भाजपा संसदीय बोर्ड में आधे सदस्य बदले जा सकते हैं:येदियुरप्पा और जटिया को हटाया जा सकता है, दोनों की उम्र 80 के पार
भाजपा में पार्टी पदाधिकारियों, राज्य प्रभारियों और संगठन मंत्रियों की नियुक्ति के बाद अब संसदीय बोर्ड, केंद्रीय चुनाव समिति और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों के नामों की घोषणा होनी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी से जुड़े निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था संसदीय बोर्ड के गठन की प्रारंभिक कवायद शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, इसकी घोषणा पितृ पक्ष के बाद अक्टूबर में कर दी जाएगी। बताया जा रहा है कि 12 सदस्यीय संसदीय बोर्ड में आधे सदस्यों को बदला जा सकता है। बीएस येदियुरप्पा और डॉ. सत्यनारायण जटिया को हटाया जा सकता है। इन्हीं जाति, वर्ग और क्षेत्रीय समीकरणों में फिट नेताओं को जगह दी जा सकती है। येदियुरप्पा और जटिया को बोर्ड से हटाने के पीछे उनकी अधिक उम्र होने की दलील दी जा रही है। एक महामंत्री और महिला नेता को संसदीय बोर्ड में मिल सकती है जगह एक महामंत्री को भी स्थान दिए जाने पर विचार किया जा सकता है। पार्टी में विनोद तावड़े और सुनील बंसल सबसे वरिष्ठ महामंत्री या किसी अन्य महामंत्री को लिया जा सकता है। वहीं, लंबे समय बाद संसदीय बोर्ड में मुख्यमंत्री को भी सर्वोच्च संस्था में स्थान दिया जा सकता है। वर्तमान में पार्टी 21 राज्यों में सत्ता में है। नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहते अलग-अलग समय पर संसदीय बोर्ड के सदस्य रहे हैं। पहले संसदीय बोर्ड के सदस्य रहे नेता और एक महिला नेत्री को भी बोर्ड में स्थान दिया जाएगा। भाजपा की संसदीय बोर्ड क्या करती है? बीजेपी की संसदीय बोर्ड पार्टी की सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली संस्थाओं में से एक है। पार्टी के संविधान के मुताबिक यह संसदीय और विधायक दल की गतिविधियों की निगरानी करती है और संगठन के कामकाज को दिशा देती है। मुख्यमंत्री का चेहरा तय करना विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी किसे मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाएगी, इस पर बोर्ड फैसला कर सकता है। चुनाव के बाद मुख्यमंत्री चुनने में भी इसकी भूमिका होती है। प्रधानमंत्री पद के लिए नाम की सिफारिश पार्टी के संविधान के तहत प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे पदों के लिए नाम की सिफारिश करने का अधिकार बोर्ड के पास है। चुनाव में उम्मीदवारों पर भूमिका संसदीय बोर्ड के सभी सदस्य सेंट्रल इलेक्शन कमेटी के भी सदस्य होते हैं। यह समिति लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए BJP के उम्मीदवारों का अंतिम चयन करती है। सरकार बनाने में मार्गदर्शन चुनाव में पार्टी को बहुमत मिलने पर सरकार के गठन को लेकर बोर्ड मार्गदर्शन देता है। पार्टी की नीतियों पर फैसले ऐसी नीति या नीति में बदलाव, जिसे पार्टी ने पहले औपचारिक रूप से नहीं अपनाया है, उस पर बोर्ड चर्चा और फैसला कर सकता है। संगठन पर निगरानी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के नीचे आने वाली पार्टी की संगठनात्मक इकाइयों को बोर्ड दिशा-निर्देश दे सकता है। अनुशासन से जुड़े मामलों में कार्रवाई पार्टी के सांसदों, विधायकों या राज्य संगठन के पदाधिकारियों के अनुशासन उल्लंघन को बोर्ड देख सकता है और जरूरी कार्रवाई कर सकता है। गठबंधन जैसे बड़े राजनीतिक फैसले मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार बोर्ड को राजनीतिक गठबंधनों पर फैसला लेने का अधिकार भी है। ------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… नितिन नवीन की टीम में राम माधव-स्मृति ईरानी का कमबैक; यूपी से दो मुस्लिम चेहरे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पद संभालने के 209 दिन बाद 65 सदस्यों की कार्यकारिणी का ऐलान किया। राम माधव को उपाध्यक्ष और स्मृति ईरानी को महासचिव बनाकर वापस लाया गया है। नितिन नवीन की टीम में 12 महिलाएं हैं। यूपी से दो मुस्लिम चेहरों तारिक मंसूर और बासित अली को शामिल किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट में हो सकती हैं 3 महिला जज:गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल के नाम की सिफारिश, अभी सिर्फ दो
सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या जल्द तीन हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल को सुप्रीम कोर्ट जज बनाने की सिफारिश की है। उनके साथ दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह के नाम भी भेजे गए हैं। कॉलेजियम ने 28 सितंबर को तीनों नामों की सिफारिश की। अभी सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस वी. मोहना दो महिला जज हैं। सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति हुई तो महिला जजों की संख्या तीन हो जाएगी। तीनों की नियुक्ति हुई तो सुप्रीम कोर्ट में कुल जजों की संख्या 34 से बढ़कर 37 हो जाएगी। वरिष्ठता क्रम के अनुसार जस्टिस नागरत्ना 24 सितंबर 2027 को देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं। उनका कार्यकाल 36 दिन का होगा। अभी सिर्फ दो महिला जज, एक अगले साल CJI बनेंगी बी वी नागरत्ना- 2027 में देश की पहली CJI बनेंगी भारत में CJI की नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर होती है। ऐसे में बी वी नागरत्ना 11 सितंबर 2027 को भारत की 50वीं मुख्य न्यायाधीश बनेंगी। वो इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला होंगी। उनका कार्यकाल लगभग 1 महीने का होगा। वो 29 अक्टूबर 2027 को CJI के पद से रिटायर होंगी। जस्टिस वी. मोहना: वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट जज बनीं जस्टिस वी. मोहना ने कोयंबटूर लॉ कॉलेज से 1988 में कानून की पढ़ाई पूरी की और उसी साल वकालत शुरू की। वे 1996 में सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट बनीं और 2015 में सीनियर एडवोकेट नामित हुईं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी की, साथ ही मध्यस्थता और आर्बिट्रेशन में भी काम किया। 2 जून 2026 को उन्हें सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। वह सुप्रीम कोर्ट की बार से सीधे जज बनने वाली दूसरी महिला हैं। सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाकर 37 करने वाला बिल मानसून सत्र में पास हुआ था केंद्रीय कैबिनेट ने 5 मई को सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। सरकार ने मानसून सत्र में बिल पेश किया। दोनों सदनों से पास हुआ। संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का अधिकार संसद के पास है। 2019 में आखिरी बार बढ़ी थी संख्या इससे पहले 2019 में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। वहीं, 2008 में जजों की संख्या 26 से बढ़कर 31 हुई थी। शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस के अलावा सिर्फ 10 जजों की व्यवस्था थी। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… देश की पहली महिला CJI बनेंगी जस्टिस बी वी नागरत्ना: कोर्ट्स ऑफ इंडिया का कन्नड़ अनुवाद किया जस्टिस बी वी नागरत्ना सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम में शामिल होने वाली पहली महिला जज बन गई हैं। 23 मई को जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका के रिटायरमेंट के चलते 25 मई को जस्टिस नागरत्ना सुप्रीम कोर्ट की 5वीं सबसे सीनियर जज बन गईं। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम में 5 सबसे सीनियर जज ही रहते हैं, जिसमें CJI यानी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया भी शामिल होते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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