वॉट्सएप पर हर मैसेज भेजने पर कल से लगेगा चार्ज:फिलहाल बिजनेस कंपनियों पर लागू, कस्टमर को कोई शुल्क नहीं देना होगा
1 अक्टूबर से वॉट्सएप बिजनेस प्लेटफॉर्म पर कंपनियों की तरफ से कस्टमर को भेजे जाने वाले मैसेजेस पर चार्ज लगेगा। अभी ग्राहक के मैसेज के पूछताछ वाले मैसेज के बाद 24 घंटे तक कंपनियां मुफ्त जवाब भेज सकती हैं। अब इस अवधि में भेजे हर सेवा संदेश पर अलग शुल्क लगेगा। ऑर्डर की पुष्टि और डिलीवरी अपडेट जैसे मैसेज भी फ्री नहीं रहेंगे। हर बिजनेस नंबर को महीने में पहले 1,000 सर्विस मैसेज मुफ्त मिलेंगे। इसके बाद कर्मचारी या चैटबॉट से भेजे हर मैसेज पर शुल्क लगेगा। ग्राहक की ओर से कंपनी को भेजे मैसेज पर कोई शुल्क नहीं होगा। सामान्य वॉट्सएप और छोटे कारोबारों के लिए बने मुफ्त वॉट्सएप बिजनेस एप पर यह नियम लागू नहीं होगा। कंपनियों को 30 सितंबर तक भुगतान का तरीका अपने अकाउंट में जोड़ना होगा। ऐसा नहीं करने पर 1 अक्टूबर से उनके सर्विस मैसेज की डिलीवरी रोक दी जाएगी। वॉट्सएप बिजनेस के पेड मैसेज: 15 सवाल-जवाब में समझें 1. 1 अक्टूबर से वॉट्सएप में क्या बदल रहा है? 1 अक्टूबर 2026 से कंपनियों की ओर से वॉट्सएप बिजनेस पर भेजे जाने वाले कुछ सर्विस मैसेज पेड हो जाएंगे। यानी कंपनियों को ऐसे मैसेज भेजने के लिए वॉट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा को शुल्क देना होगा। 2. अभी तक क्या होता था? कुछ नॉन टेंपलेट सर्विस मैसेजेस और 24 घंटे की कस्टमर सर्विस विंडो के दौरान भेजे जाने वाले कुछ यूटिलिटी मैसेज पर कंपनियों से शुल्क नहीं लिया जाता था। अब इस व्यवस्था में बदलाव हो रहा है। 3. सर्विस मैसेज क्या होता है? जब कोई ग्राहक कंपनी से वॉट्सएप पर बातचीत करता है और कंपनी की ओर से उसे कस्टमर सर्विस कर्मचारी या थर्ड पार्टी AI सिस्टम जवाब देता है, तो उसे सर्विस मैसेज कहा जाता है। 4. क्या कंपनी खुद से सर्विस मैसेज भेजकर नई बातचीत शुरू कर सकती है? नहीं। सर्विस मैसेज तभी भेजा जा सकता है जब ग्राहक के साथ 24 घंटे की कस्टमर सर्विस विंडो खुली हो। 5. 24 घंटे की कस्टमर सर्विस विंडो क्या है? जब ग्राहक कंपनी को वॉट्सएप पर मैसेज करता है, तो उसके बाद एक निर्धारित 24 घंटे की अवधि होती है, जिसमें कंपनी ग्राहक को जवाब दे सकती है। इसी दौरान भेजे जाने वाले कुछ मैसेज सर्विस मैसेज की कैटेगरी में आते हैं। 7. क्या मार्केटिंग मैसेज भी पेड हैं? हां। कंपनियों से मार्केटिंग, यूटिलिटी और ऑथेंटिकेशन टेंपलेट मैसेज के लिए पहले से शुल्क लिया जाता है। 1 अक्टूबर से सर्विस मैसेज भी पेड कैटेगरी में जुड़ जाएंगे। 8. भारत में सर्विस मैसेज की कीमत कितनी होगी? मेटा के अनुसार इसकी कीमत हर बाजार के हिसाब से होगी। भारत में सर्विस मैसेज की दर यूटिलिटी और ऑथेंटिकेशन मैसेज की दर के बराबर होगी। 11. कंपनियों को 30 सितंबर तक क्या करना होगा? वॉट्सएप बिजनेस इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को अपने अकाउंट में पेमेंट मेथेड जोड़ना होगा। ऐसा नहीं करने पर 1 अक्टूबर से उनके सर्विस मैसेज की डिलीवरी रोक दी जाएगी। 13. क्या हर वॉट्सएप बिजनेस मैसेज अब पेड हो जाएगा? नहीं। सभी मैसेज पर शुल्क नहीं लगेगा। Meta ने फ्री एंट्री पॉइंट विंडो में बदलाव नहीं किया है। 14. फ्री एंट्री पॉइंट विंडो क्या है? अगर कोई ग्राहक ऐसे विज्ञापन पर क्लिक करके वॉट्सएप पर आता है, जिसमें वॉट्सएप चैट खोलने का विकल्प होता है, तो उसएंट्री पॉइंट विंडो के दौरान भेजे गए मैसेज की डिलीवरी मुफ्त रहती है। 15. इसका कंपनियों और ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा? इसका सीधा शुल्क कंपनियों पर पड़ेगा, क्योंकि वॉट्सएप बिजनेस के जरिए मैसेज भेजने वाली कंपनियों को नई पेड कैटेगरी के लिए भुगतान करना होगा। कंपनियों के लिए खास तौर पर कस्टमर सर्विस बातचीत की लागत बढ़ सकती है। -------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट का UPI चार्ज पर रोक से इनकार: ₹2000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% चार्ज तय सुप्रीम कोर्ट ने UPI पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। 15 अक्टूबर से यह शुल्क 2000 रुपए से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर लागू होगा। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है कि इस नए नियम को लागू करने का आधार क्या है। पूरी खबर पढ़ें…
भाजपा संसदीय बोर्ड में आधे सदस्य बदले जा सकते हैं:येदियुरप्पा और जटिया को हटाया जा सकता है, दोनों की उम्र 80 के पार
भाजपा में पार्टी पदाधिकारियों, राज्य प्रभारियों और संगठन मंत्रियों की नियुक्ति के बाद अब संसदीय बोर्ड, केंद्रीय चुनाव समिति और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों के नामों की घोषणा होनी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी से जुड़े निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था संसदीय बोर्ड के गठन की प्रारंभिक कवायद शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, इसकी घोषणा पितृ पक्ष के बाद अक्टूबर में कर दी जाएगी। बताया जा रहा है कि 12 सदस्यीय संसदीय बोर्ड में आधे सदस्यों को बदला जा सकता है। बीएस येदियुरप्पा और डॉ. सत्यनारायण जटिया को हटाया जा सकता है। इन्हीं जाति, वर्ग और क्षेत्रीय समीकरणों में फिट नेताओं को जगह दी जा सकती है। येदियुरप्पा और जटिया को बोर्ड से हटाने के पीछे उनकी अधिक उम्र होने की दलील दी जा रही है। एक महामंत्री और महिला नेता को संसदीय बोर्ड में मिल सकती है जगह एक महामंत्री को भी स्थान दिए जाने पर विचार किया जा सकता है। पार्टी में विनोद तावड़े और सुनील बंसल सबसे वरिष्ठ महामंत्री या किसी अन्य महामंत्री को लिया जा सकता है। वहीं, लंबे समय बाद संसदीय बोर्ड में मुख्यमंत्री को भी सर्वोच्च संस्था में स्थान दिया जा सकता है। वर्तमान में पार्टी 21 राज्यों में सत्ता में है। नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहते अलग-अलग समय पर संसदीय बोर्ड के सदस्य रहे हैं। पहले संसदीय बोर्ड के सदस्य रहे नेता और एक महिला नेत्री को भी बोर्ड में स्थान दिया जाएगा। भाजपा की संसदीय बोर्ड क्या करती है? बीजेपी की संसदीय बोर्ड पार्टी की सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली संस्थाओं में से एक है। पार्टी के संविधान के मुताबिक यह संसदीय और विधायक दल की गतिविधियों की निगरानी करती है और संगठन के कामकाज को दिशा देती है। मुख्यमंत्री का चेहरा तय करना विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी किसे मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाएगी, इस पर बोर्ड फैसला कर सकता है। चुनाव के बाद मुख्यमंत्री चुनने में भी इसकी भूमिका होती है। प्रधानमंत्री पद के लिए नाम की सिफारिश पार्टी के संविधान के तहत प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे पदों के लिए नाम की सिफारिश करने का अधिकार बोर्ड के पास है। चुनाव में उम्मीदवारों पर भूमिका संसदीय बोर्ड के सभी सदस्य सेंट्रल इलेक्शन कमेटी के भी सदस्य होते हैं। यह समिति लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए BJP के उम्मीदवारों का अंतिम चयन करती है। सरकार बनाने में मार्गदर्शन चुनाव में पार्टी को बहुमत मिलने पर सरकार के गठन को लेकर बोर्ड मार्गदर्शन देता है। पार्टी की नीतियों पर फैसले ऐसी नीति या नीति में बदलाव, जिसे पार्टी ने पहले औपचारिक रूप से नहीं अपनाया है, उस पर बोर्ड चर्चा और फैसला कर सकता है। संगठन पर निगरानी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के नीचे आने वाली पार्टी की संगठनात्मक इकाइयों को बोर्ड दिशा-निर्देश दे सकता है। अनुशासन से जुड़े मामलों में कार्रवाई पार्टी के सांसदों, विधायकों या राज्य संगठन के पदाधिकारियों के अनुशासन उल्लंघन को बोर्ड देख सकता है और जरूरी कार्रवाई कर सकता है। गठबंधन जैसे बड़े राजनीतिक फैसले मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार बोर्ड को राजनीतिक गठबंधनों पर फैसला लेने का अधिकार भी है। -------------------------------------
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