AIBE 22 Notification 2026: एआईबीई के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, ऐसे करें आवेदन
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन यानी AIBE 22 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवार BCI की आधिकारिक वेबसाइट allindiabarexamination.com पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
AIBE 22 के लिए आवेदन प्रक्रिया 19 अगस्त 2026 से शुरू हुई थी। उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन करने के लिए 28 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया गया है। परीक्षा का आयोजन 29 नवंबर 2026 को किया जाएगा।
घर बैठे ऐसे करें AIBE 22 के लिए आवेदन
उम्मीदवार AIBE 22 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं।
- सबसे पहले BCI की आधिकारिक वेबसाइट allindiabarexamination.com पर जाएं।
- वेबसाइट पर दिए गए Online Registration सेक्शन पर क्लिक करें।
- अब मांगी गई सभी जरूरी जानकारी ध्यानपूर्वक दर्ज करें।
- आवेदन फॉर्म में आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करें।
- आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद फॉर्म को सबमिट करें।
- भविष्य की जरूरत के लिए आवेदन फॉर्म का प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें।
AIBE 22 Exam Pattern
AIBE 22 परीक्षा में उम्मीदवारों से विभिन्न कानून विषयों से 100 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) पूछे जाएंगे। परीक्षा में संवैधानिक कानून, आईपीसी/भारतीय न्याय संहिता, सीपीसी, पारिवारिक कानून, प्रशासनिक कानून, कंपनी कानून, पर्यावरण कानून और साइबर कानून सहित अन्य विषय शामिल होंगे।
कब जारी होगा AIBE 22 Admit Card?
AIBE 22 परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड 14 नवंबर 2026 को जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। उम्मीदवार एडमिट कार्ड जारी होने के बाद BCI की आधिकारिक वेबसाइट allindiabarexamination.com पर जाकर उसे डाउनलोड कर सकेंगे।
AIBE 22 की महत्वपूर्ण तारीखें
आवेदन शुरू: 19 अगस्त 2026
आवेदन की अंतिम तारीख: 28 अक्टूबर 2026
एडमिट कार्ड: 14 नवंबर 2026
परीक्षा: 29 नवंबर 2026
उम्मीदवारों को सलाह है कि आवेदन करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नोटिफिकेशन और दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ लें।
NCERT Class 9 History: नई किताब में जुड़ेंगी भारतीय शासकों की कहानियां, जानें क्या हुए बदलाव
NCERT Class 9 New Book: कक्षा 9 के छात्रों के लिए Social Science की नई किताब में इतिहास का एक नया अध्याय शामिल किया गया है। ‘Resistance and Resilience’ नाम का यह अध्याय 1000 से 1700 ईस्वी के बीच के भारतीय इतिहास पर केंद्रित है। इसमें आक्रमणों और सत्ता संघर्षों के साथ उन भारतीय शासकों, राज्यों और समुदायों का भी उल्लेख है, जिन्होंने अलग-अलग दौर में प्रतिरोध किया। NCERT के आधिकारिक सिलेबस में इस अध्याय के तहत प्रतिरोध, गठबंधन और संघों के जरिए संप्रभुता की रक्षा, क्षेत्रीय राज्यों का योगदान, कला-संस्कृति, भक्ति परंपरा और किलेबंदी जैसे विषय शामिल किए गए हैं।
कक्षा 9 की नई किताब में क्या बदला?
कक्षा 9 Social Science की संशोधित किताब ‘Understanding Society: India and Beyond – Part 2’ में इतिहास के हिस्से में नया अध्याय जोड़ा गया है। इसका नाम ‘Resistance and Resilience (1000–1700 CE)’ है। नई किताब में इस अध्याय के जरिए करीब सात शताब्दियों के दौरान भारत में हुए राजनीतिक बदलावों, संघर्षों और अलग-अलग क्षेत्रों में हुए प्रतिरोध को समझाने की कोशिश की गई है।
NCERT के सिलेबस के मुताबिक अध्याय की शुरुआत ‘Safeguarding Sovereignty: Resistance, Alliances and Confederacies’ यानी संप्रभुता की रक्षा, प्रतिरोध, गठबंधन और संघों से होती है। इसके अलावा क्षेत्रीय राज्यों की राजनीतिक और सैन्य भूमिका, कला एवं वास्तुकला, भाषाओं और साहित्य, भक्ति परंपरा, किले और किलेबंदी तथा भारतीय अर्थव्यवस्था और राज्यों के विस्तार को भी इसमें जगह दी गई है।
1000 से 1700 ईस्वी तक का दौर
नए अध्याय का घोषित दायरा 1000 से 1700 ईस्वी तक है। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों में सत्ता संघर्ष और बाहरी आक्रमणों के सामने स्थानीय शासकों एवं समुदायों की प्रतिक्रियाओं को शामिल किया गया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अध्याय में अरब और तुर्की सेनाओं के साथ हुए संघर्षों के अलावा दक्कन, मालवा, कश्मीर और राजस्थान सहित अलग-अलग क्षेत्रों में हुए प्रतिरोध का भी उल्लेख है।
रानी नायकी देवी का भी जिक्र
इस अध्याय में चालुक्य/चौलुक्य शासक रानी नायकी देवी का प्रसंग भी शामिल है। किताब के अनुसार, 1178 में उन्होंने माउंट आबू के पास कसाहरदा में मुहम्मद गौरी को पराजित किया था। यह प्रसंग उन महिला शासकों की भूमिका को भी सामने लाता है, जिनका उल्लेख इस नए अध्याय में किया गया है। अध्याय में रानी नायकी देवी के अलावा उल्लाल की रानी अब्बक्का चौटा और काकतीय शासक रुद्रमादेवी जैसे नामों का भी उल्लेख है।
सिर्फ युद्ध और आक्रमण की कहानी नहीं
इस नए अध्याय की खास बात यह है कि इसका फोकस केवल युद्धों और सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं है। NCERT के सिलेबस में प्रतिरोध के साथ गठबंधन, कूटनीति, क्षेत्रीय शक्तियों, संस्कृति, भक्ति परंपरा और आर्थिक विस्तार जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया है।
यानी छात्रों को इस दौर को केवल ‘कौन आया और किसने किसे हराया’ के नजरिए से नहीं, बल्कि अलग-अलग भारतीय क्षेत्रों और समुदायों की भूमिका के साथ समझने का अवसर मिलेगा।
‘Resistance’ के साथ ‘Resilience’ क्यों?
अध्याय के नाम में दो शब्द हैं—Resistance और Resilience। Resistance यानी प्रतिरोध, जबकि Resilience का अर्थ कठिन परिस्थितियों के बावजूद टिके रहना और परिस्थितियों के अनुसार खुद को संभालना है।
NCERT के आधिकारिक सिलेबस में भी इस दौर को क्षेत्रीय राज्यों और समुदायों की बदलती राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप प्रतिक्रिया और अनुकूलन के संदर्भ में पढ़ाने का उद्देश्य रखा गया है।
कक्षा 9 के छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
इस बदलाव के बाद कक्षा 9 के Social Science छात्रों को 1000 से 1700 ईस्वी के इतिहास को एक नए अध्याय के जरिए पढ़ना होगा। ‘Resistance and Resilience’ में प्रतिरोध के साथ-साथ क्षेत्रीय शक्तियों के विकास, कला-संस्कृति, भक्ति परंपरा और किलेबंदी जैसे विषय भी पढ़ाए जाएंगे।
रिपोर्टों के मुताबिक संशोधित किताब में अध्यायों के पुनर्गठन के तहत ‘India and the World’ से जुड़े हिस्से को कक्षा 10 की ओर स्थानांतरित किया गया है। NCERT ने पाठ्यक्रम में इन बदलावों को छात्रों की उम्र और सीखने की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम को अधिक व्यवस्थित बनाने से जोड़ा है।
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