दुनिया की अपेक्षा चीन में क्यों तेजी से बढ़ रहे चांदी के दाम, अंतर 16 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा
नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय बाजारों के मुकाबले चीन में चांदी के दाम अधिक तेजी से बढ़ रहे हैं और अब अंतर करीब 16 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी का दाम करीब 109 डॉलर प्रति औंस पर बना हुआ है, जबकि चीन में चांदी की कीमतें करीब 125 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई है।
अंतरराष्ट्रीय और चीन के बाजार में चांदी की कीमतों में अंतर का मुख्य कारण मांग है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों के मुकाबले चीनी बाजार में चांदी की मांग काफी अधिक है। दुनिया की चांदी की आपूर्ति में चीन की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत के अधिक है। यहां बड़े स्तर पर चांदी को हाजिर और वायदा बाजार में खरीदा जाता है। ऐसे में जब दुनिया में चांदी की कमी हो रही,तो यहां निवेश के लिए चांदी की मांग पहले के मुकाबले काफी अधिक बढ़ गई है।
इसके अलावा, जनवरी की शुरुआत से चीन ने चांदी निर्यात की अपनी नीति को बदल दिया है। अब केवल सरकार से लाइसेंस पाने वाली कंपनियां ही चांदी का निर्यात कर सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत में तूफानी तेजी देखने को मिल रही है।
कॉमेक्स पर चांदी सोमवार को करीब 8 प्रतिशत की तेजी के साथ 109 डॉलर प्रति औंस के आसपास है। बीते एक महीने में चांदी के दाम 42 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। बीते तीन महीने में चांदी ने 127 प्रतिशत, छह महीने में 182 प्रतिशत और एक साल में 250 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है।
चांदी के साथ सोना भी निवेशकों को मालामाल कर रहा है। कॉमेक्स पर सोने की कीमत 5,125 डॉलर प्रति औंस के करीब है। बीते एक महीने में सोने ने 13 प्रतिशत, तीन महीने में 23 प्रतिशत, छह महीने में 49 प्रतिशत और एक साल में 84.52 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
--आईएएनएस
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कर्तव्य पथ पर 'आत्मनिर्भर भारत' का शंखनाद, रक्षा तकनीक में दुनिया को चुनौती दे रहा है नया हिंदुस्तान
77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली का कर्तव्य पथ भारत की बढ़ती ताकत का गवाह बना. इस बार की परेड में न सिर्फ हमारी सेना का दम दिखा, बल्कि यह भी साफ हो गया कि भारत अब रक्षा तकनीक (Defense Tech) के मामले में दुनिया के बड़े देशों को टक्कर दे रहा है. इस साल की परेड की सबसे खास बात इसकी थीम थी. 'वंदे मातरम्' के 150 साल पूरे होने के मौके पर करीब 30 झांकियां निकाली गईं. इन झांकियों के जरिए भारत की आजादी के सफर और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को दिखाया गया. यह संदेश साफ था कि भारत अब अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं है.
आसमान में गरजते लड़ाकू विमान
परेड के दौरान सबकी नजरें आसमान पर टिकी थीं. वायुसेना (IAF) के फ्लाईपास्ट में राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों ने अपनी रफ्तार और कलाबाजी से सबको हैरान कर दिया. इसके अलावा हेलिकॉप्टरों और मालवाहक विमानों ने भी अपनी ताकत दिखाई, जो यह बताता है कि भारतीय वायुसेना किसी भी इमरजेंसी में कितनी जल्दी एक्शन ले सकती है.
ब्रह्मोस और हाइपरसोनिक मिसाइल
हथियारों के प्रदर्शन में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सबसे आगे रही. इस मिसाइल ने हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अपनी अचूक मारक क्षमता साबित की थी. इसके अलावा, DRDO की बनाई हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल ने सबका ध्यान खींचा. इसकी रफ्तार इतनी तेज है (मैक 5 से भी ज्यादा) कि दुश्मन का रडार इसे पकड़ भी नहीं पाएगा. यह मिसाइल 1,500 किलोमीटर दूर तक हमला कर सकती है.
मेड इन इंडिया गाड़ियों का जलवा
सेना ने इस बार अपने स्वदेशी (Made in India) वाहनों पर काफी जोर दिया. महिंद्रा द्वारा बनाया गया आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल पहली बार नजर आया. यह गाड़ी ड्रोन, रडार और मॉडर्न हथियारों से लैस है. इसके साथ ही 'भीष्म' और 'अर्जुन' जैसे टैंकों ने भी अपनी दहाड़ से कर्तव्य पथ को गुंजायमान कर दिया.
हाई-टेक ड्रोन और आर्टिलरी सिस्टम
आने वाले समय की लड़ाई तकनीक की होगी, और भारत इसके लिए तैयार है. परेड में ड्रोन स्वार्म तकनीक और सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर जैसी मॉडर्न प्रणालियां दिखाई गईं. 'दिव्यास्त्र' और 'शक्तिबाण' जैसे सिस्टम से यह साफ हो गया कि भारतीय सेना अब ड्रोन और आर्टिलरी के मामले में बहुत एडवांस हो चुकी है.
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