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Rahul Gandhi पर बयान देना पड़ा भारी? शकील अहमद का आरोप- मेरे घर पर हमले की रची गई थी साजिश

कांग्रेस से पाला बदलने वाले शकील अहमद के घर के बाहर बिहार पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। अहमद ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने युवा कांग्रेस नेताओं को पटना और मधुबनी स्थित उनके आवासों पर हमला करने का निर्देश दिया है। यह घटना अहमद द्वारा सोमवार को किए गए एक व्हाट्सएप पोस्ट के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि कांग्रेस के सहयोगियों ने उन्हें "गुप्त रूप से सूचित" किया था कि 27 जनवरी को पटना और मधुबनी स्थित उनके आवासों पर हमले की योजना बनाई गई है। बाद में उन्होंने कथित योजनाओं के सबूत के तौर पर व्हाट्सएप संदेशों के स्क्रीनशॉट साझा किए।
 

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इससे पहले, अहमद ने मंगलवार को एएनआई से भी इस स्थिति के बारे में बात की और लोकसभा विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व केवल राहुल गांधी तक ही सीमित है, जिसका अर्थ है कि उन्हीं का पूर्ण नियंत्रण है। अपने व्हाट्सएप पोस्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मैंने लिखा था कि कांग्रेस के कुछ सहयोगियों ने मुझे गुप्त रूप से सूचित किया है कि कल मधुबनी और पटना स्थित मेरे घर पर हमला होगा।

अहमद ने दावा किया कि कथित हमले की योजना राहुल गांधी के बारे में उनके बयान से उपजी थी। उन्होंने गांधी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कई नेता उनके बारे में नियमित रूप से बयान देते हैं। उन्होंने कहा कि अमित शाह जी हर दिन राहुल गांधी के बारे में बयान देते हैं। आप उन पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं देते? मैं तो कांग्रेस में भी नहीं हूँ। कांग्रेस के बारे में अपना रुख स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि वह शुभचिंतक हैं, शत्रु नहीं, क्योंकि उन्होंने किसी अन्य पार्टी में शामिल न होने का संकल्प लिया है और मृत्यु से पहले उनका अंतिम वोट भी कांग्रेस को ही जाएगा।
 

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यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस से हाल ही में अलग हुए शकील अहमद ने राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए उन पर वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करने और पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। 

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Trump का जासूस निकला जिनपिंग का करीबी! परमाणु हथियारों से जुड़ा डेटा अमेरिका को किया लीक

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दो सबसे ताकतवर और करीबी और भरोसेमंद आर्मी जनरल्स अमेरिका के लिए जासूसी कर रहे थे और इन दोनों जनरल्स का नाम जांग यूशिया और ल्यू झेनली है। यह दोनों ही शी जिनपिंग के बहुत करीबी माने जाते हैं। 75 वर्ष के जनरल यूशिया चीन की सबसे बड़ी और सबसे ताकतवर सैन्य संस्था सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के उपाध्यक्ष हैं। यानी दूसरे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हैं। पहले नंबर पर सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हैं खुद शी जिनपिंग जो कि इस संस्था के चेयरमैन हैं और जो वाइस चेयरमैन हैं वो जांग योशिया ये जनरल युसिया जो हैं ये चीन के साथ गद्दारी कर रहे थे। चीन की हर एक सेना का कमांड और कंट्रोल इसी सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के पास होता है। जनरल ल्यू जेनली भी सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में चीफ ऑफ स्टाफ यानी एक बहुत बड़े अधिकारी थे। जनरल यूशिया और शी जिनपिंग जो चीन के राष्ट्रपति हैं। यह दोनों बहुत करीबी दोस्त थे। यानी एक दोस्त ने ही दूसरे दोस्त के साथ गद्दारी की और एक दोस्त ने शी जिनपिंग का तख्ता पलट करने की कोशिश की। 

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क्या है पूरा मामला

आरोप यह है कि इन दोनों जनरल्स ने चीन के परमाणु हथियारों से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण डाटा अमेरिका को लीक कर दिया। अमेरिका को दे दिया। और यह दावा खुद अमेरिका के ही एक एक अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने किया है। सवाल यह है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इतने खास इतने गहरे दोस्त इस जनरल पर परमाणु जानकारी लीक करने का आरोप कैसे लगा? दरअसल, 24 जनवरी को एक बंद कमरे में चीन की सेना के जो बड़े-बड़े जनरल्स थे उनकी एक हाई लेवल मीटिंग हुई और वहीं पर पहली बार यह आरोप लगाया गया। इसके कुछ ही घंटों के बाद चीन के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर दिया जिसमें जनरल यूशिया पर राष्ट्रीय कानून और पार्टी के अनुशासन को तोड़ने का इसका उल्लंघन करने का शक जताया गया और ल्यू जेन ली के खिलाफ भी एक और जांच इस समय चल रही है। इससे पहले 19 जनवरी को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉरपोरेशन के पूर्व जनरल मैनेजर के खिलाफ भी ऐसे ही जांच शुरू करवाई थी और सीएनएसी पर चाइना के नागरिक और सैन्य परमाणु कार्यक्रम की पूरी जिम्मेदारी होती है। इस इन्वेस्टिगेशन के दौरान कुछ ऐसे सबूत मिले जिसके बाद जांच की जो सुई है वो जनरल युक्सिया तक भी पहुंच गई और इस जनरल पर अमेरिका को परमाणु हथियारों की जानकारी लीक करने के अलावा तीन और बड़े आरोप लगाए गए हैं। 

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क्या थे आरोप

पहला चीन की सेना के लिए हथियारों की खरीद से जुड़ी गोपनीय जानकारी अमेरिका को दे दी गई। दूसरा चीन की सेना में बड़े पदों के बदले रिश्वत ली गई। बड़े पदों पर जो अपॉइंटमेंट होती है उसके बदले रिश्वत खाई गई और सेना के अंदर गुटबाजी पैदा की गई और तीसरा चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में फूट डालने की कोशिश का भी आरोप इन पर लगा है। द वॉल स्ट्रीट जनरल ने यह दावा किया है कि इस जनरल ने चीन की सेना के एक अधिकारी को रक्षा मंत्री बनाने के बदले पैसा लिया। यह भी दावा है कि जनरल यूशिया राष्ट्रपति शी जिनपिंग का तख्ता पलट करना चाहते थे और शी जिनपिंग को हटाने की तैयारी कर रहे थे और 22 दिसंबर को यह दोनों आखिरी बार एक साथ दिखाई दिए थे। हैरान करने वाली बात यह है कि शी जिनपिंग ने ही वर्ष 2017 में इसी जनरल को अपने बाद चीन के सबसे ताकतवर पद पर बैठाया था। यानी यह ताकत के मामले में चीन का नंबर दो व्यक्ति था। पहले नंबर पर खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं और दूसरे नंबर पर यह थे। वर्ष 2023 में इसी जनरल ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग को तीसरी बार राष्ट्रपति बनने में मदद की थी। लेकिन बाद में इन दोनों पुराने दोस्तों के बीच किसी वजह से मतभेद शुरू हो गए और शी जिनपिंग और जनरल यूशिया चीन में एक ही प्रांत से आते हैं और ये दोनों बचपन के दोस्त हैं। यहां तक कि इन दोनों के पिता भी वर्ष 1949 में चीन की क्रांति के दौरान एक साथ काम करते थे। 

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2023 से अब तक 50 से ज्यादा अधिकारी हटाए गए

चीन में ऐसा तब होता है जब किसी बड़े अधिकारी को हटा दिया जाता है या फिर उनकी वफादारी पर कम्युनिस्ट पार्टी को शक होता है। चीन की सेना का आधिकारिक अखबार पीएलए डेली इसे सेना में एक सफाई अभियान बता रहा है और वर्ष 2023 से अब तक चीन में 50 से ज्यादा इसी प्रकार के बड़े-बड़े सैनिक अधिकारी हटाए जा चुके हैं या फिर उनके खिलाफ जांच चल रही है। जिनमें वहां के रक्षा मंत्री और वहां की आर्मी, एयरफोर्स और नेवी और मिसाइल फोर्स के टॉप जनरल्स भी शामिल हैं। अगर इन दोनों जनरल्स पर आरोप सही साबित हो गए तो यह चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा और वहां के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए तो निजी रूप से भी यह एक बहुत बड़ा झटका है।

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