एशियन गेम्स में मनु भाकर का सफर बिना मेडल खत्म:10 मीटर में 5वें स्थान पर रहीं; पिता बोले- 4-5 घंटे करना पड़ा सफर
झज्जर के गोरिया गांव की बेटी और भारत की स्टार शूटर मनु भाकर का एशियन गेम्स 2026 में सफर बिना पदक के खत्म हो गया। ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के बाद मनु से इस प्रतियोगिता में भी पदक की उम्मीद थी। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल के व्यक्तिगत और टीम इवेंट में हिस्सा लिया, लेकिन इस बार वह पदक अपने नाम नहीं कर सकीं। मनु भाकर को उनकी शानदार उपलब्धियों के चलते देश में गोल्डन गर्ल के नाम से जाना जाता है। एशियन गेम्स में उनके प्रदर्शन पर झज्जर समेत पूरे देश की नजर थी। हालांकि, प्रतियोगिता में मनु का अभियान मेडल के बिना ही समाप्त हो गया। दादी की यादों के साथ प्रतियोगिता में उतरीं मनु मनु के लिए यह एशियन गेम्स भावनात्मक रूप से भी चुनौतीपूर्ण रहा। दादी का देहांत के बाद रस्म क्रिया से पहले ही मनु एशियन गेम्स में हिस्सा लेने पहुंच गई थीं। परिवार में शोक के इस दौर के बीच उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी और दादी की यादों के साथ भारत के लिए शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। परिवार में दुख का माहौल था, तो दूसरी तरफ मनु के सामने देश के लिए प्रदर्शन करने की चुनौती थी। उन्होंने इस भावनात्मक परिस्थिति के बीच प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। दादी के निधन से कुछ दिन पहले ही मनु के कोच जसपाल राणा का भी देहांत हुआ था। 6 सितंबर के बाद X पर भी कोई पोस्ट नहीं मनु भाकर की सोशल मीडिया गतिविधि भी इस दौरान चर्चा में है। मनु के X अकाउंट पर 16 सितंबर के बाद कोई नया पोस्ट नजर नहीं आया है। एशियन गेम्स के दौरान भी उनके अकाउंट से कोई नियमित पोस्ट सामने नहीं आया। मनु के लिए चुनौतीपूर्ण रहा समय ऐसे में दादी के निधन के बाद परिवार से जुड़ा भावनात्मक दौर और फिर एशियन गेम्स की तैयारियां—मनु के लिए यह समय कितना चुनौतीपूर्ण रहा होगा, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है। हालांकि, सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करने की वजह मनु ने सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है, इसलिए इसके कारण को लेकर किसी तरह का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। पदक की उम्मीद थी, मेडल नहीं आया ओलंपिक में अपनी पहचान बना चुकीं मनु भाकर से एशियन गेम्स में भी पदक की उम्मीद की जा रही थी। उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल के व्यक्तिगत और टीम इवेंट में चुनौती पेश की। 10 मीटर एयर पिस्टल के व्यक्तिगत फाइनल में मनु पांचवें स्थान पर रहीं। वहीं 25 मीटर पिस्टल में भी वह पदक की दौड़ में आगे नहीं बढ़ सकीं। टीम इवेंट में भी भारतीय टीम पदक हासिल नहीं कर सकी। पिता राम किशन ने व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल मनु के मेडल से चूकने के बाद उनके पिता राम किशन भाकर ने एशियन गेम्स में शूटिंग इवेंट की व्यवस्थाओं और खिलाड़ियों के ट्रेवल को लेकर सवाल खड़े किए हैं। राम किशन भाकर ने कहा कि शूटिंग रेंज नागोया शहर से काफी दूर थी। खिलाड़ियों को रोजाना आने-जाने में करीब 4-5 घंटे का समय लग रहा था। उन्होंने बसों के समय को लेकर भी परेशानी का जिक्र किया। नाले की बदबू के बीच शूटिंग कर रहे थे खिलाड़ी राम किशन भाकर ने शूटिंग रेंज के आसपास के माहौल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वहां नाले की बदबू आती थी और खिलाड़ी ऐसे वातावरण में शूटिंग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर जापान इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करना चाहता है तो खिलाड़ियों के लिए बेहतर व्यवस्था करनी चाहिए। उनका कहना था कि खिलाड़ियों का इतना समय आने-जाने में नहीं जाना चाहिए। बेटी से आगे भी बड़ी उम्मीदें एशियन गेम्स में इस बार मनु भाकर पदक नहीं जीत सकीं, लेकिन ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतकर इतिहास रच चुकीं गोरिया गांव की इस बेटी की पहचान देश की स्टार निशानेबाज के रूप में कायम है। एक तरफ एशियन गेम्स में मेडल नहीं आने से उनके प्रदर्शन पर चर्चा है, वहीं दूसरी तरफ उनके पिता की ओर से आयोजन व्यवस्था पर उठाए गए सवाल भी सुर्खियों में हैं। इस पूरे सफर में मनु ने पारिवारिक दुख के बीच दादी की यादों को साथ लेकर भारत का प्रतिनिधित्व किया।
ईरान ने अमेरिकियों से कहा- ट्रम्प भरोसे के लायक नहीं:मिडटर्म चुनाव से पहले सही फैसला लेने को कहा; परमाणु हथियार बनाने के दावे से भी इंकार
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी वोटरों के नाम 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी की है। इसमें अमेरिकी जनता से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों को खारिज करने की अपील की गई है। यह भी कहा गया है कि ट्रम्प भरोसे लायक नहीं हैं। IRGC की यह चिट्ठी अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले सामने आई है। IRGC ने यह भी कहा है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा। ट्रम्प पर अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने ट्रम्प पर झूठ बोलने और अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों की जिंदगी ऐसे व्यक्ति के हाथ में है, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मोहेब्बी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि यह चिट्ठी अमेरिकी सरकार की नीति बदल देगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिकी जनता को ईरान युद्ध से जुड़ी ज्यादा जानकारी मिले तो वह अलग फैसले ले सकती है। ट्रम्प ने UN में ईरान को खत्म करने की धमकी दी थी अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा। होर्मुज को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी दावों पर भी सवाल उठाए। मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने कुछ तेल टैंकरों को ही इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है। उनके मुताबिक, इससे यह साबित नहीं होता कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है। मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान की अमेरिकी वोटरों से सीधी अपील अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होते हैं। इनमें अमेरिकी लोग संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों - हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं। इन चुनावों से यह तय होता है कि अगले दो साल में अमेरिकी संसद में किस पार्टी की ताकत कितनी रहेगी। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने इसी चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले अमेरिकी जनता के नाम 25 पेज की चिट्ठी जारी की है। इसमें अमेरिकी वोटरों से ट्रम्प प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाने को कहा गया है। पत्र में IRGC ने यह भी कहा अमेरिका युद्ध में अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया IRGC का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका-इजराइल के सत्ता परिवर्तन, परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने जैसे लक्ष्य पूरे नहीं हुए। 'डेथ टू अमेरिका' अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं पत्र में कहा गया कि डेथ टू अमेरिका का नारा अमेरिकी शासक वर्ग और व्हाइट हाउस के खिलाफ है, आम अमेरिकियों के खिलाफ नहीं है। अमेरिका से सैन्य दखल कम करने की मांग IRGC ने अमेरिकी जनता से इजराइल को समर्थन और क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करने की अपील की है। हैनोई हन्ना की तरह अमेरिकी जनता तक पहुंचने की कोशिश ईरान का अमेरिकी लोगों तक सीधे पहुंचने का तरीका नया नहीं है। वियतनाम युद्ध के दौरान त्रिन्ह थी न्गो नाम की वियतनामी रेडियो प्रसारक अंग्रेजी में अमेरिकी सैनिकों के लिए कार्यक्रम करती थीं। उन्हें ‘हैनोई हन्ना’ कहा जाता था। वह अपने कार्यक्रमों में युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका में हो रहे युद्ध-विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करती थीं। अब ईरान भी कुछ इसी तरह सीधे अमेरिकी जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची अमेरिका से जारी युद्ध के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से ज्यादा हो गई। यानी एक तरफ ईरान अमेरिकी लोगों से ट्रम्प सरकार की युद्ध नीति का विरोध करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का असर उसकी अपनी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है।
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