रिलेशनशिप एडवाइज- मैं बेवकूफ था, गुस्से में ब्रेकअप कर लिया:अब गलती का एहसास है, एक्स से फिर दोस्ती करना चाहता हूं, क्या करूं?
सवाल- मैं 36 साल का हूं। 7 साल पहले मेरा ब्रेकअप हुआ था। उस समय हम दोनों ही काफी इममैच्योर थे। हम समझदारी से सिचुएशन को हैंडल नहीं कर पाए और लड़ पड़े। अब इतने सालों बाद पीछे पलटकर देखता हूं तो अपनी गलतियां अच्छे से समझ में आती हैं। मैं उसे पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर देख रहा हूं। उसने भी शादी नहीं की। वो मुंबई में रहती है। क्या मुझे उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजनी चाहिए, उससे दोबारा दोस्ती करनी चाहिए? क्या ब्रेकअप के बाद एक्स से दोस्ती करना ठीक है? एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा सात साल गुजरने के बाद किसी पुराने रिश्ते को याद करने में कुछ भी असामान्य नहीं है। समय बीतने के साथ इंसान अपने पुराने व्यवहार को नए नजरिए से देख पाता है। उसे अपनी गलतियां भी समझ आती हैं। इसे ही हम ग्रोथ कहते हैं। जीवन में ग्रोथ होना बहुत अच्छी बात है। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। आपको अपनी गलतियों का एहसास हो गया है और अब आप चाहते हैं कि गुजररा वक्त फिर से लौट आए। इस इच्छा में कोई बुराई नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सामने वाला व्यक्ति भी जीवन में उसी जगह खड़ा है। सबसे पहले खुद से कुछ सवाल हो सकता है, वह भी आपको याद करती हो। लेकिन यह भी हो सकता है कि उसने उस रिश्ते को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया हो। वह अपने जीवन में आगे बढ़ गई हो। सोशल मीडिया पर उसकी जिंदगी को देखकर इसका पता नहीं लगाया जा सकता। इसलिए कदम आगे बढ़ाने या उसे सोशल मीडिया पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने से पहले आपको खुद से कुछ सवाल पूछने की जरूरत है। इन सवालों के जवाब बहुत कुछ साफ कर देंगे। क्या उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना गलत है? नहीं। किसी पुराने परिचित को सोशल मीडिया पर रिक्वेस्ट भेजना अपने आप में गलत नहीं है। लेकिन रिक्वेस्ट के पीछे आपकी मंशा साफ होनी चाहिए। अगर आप सिर्फ यह देखना चाहते हैं कि वह कैसी है, तो संपर्क की शुरुआत बहुत सामान्य तरीके से हो सकती है। लेकिन अगर आपके मन में पहले से यह उम्मीद है कि बातचीत फिर से रिश्ते में बदल जाएगी, तो आपको सोचने और सावधान रहने की जरूरत है। ऐसा इसलिए क्योंकि तब हर छोटी चीज आपको उम्मीद दे सकती है, जैसेकि- ये सारी चीजें हो सकती हैं, लेकिन जरूरी नहीं है कि ये बातें उसके रिश्ते में लौटने की इच्छा हों। इसलिए इन्हें संकेत मानना ठीक नहीं है। क्या एक्स से दोस्ती करना ठीक है? यह हर रिश्ते में अलग होता है। कुछ लोग ब्रेकअप के बाद अच्छे दोस्त बने रह सकते हैं। कुछ लोग नहीं रह पाते। दोनों ही स्थितियां सामान्य हैं। दोस्ती तभी आसान होती है, जब पुराने रिश्ते से जुड़ी भावनाएं काफी हद तक शांत हो चुकी हों। अगर एक व्यक्ति अभी भी प्यार करता है और दूसरा केवल दोस्ती चाहता है, तो दोस्ती दोनों के लिए मुश्किल हो सकती है। मनोविज्ञान में इसे अनरिक्वाइटेड लव (अधूरी भावनात्मक उम्मीद) के नजरिए से समझा जा सकता है। जब मन किसी रिश्ते को पूरी तरह खत्म नहीं मानता, तो छोटी-छोटी बातचीत भी पुरानी उम्मीदों को फिर से जगा सकती है। इसलिए खुद से पूछें कि क्या आप वास्तव में उसे सिर्फ दोस्त के रूप में देख पाएंगे। सात साल बाद भावनाएं क्यों लौट सकती हैं? समय बीतने के बाद हम अक्सर पुराने रिश्ते को नए नजरिए से देखते हैं। उस समय जो बातें बहुत बड़ी लगती थीं, वे आज छोटी लग सकती हैं। अपनी गलतियां भी ज्यादा साफ दिखाई देती हैं। इसके अलावा याददाश्त भी अक्सर रिश्ते के अच्छे और खुशहाल हिस्सों को याद रखती है। झगड़े और तनाव उतनी शिद्दत से याद नहीं रहते। इसलिए जरूरी है कि आप सिर्फ अच्छी यादों के आधार पर फैसला न लें। रिश्ता जैसा वास्तव में था, उसे भी याद करें। इसलिए पुराने रिश्ते को याद करते समय खुद से ये सवाल भी पूछें- उसने अभी तक शादी क्यों नहीं की? आपने सवाल में लिखा है कि उसने अभी तक शादी नहीं की। यह लिखना बताता है कि आपके छिपे हुए मनोविज्ञान में यह बात कहीं मौजूद है कि वो सिंगल और एवेलेबल है। मेरा सुझाव है कि आप इस बात को फिलहाल अलग ही रखिए। उसने शादी नहीं की है, ये सिर्फ एक तथ्य है। इस बात का मतलब यह नहीं है कि वह आपके पास लौटना चाहती है। हो सकता है, वह शादी न करना चाहती हो। हो सकता है, उसकी जिंदगी में कोई और प्रिऑरिटी हो। हो सकता है, वह किसी और रिश्ते में हो और वो जानकारी सोशल मीडिया पर पब्लिक न हो। इसलिए उसकी वैवाहिक स्थिति को अपने लिए संकेत न मानें। इसी तरह मुंबई में रहना भी कोई खास संकेत नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण चीज है कि वह आज क्या चाहती है। अगर संपर्क करना ही है तो कैसे करें? पहला संपर्क बहुत हल्का रखें। ज्यादा लंबा और भावुक संदेश न भेजें। सात साल पुरानी पूरी कहानी एक साथ न खोलें। आप साधारण तरीके से कह सकते हैं कि काफी समय बाद उसकी याद आई और उम्मीद है कि वह ठीक होगी। अगर वह सहजता से बातचीत करती है, तभी बातचीत आगे बढ़ाएं। अगर उसका जवाब छोटा हो या वह बातचीत आगे न बढ़ाए, तो वहीं रुक जाएं। अपनी गलतियां समझना अच्छी बात सात साल बाद अपनी गलतियां पहचान पाना आपकी इमोशनल ग्रोथ का संकेत है। लेकिन इसका सबसे बड़ा फायदा यह होना चाहिए कि आज आप बेहतर तरीके से रिश्ते निभाने के काबिल हो सकें। जरूरी नहीं कि इस इमोशनल ग्रोथ का परिणाम उसी व्यक्ति के पास वापस जाना हो। कभी-कभी पुराने रिश्ते से मिली सीख को नए रिश्ते में अप्लाय करना ही उस रिश्ते का सबसे अच्छा परिणाम होता है। अब क्या करें? संपर्क करें या नहीं ? पुराने रिश्ते के टूटने के बाद दोबारा संपर्क करने की इच्छा स्वाभाविक है। खासकर तब, जब समय बीतने के साथ गुस्सा और शिकायतें कम हो गई हों। लेकिन सिर्फ पुरानी यादें या अकेलापन दोबारा संपर्क करने की पर्याप्त वजह नहीं हैं। पहले यह समझना जरूरी है कि आप वास्तव में क्या चाहते हैं? सिर्फ बातचीत, दोस्ती या फिर रिश्ते को दोबारा शुरू करने की उम्मीद। यह भी सोचें कि सामने वाला व्यक्ति आपके संपर्क का जवाब न दे या दूरी बनाए रखे, तो क्या आप उसे सहजता से स्वीकार कर पाएंगे। इन सवालों के जवाब ही ये तय करने में मदद कर सकते हैं कि एक्स से संपर्क करना आपके लिए सही होगा या नहीं। अंतिम बात सहज मन से, बिना किसी अपेक्षा के फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजें। वो स्वीकार करें तो अच्छी बात है, न स्वीकार करें, तो भी अच्छी बात है। आप न बहुत खुश हों, न बहुत उदास। अगर आप दिल और दिमाग से हर तरह के परिणाम को सहजता और गरिमा से एक्सेप्ट करने के लिए तैयार हैं तो फ्रेंड रिक्वेस्ट जरूर भेजिए। अगर आप में वह इमोशनल मैच्योरिटी आ चुकी है, जो रिजेक्शन को डिग्निटी के साथ स्वीकार करती है तो तो फ्रेंड रिक्वेस्ट जरूर भेजिए। लेकिन अगर अभी भी कहीं छिपी हुई उम्मीद या अपेक्षा है तो थोड़ा ठहरिए। पहले अपनी भावनाओं को एड्रेस करिए। ***************** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ………………….. ये खबर भी पढ़ें रिलेशनशिप एडवाइज- क्या पार्टनर का फोन चेक करना गलत है: मुझे हसबैंड पर शक है, क्या चुपके से उनका फोन खोलकर देख लूं, क्या करूं पार्टनर के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखे तो मन में शक पैदा होना स्वाभाविक है। ये बातें असुरक्षा बढ़ा सकती हैं। ऐसे में फोन चेक करके सच जानने की इच्छा होना भी स्वाभाविक है।लेकिन मेरा सुझाव है कि शक होते ही उसे सच मान लेना ठीक नहीं। पूरी खबर पढ़ें…
जरूरत की खबर- PM मोदी ने बताए आंवले के गुण:विटामिन C का पावरहाउस, विटामिन A का खजाना, डाइटीशियन से जानें खाने का सही तरीका
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में आंवले का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “यह फल भारतीय घरों की परंपरा का हिस्सा है और हमारे पूर्वज पीढ़ियों से इसके गुणों की चर्चा करते आए हैं।” आंवला भारतीय भोजन, संस्कृति और चिकित्सा पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। एक लोककथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत की कुछ बूंदें धरती पर गिरी थीं और उसी से आंवले का वृक्ष पैदा हुआ। यह कथा भले पौराणिक हो, लेकिन पोषण के मामले में आंवला सचमुच किसी अमृत से कम नहीं है। आंवले का एक पेड़ 65-70 साल तक फल दे सकता है। यह छोटा-सा फल पेक्टिन, एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन-C से भरपूर होता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक आंवले में 3 संतरे या 16 केले से ज्यादा विटामिन-C होता है। यही वजह है कि इसे विटामिन-C का पावरहाउस कहा जाता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में आंवला के हेल्थ बेनिफिट्स पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली सवाल- आंवला को सुपरफूड क्यों कहा जाता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- आंवला में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं? जवाब- इसमें विटामिन-C अच्छी मात्रा में होता है। इसके अलावा इसमें फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे कई जरूरी पोषक तत्व भी होते हैं। आंवला में पॉलीफेनॉल्स, फ्लेवोनॉयड्स और टैनिन्स जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स भी होते हैं, जो शरीर को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद करते हैं। ग्राफिक में आंवले की न्यूट्रिशनल वैल्यू देखिए- सवाल- अगर कोई 30 दिन तक रोज एक आंवला खाए तो शरीर में क्या बदलाव होते हैं? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- आंवला खाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? जवाब- आंवला खाने का कोई एक ‘परफेक्ट’ तरीका नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कितनी आसानी से अपनी डाइट में शामिल कर पाते हैं। पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- कच्चा आंवला ज्यादा फायदेमंद है या आंवला जूस? जवाब- दोनों के अपने फायदे हैं, लेकिन पोषण के लिहाज से कच्चा आंवला बेहतर माना जाता है। इसकी वजह यह है कि कच्चा आंवला खाने पर शरीर को फाइबर, विटामिन-C और अन्य पोषक तत्व प्राकृतिक रूप में मिलते हैं। वहीं आंवला जूस से भी विटामिन-C और एंटीऑक्सिडेंट्स मिलते हैं, लेकिन जूस बनाने के दौरान फाइबर की मात्रा थोड़ी कम हो जाती है। ग्राफिक में दोनों के बीच का फर्क देखिए- सवाल- आंवला, मुरब्बा, कैंडी और पाउडर में सबसे बेहतर क्या है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- एक दिन में कितना आंवला खाना चाहिए? जवाब- हेल्थ एक्सपर्ट्स आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति को रोज 1 से 2 ताजा आंवला खाने की सलाह देते हैं। इतनी मात्रा में आंवला खाने से शरीर को विटामिन-C, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स मिल जाते हैं। सवाल- क्या खाली पेट आंवला खाना ठीक है? जवाब- अगर खाली पेट आंवला खाने से कोई परेशानी नहीं होती है, तो इसे सुबह खाया जा सकता है। लेकिन अगर पेट में जलन, एसिडिटी या असुविधा महसूस हो, तो इसे भोजन के साथ या बाद में खाना बेहतर है। सवाल- क्या डायबिटीज के मरीज आंवला खा सकते हैं? जवाब- हां, आंवला में कम कैलोरी होती है, फाइबर होता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी बहुत कम है। यही वजह है कि इसे डायबिटीज-फ्रेंडली फूड्स में गिना जाता है। आंवला को लेकर बड़े दावे, कितने सच? सवाल- क्या रोज आंवला खाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं? जवाब- नहीं, ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि रोज आंवला खाने से सफेद बाल दोबारा काले हो जाते हैं। यह एक बहुत लोकप्रिय दावा है, लेकिन बालों का रंग मेलेनिन नाम के पिगमेंट से तय होता है। सवाल- क्या आंवला खाने से चश्मा उतर सकता है? जवाब- नहीं, यह एक आम धारणा है। चश्मा आमतौर पर आंखों के स्ट्रक्चर में बदलाव या विजन डिफेक्ट जैसे मायोपिया (नजदीक का चश्मा), हाइपरोपिया (दूर का चश्मा) और एस्टिग्मैटिज्म की वजह से लगता है। आंवला खाने से इन समस्याओं को ठीक नहीं किया जा सकता। सवाल- क्या आंवला वजन कम करता है? जवाब- वजन घटाने के लिए सिर्फ आंवला खाना काफी नहीं है। हालांकि, यह कम कैलोरी वाला और फाइबर से भरपूर फल है। लेकिन हम ये नहीं कह सकते कि सिर्फ आंवला खाने से वजन कम हो जाएगा। सिर्फ संतुलित डाइट और एक्सरसाइज के साथ इसका सेवन फायदेमंद हो सकता है। सवाल- क्या आंवला फैटी लिवर ठीक कर देता है? जवाब- नहीं, आंवला फैटी लिवर को ठीक नहीं करता और न ही यह इस बीमारी का इलाज है। सवाल- क्या आंवला कैंसर से बचाता है? जवाब- आंवला में विटामिन-C और एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। हालांकि, ऐसा कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि आंवला खाने से कैंसर नहीं होगा या इससे कैंसर का इलाज किया जा सकता है। इसलिए आंवला कैंसर से बचाव की गारंटी नहीं, बल्कि एक हेल्दी डाइट का हिस्सा है। सवाल- क्या आंवला खाने से एजिंग स्पीड कम हो जाती है? जवाब- ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि आंवला खाने से उम्र का बढ़ना रुक जाता है या व्यक्ति लंबे समय तक जवान बना रहता है। उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिस पर आनुवंशिकता, खानपान, नींद, शारीरिक गतिविधि और जीवनशैली का भी असर पड़ता है। सवाल- क्या आंवला से शरीर को डिटॉक्स किया जा सकता है? जवाब- नहीं, हेल्दी लिवर और किडनी ही शरीर को नेचुरली डिटॉक्स करने का काम करते हैं। …………………. ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- शाकाहारियों के लिए प्रोटीन के बेस्ट सोर्स:डॉक्टर से समझें शरीर में प्रोटीन के 10 जरूरी काम, डेफिशिएंसी के 8 संकेत हमारे शरीर में अरबों कोशिकाएं हैं। हर कोशिका को ठीक से काम करने के लिए प्रोटीन चाहिए। प्रोटीन शरीर में अनगिनत काम करता है। मसल्स बनाता है, डैमेज्ड टिश्यूज को रिपेयर करता है, हार्मोन-एंजाइम बनाता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाता है। ये खबर भी पढ़ें…
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