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CEC Gyanesh Kumar के घर पर कालिख पोतने के मामले में छह Congress कार्यकर्ता गिरफ्तार

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आवास को कथित रूप से विरूपति करने के मामले में करीब 20 कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ हत्या के प्रयास, गंभीर चोट पहुंचाने और दंगा करने के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया है और इनमें से छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह कार्रवाई सोमवार को विजय नगर इलाके में कुमार के आवास के बाहर हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद की गई।

आरोप है कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने वहां से जाने से पहले घर के गेट और दीवार पर काले रंग से नारे लिखे। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों में कांग्रेस नेता अनिल यादव, मुकेश धांगर, मनोज गौड़, राजेश कुमार, राजा गौतम और पंकज चौधरी शामिल हैं और मंगलवार को उन्हें जेल भेज दिया गया। उप निरीक्षक गौरव गुप्ता की लिखित शिकायत के आधार पर हरिपर्वत थाने में आठ नामजद और 15-20 अज्ञात कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 (हत्या का प्रयास), धारा 121 (सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना) , धारा 126 (गलत तरीके से रोकना), धारा 132 (सरकारी कर्मचारी पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), धारा 191 (गैरकानूनी जमावड़े द्वारा बल या हिंसा का इस्तेमाल करते हुए दंगा करना), धारा 333 (चोट पहुंचाने, हमला करने या गलत तरीके से रोकने की तैयारी के बाद घर में अनधिकृत प्रवेश), धारा 351(2) (आपराधिक धमकी), धारा 352 (शांति भंग करने के लिए उकसाने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। कांग्रेस के शहर अध्यक्ष अमित सिंह ने कहा कि मामला केवल विरोध-प्रदर्शन से संबंधित धाराओं तक सीमित रहना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने कार्यकर्ताओं के खिलाफ कई ‘गलत’ धाराएं लगा दी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को पुलिस आयुक्त से मुलाकात करेगा और कथित झूठे आरोपों को हटाने की मांग करेगा।

यह घटना ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के राज्यव्यापी आंदोलन के दौरान हुई थी।

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Iran ने खोल दी UN की पोल! Sholay के Thakur वाला मीम बनाकर उड़ाया संयुक्त राष्ट्र का मजाक

भारत में ईरानी दूतावास ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर तीखा तंज कसते हुए बॉलीवुड की लोकप्रिय फिल्म ‘शोले’ के ठाकुर का सहारा लिया है। दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए एक मीम में संयुक्त राष्ट्र की कागजी ताकत और वास्तविक परिस्थितियों में उसकी सीमित कार्रवाई के बीच अंतर दिखाने की कोशिश की। देखा जाये तो यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव और सैन्य संघर्ष के बीच संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मीम के पहले हिस्से में बहु-बाहों वाले काल्पनिक पात्र डॉक्टर स्ट्रेंज को दिखाया गया है और उसके साथ लिखा है— “स्कूल की किताबों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र।” इसके जरिए एक ऐसे वैश्विक संगठन की तस्वीर पेश की गई है जिसके पास अंतरराष्ट्रीय संकटों से निपटने के लिए अनेक साधन और अधिकार हैं। दूसरे हिस्से में 1975 की चर्चित फिल्म ‘शोले’ के ठाकुर बलदेव सिंह का चित्र है, जिसकी भूमिका संजीव कुमार ने निभाई थी। फिल्म में गब्बर सिंह द्वारा ठाकुर के दोनों हाथ काट दिए जाते हैं। इसी तस्वीर के नीचे लिखा गया है, “हकीकत में संयुक्त राष्ट्र।” ईरान का संकेत साफ था कि उसके अनुसार वैश्विक संस्था के पास अधिकार तो हैं, लेकिन निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता सीमित हो गई है।

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देखा जाये तो ईरान की यह नाराजगी केवल व्यंग्य तक सीमित नहीं है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान महासचिव अंतोनियो गुतारेस से मुलाकात में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ ईरान के आरोपों को दोहराया। ईरान ने कहा कि अमेरिका और इजराइल की कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन हैं। अराघची ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्यों में शामिल ईरान को उम्मीद है कि संगठन और उसके सदस्य ऐसे कथित उल्लंघनों पर चुप नहीं रहेंगे। उन्होंने अमेरिका की कथित हस्तक्षेपकारी कार्रवाइयों और ईरान के खिलाफ कथित “अवैध धमकियों” की स्पष्ट निंदा की मांग भी की।

हम आपको यह भी बता दें कि ईरानी पक्ष ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। तेहरान का आरोप है कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य अमेरिका की कार्रवाइयों के सामने संगठन प्रभावी प्रतिक्रिया देने में असफल रहा है। दूसरी ओर, गुतारेस ने बैठक में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के उल्लंघन, विशेषकर शक्तिशाली देशों द्वारा बल प्रयोग, पर चिंता जताई और सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून तथा कूटनीति के रास्ते विवाद सुलझाने का आग्रह किया।

देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम में ईरान की सोशल मीडिया आधारित कूटनीति भी चर्चा में है। ईरानी दूतावास पहले भी अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर व्यंग्य करने के लिए मीम, लोकप्रिय संस्कृति और हास्य का इस्तेमाल करते रहे हैं। ‘शोले’ के ठाकुर का चुनाव खास तौर पर भारत के दर्शकों के लिए संदेश को अधिक परिचित और प्रभावी बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र की आलोचना केवल ईरान तक सीमित नहीं है। ट्रंप भी लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र की संघर्षों को सुलझाने की क्षमता पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में ईरान का यह मीम पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष से आगे बढ़कर उस बड़े सवाल को सामने रखता है कि जब वैश्विक शक्तियां सीधे किसी विवाद में शामिल हों, तब संयुक्त राष्ट्र अपने चार्टर में निर्धारित शांति और सुरक्षा की भूमिका को वास्तव में कितनी प्रभावी ढंग से निभा सकता है।

दूसरी ओर, ईरान-अमेरिका संघर्ष पर ताजा रिपोर्टों की बात करें तो आपको बता दें कि युद्धविराम को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं, लेकिन स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान को अमेरिका की ओर से उसके सात दिन के युद्धविराम प्रस्ताव पर औपचारिक जवाब मिलने की उम्मीद है। इस प्रस्ताव में युद्धविराम के साथ चरणबद्ध तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की योजना शामिल है। अराघची के अनुसार यह प्रस्ताव कतर के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माना है कि हाल के दिनों में मध्यस्थों के जरिए अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई है, लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को कोई रियायत देने की पेशकश नहीं की है। वहीं ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति युद्ध और बातचीत के बीच “उलझे” हुए हैं। हालांकि ट्रंप पहले ही ईरान के सात सूत्रीय प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से खारिज कर चुके हैं, इसलिए आगे की बातचीत पर अनिश्चितता बनी हुई है।

इसी बीच, अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी सैन्य आपूर्ति तंत्र की कथित मदद करने वाले ईरान, चीन के बीजिंग, हांगकांग और पाकिस्तान से जुड़े दस व्यक्तियों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। ये कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के “ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट” के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य और आर्थिक आपूर्ति श्रृंखला को कमजोर करना है। दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने का असर अब क्षेत्रीय ऊर्जा व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। इराक ने ईंधन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सीरिया के बनियास बंदरगाह के रास्ते पेट्रोल मंगाना शुरू कर दिया है। युद्ध से पहले दुनिया के व्यापारिक तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता था। जलडमरूमध्य बंद होने से ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ा है और कई देश वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग तलाश रहे हैं। इस तरह एक ओर युद्धविराम के लिए पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी ओर प्रतिबंध, सैन्य दबाव और ऊर्जा संकट ने अमेरिका-ईरान संघर्ष को और जटिल बना दिया है।

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