रूस का परमाणु बम गिराने में सक्षम विमान क्रैश:6 की मौत; गोला-बारूद नहीं था; उड़ान भरते ही फ्यूल टैंक में ब्लास्ट
रूस का परमाणु बम गिराने में सक्षम Tu-95 सैन्य विमान मंगलवार को ट्रेनिंग उड़ान के दौरान क्रैश हो गया। हादसे में 6 क्रू मेंबर मारे गए और एक घायल हुआ। रूसी रक्षा मंत्रालय ने हादसे की पुष्टि की है। मंत्रालय के मुताबिक, विमान का फ्यूल टैंक उड़ान भरते ही ब्लास्ट हो गया जिसके बाद वह एक सुनसान इलाके में गिरा घायल क्रू मेंबर को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। विमान में सवार सभी लोग क्रू मेंबर थे। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
Pitru Paksha Chaturdashi: पितृ पक्ष में चतुर्दशी श्राद्ध क्यों माना जाता है खास? जानें अकाल मृत्यु वालों के लिए क्या है धार्मिक विधान
Pitru Paksha Chaturdashi: पितृ पक्ष को सनातन परंपरा में पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस अवधि में लोग अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य जैसे कर्म करते हैं। सामान्य तौर पर श्राद्ध दिवंगत व्यक्ति की मृत्यु तिथि के आधार पर किया जाता है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं में कुछ विशेष परिस्थितियों में मृत्यु होने पर पितृ पक्ष की अलग तिथि निर्धारित किए जाने का उल्लेख मिलता है। इन्हीं में चतुर्दशी श्राद्ध का विशेष स्थान बताया गया है। मान्यता है कि कम उम्र में या अप्रत्याशित परिस्थितियों में मृत्यु को प्राप्त हुए लोगों के लिए पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है। आइए जानते हैं इस तिथि से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताएं और श्राद्ध के समय की जानकारी।
अकाल मृत्यु किसे कहा जाता है?
धार्मिक परंपराओं में सामान्य अपेक्षित आयु से पहले किसी व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति को अकाल मृत्यु कहा जाता है। दुर्घटना, आग, विष या अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों में हुई मृत्यु को भी पारंपरिक मान्यताओं में इस श्रेणी से जोड़ा जाता है। ऐसे दिवंगत परिजनों के लिए पितृ पक्ष में विशेष श्राद्ध करने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। इसी वजह से चतुर्दशी तिथि को ऐसे परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
चतुर्दशी श्राद्ध का क्या महत्व है?
पितृ पक्ष की चतुर्दशी को चतुर्दशी श्राद्ध कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन उन दिवंगत परिजनों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु असामयिक या अप्रत्याशित परिस्थितियों में हुई हो। चतुर्दशी तिथि का संबंध भगवान शिव से भी जोड़ा जाता है। इसलिए इस अवसर पर कुछ लोग पितरों के निमित्त कर्म करने के साथ भगवान शिव की पूजा और अभिषेक भी करते हैं। महादेव से दिवंगत आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए प्रार्थना करने की परंपरा बताई जाती है।
शिवलिंग का अभिषेक कैसे करें?
चतुर्दशी श्राद्ध के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान शिव की पूजा की जा सकती है। शिवलिंग के अभिषेक के लिए जल में गंगाजल और काले तिल मिलाने की परंपरा भी बताई जाती है। इसके बाद दिवंगत परिजन का स्मरण करते हुए शिवलिंग पर जल अर्पित करें और उनकी आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यताओं में इस तरह की पूजा को दिवंगत व्यक्ति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम माना जाता है।
चतुर्दशी श्राद्ध का शुभ समय
पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 9 अक्टूबर की रात 9 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। इसके बाद रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:31 बजे से 1:18 बजे तक रहेगा। वहीं, अपराह्न काल दोपहर 1:18 बजे से 3:38 बजे तक बताया गया है। श्राद्ध और तर्पण से जुड़े कर्म परिवार की परंपरा तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार इन निर्धारित अवधियों में किए जा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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