाद ही 2026 के कुल प्रदर्शन की 2023 के 107 पदकों से अंतिम तुलना की जा सकेगी।

Wed, 30 Sep 2026 14:55:13 +0530

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