एशियन गेम्स 2026 में भारत की 8वें दिन शानदार शुरुआत, 44 साल बाद रचा इतिहास, सावन बरवाल ने दिलाया मैराथन में मेडल
भारत के लिए एशियन गेम्स 2026 का आठवां दिन यादगार शुरुआत लेकर आया है। दरअसल शनिवार को जापान के नागोया में पहले सावन बरवाल ने पुरुष मैराथन में सिल्वर मेडल जीता और फिर महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस टीम ने दूसरा सिल्वर अपने नाम कर लिया। इन दोनों पदकों के साथ भारत की कुल पदक संख्या में बढ़ोतरी हुई और भारतीय खिलाड़ियों ने दिन की शुरुआत दमदार अंदाज में की।
दरअसल सावन बरवाल की मैराथन उपलब्धि खास इसलिए भी रही क्योंकि इस स्पर्धा में भारत को 1982 के बाद पहली बार पदक मिला है। वहीं शूटिंग में भारत लगातार मजबूत प्रदर्शन करता हुआ नजर आ रहा है।
44 साल पुराना इंतजार खत्म किया
वहीं 28 वर्षीय सावन बरवाल ने 42.195 किलोमीटर की मैराथन दो घंटे 11 मिनट 37 सेकंड में पूरी कर सिल्वर मेडल जीता। गोल्ड जीतने वाले जापान के इचिताका यामाशिता ने यह रेस दो घंटे 10 मिनट 49 सेकंड में पूरी की, जबकि चीन के पेइयू फेंग दो घंटे 12 मिनट 13 सेकंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे। यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी मानी जा रही है क्योंकि एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में भारत को पिछला पदक 1982 में मिला था। सावन बरवाल इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले चौथे भारतीय भी बन गए हैं। रेस के बाद सावन ने कहा कि उनका लक्ष्य रिकॉर्ड बनाना नहीं बल्कि देश के लिए पदक जीतना था। उन्होंने बताया कि उन्होंने शुरुआत से अपनी रणनीति तय रखी और आखिरी हिस्से तक शीर्ष धावकों के साथ बने रहने की कोशिश की। उनकी इसी रणनीति ने उन्हें सिल्वर मेडल तक पहुंचाया।
शूटिंग में भारत का दमदार प्रदर्शन जारी
वहीं महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस टीम ने भी भारत को दिन का दूसरा सिल्वर दिलाया। आशी चौकसी, तिलोत्तमा सेन और विदर्सा विनोद की तिकड़ी ने 1763 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। इस मुकाबले में चीन ने 1773 अंकों के साथ गोल्ड जीता, जबकि कजाखस्तान को ब्रॉन्ज मिला। टीम इवेंट के साथ व्यक्तिगत वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने मजबूत प्रदर्शन किया। तिलोत्तमा सेन और विदर्सा विनोद ने व्यक्तिगत फाइनल के लिए जगह बना ली। तिलोत्तमा ने 590 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि विदर्सा ने 588 अंकों के साथ छठे स्थान पर रहते हुए फाइनल में प्रवेश किया। आशी चौकसी ने भी 585 अंकों का स्कोर बनाया।
दूसरे खेलों में भी भारत का शानदार प्रदर्शन जारी
आठवें दिन दूसरे खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने जीत दर्ज की। महिला कबड्डी टीम ने सेमीफाइनल में नेपाल को 48-24 से हराकर फाइनल में जगह बना ली। अब टीम गोल्ड मेडल के लिए मुकाबला खेलेगी। वहीं स्क्वॉश में अभय सिंह ने जापान के रयूनोसुके त्सुकुए को सीधे गेमों में हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। बैडमिंटन में उन्नति हुड्डा ने उत्तर कोरिया की यी मी सॉन्ग को हराकर अगले दौर में जगह बनाई। टेबल टेनिस में यशस्विनी घोरपड़े भी तीसरे राउंड में पहुंचने में सफल रहीं।
स्मार्टफोन स्क्रीनगार्ड के लिए BIS रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा:घटिया क्वालिटी वाले गार्ड नहीं बिक सकेंगे, नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू
सरकार ने स्मार्टफोन स्क्रीन गार्ड्स के लिए BIS रजिस्ट्रेशन जरूरी कर दिया है। इस नए फैसले का सीधा असर बाजार में बिकने वाले खराब क्वालिटी के स्क्रीन गार्ड्स पर पड़ेगा। अब कंपनियों को BIS के टेस्ट में पास होने के बाद ही इन्हें बेचने की इजाजत मिलेगी। केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन यूजर्स की सेफ्टी और स्क्रीन गार्ड्स की क्वालिटी बेहतर करने के लिए यह कदम उठाया है। 1 अप्रैल 2027 से पूरे देश में लागू होंगे नए नियम मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, स्मार्टफोन स्क्रीन गार्ड्स के लिए तय किए गए नए BIS मानक 1 अप्रैल, 2027 से देशभर में लागू कर दिए जाएंगे। इसका मतलब है कि 2027 के बाद बिना BIS रजिस्ट्रेशन और बिना तय मानकों वाले स्क्रीन गार्ड्स की बिक्री पर रोक रहेगी। ग्राहकों और कंपनियों पर असर? ग्राहकों को फायदा: बाजार में मिलने वाले सस्ते, डुप्लीकेट और जल्दी टूटने वाले स्क्रीन गार्ड्स से छुटकारा मिलेगा। तय क्वालिटी स्टैंडर्ड होने के कारण डिस्प्ले सुरक्षित रहेगा। कंपनियों के लिए शर्त: कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स का BIS लैब में टेस्ट कराना होगा। बिना BIS मार्क वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर्स का इम्पोर्ट और लोकल प्रोडक्शन बैन हो जाएगा। BIS सर्टिफाइड गार्ड से क्या मिलेगा, 5 सवालों-जवाब में समझिए सवाल 1: आम यूजर को कैसे पता चलेगा कि स्क्रीन गार्ड BIS सर्टिफाइड है या नहीं? जवाब: अप्रैल 2027 के बाद बिकने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर्स के पैकेट पर BIS का ISI मार्क और रजिस्ट्रेशन नंबर प्रिंट होगा। यूजर 'BIS CARE' एप पर जाकर इस नंबर को वेरीफाई कर सकेंगे। सवाल 2: क्या लोकल दुकानों पर मिलने वाले ₹50-₹100 वाले सस्ते स्क्रीन गार्ड बंद हो जाएंगे? जवाब: हां, बिना BIS टेस्टिंग और बिना रजिस्ट्रेशन वाले किसी भी ब्रांड या लोकल ग्लास की बिक्री गैर-कानूनी होगी। इससे बिना ब्रांड वाले सस्ते चाइनीज स्क्रीन गार्ड्स के बाजार पर लगाम लगेगी। सवाल 3: क्या इससे स्क्रीन गार्ड्स की कीमतें बढ़ जाएंगी? जवाब: कंपनियों को BIS लैब से टेस्टिंग कराने, सर्टिफिकेशन फीस देने और क्वालिटी में सुधार करने में ज्यादा खर्च आएगा। ऐसे में स्क्रीन गार्ड्स 10% से 20% तक महंगे हो सकते हैं। सवाल 4: घटिया क्वालिटी के स्क्रीन गार्ड से फोन और यूजर को क्या-क्या नुकसान होते हैं? जवाब: सवाल 5: अगर कोई दुकानदार 1 अप्रैल 2027 के बाद बिना BIS मार्क वाला स्क्रीन गार्ड बेचता है तो क्या होगा? जवाब: भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS अधिनियम के तहत बिना सर्टिफिकेशन के सामान बेचना या बनाना अपराध होगा। ऐसा करने वाले दुकानदारों, इंपोर्टर्स और मैन्युफैक्चरर्स पर जुर्माना और माल जब्त करने की कार्रवाई हो सकती है।
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