जबलपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर युवा कांग्रेस का हल्लाबोल, SP कार्यालय का घेराव, बैरिकेड्स पर चढ़े कार्यकर्ता, पुलिस ने की पानी की बौछार
जबलपुर: मध्यप्रदेश के जबलपुर में मंगलवार को शहर में बिगड़ती कानून व्यवस्था एवं बढ़ती आपराधिक घटनाओं के मुद्दों को लेकर युवा कांग्रेस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रैली निकालते हुये पुलिस अधीक्षक कार्यलय का घेराव किया एवं जमकर नारेबाजी की।
जानकारी अनुसार, युवा कांग्रेस के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस की टीम ने पहले ही इन्हें रोकने की इंतजाम कर रखा था। पुलिस ने पुलिस ने कार्यालय के मुख्य गेट को बंद कर दिया था। साथ ही सड़क पर बैरिकेड्स लगा दिये थे। युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए आये और बैरिकेड्स पर चढ़ गये।
वहीं, जब युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता अंदर जाने का प्रयास करने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिये वाटर कैनन से पानी की बौछार कर दी। जिसके बाद कुछ देर तक मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही। बाद में पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर स्थिति नियंत्रित की। इस दौरान कार्यकर्ता एवं पुलिस के बीच धक्का मुक्की भी देखी गई।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने उठाये सवाल
प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया ने शहर में हत्या, लूट, साइबर अपराध, जुआ, सट्टा, स्मैक और अवैध शराब की बिक्री को लेकर पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए और गंभीर आरोप भी लगाये हैं। उन्होंने कहा कि शहर में जुआ, सट्टा और स्मैक की बिक्री को लेकर आये दिन शिकायतें सामने आ रही हैं लेकिन पुलिस और प्रशासन इन अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है। वहीं युवा कांग्रेस ने फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाने और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण की भी मांग की।
वहीं, यश घनघोरिया ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की अपराधियों से कथित सांठगांठ के चलते शहर में अपराध बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कानून व्यवस्था में जल्दी सुधार नहीं हुआ तो युवा कांग्रेस द्वारा इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अपराधियों से कथित सांठगांठ करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी संगठन आवाज उठाएगा।
हेलमेट पर चालान, अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
युवा प्रदेश अध्यक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सड़क पर बाइक चलाने वाला व्यक्ति यदि हेलमेट नहीं लगाता है तो उसके खिलाफ तत्काल चालानी कार्रवाई की जाती है लेकिन शहर में जुआ, सट्टा, स्मैक और अवैध शराब जैसी गतिविधियों पर पुलिस प्रशासन प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है। उन्होंने प्रशासन से अवैध गतिविधियों पर तत्काल अंकुश लगाने की मांग की।
पहाड़ के उत्पादों को मिल रही नई पहचान, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ से ग्लोबल मार्केट तक पहुंच
Mountain Products: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में तैयार होने वाले पारंपरिक और स्थानीय उत्पाद अब राज्य की सीमाओं से बाहर पहचान बना रहे हैं. महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के जरिए उन्हें एक मंच पर ला रही है. इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता और ब्रांडिंग के साथ बड़े बाजार तक पहुंचाना है.
‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ की शुरुआत उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 के दौरान की गई थी. इससे पहले राज्य के स्थानीय उत्पाद हिमाद्री, हिलास और ग्राम्य-श्री जैसे अलग-अलग नामों से बाजार में पहुंचते थे. अब इन्हें एक ही अंब्रेला ब्रांड के तहत बाजार में पेश किया जा रहा है. इस पहल के जरिए प्राकृतिक उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुओं को आधुनिक पैकेजिंग और गुणवत्ता मानकों के साथ ग्राहकों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है. इससे स्थानीय महिला समूहों और कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है.
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महिला समूहों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस
‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ में स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता पर जोर दिया जाता है. सामग्री के चयन से लेकर उत्पादन और पैकेजिंग तक प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने की बात कही गई है. पर्यावरण के अनुकूल और पारंपरिक तरीकों से उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. इस मॉडल का एक अहम पहलू यह है कि स्थानीय उत्पादों की बिक्री से होने वाला आर्थिक लाभ ग्रामीण समुदायों और महिला स्वयं सहायता समूहों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है. इससे गांवों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करने की कोशिश की जा रही है.
13 जिलों के स्थानीय उत्पादों को अलग पहचान
उत्तराखंड सरकार ने ‘एक जिला-दो उत्पाद’ (ODTP) नीति के तहत सभी 13 जिलों के प्रमुख उत्पादों को बढ़ावा देने की योजना बनाई है. इसके तहत अलग-अलग जिलों के स्थानीय उत्पादों को बाजार और ब्रांडिंग से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है.
अल्मोड़ा: बाल मिठाई और ताम्र शिल्प
हरिद्वार: शहद और मूंज ग्रास उत्पाद
बागेश्वर: ट्वीड और कीवी उत्पाद
चमोली: हथकरघा और हर्बल मेडिसिन
चम्पावत: लोहे के उत्पाद और हस्तनिर्मित बेकरी उत्पाद
देहरादून: गुलाब जल और मशरूम उत्पाद
नैनीताल: फल प्रसंस्करण और लकड़ी की नक्काशी
पौड़ी: मैंथा ऑयल और ऐपण हस्तशिल्प
ऊधम सिंह नगर: मूंज ग्रास और मक्के के उत्पाद
पिथौरागढ़: मुन्स्यारी राजमा और ऊनी कालीन
रुद्रप्रयाग: चौलाई के उत्पाद और मंदिर अनुकृति हस्तशिल्प
उत्तरकाशी: सेब के उत्पाद और लाल चावल
टिहरी: पनीर और टिहरी नथ
GI टैग से पारंपरिक उत्पादों को मिली पहचान
उत्तराखंड के कई पारंपरिक हस्तशिल्प और उत्पादों को भौगोलिक संकेत यानी GI टैग भी मिला है. इससे इन उत्पादों की पहचान और प्रामाणिकता को स्थापित करने में मदद मिलती है. इनमें भोटिया डैन और थुलमा कंबल, उत्तराखंड ऐपण, उत्तराखंड लिखाई, ताम्र शिल्प, रिंगाल उत्पाद, रामन मुखौटे, बिछुआ फाइबर से बने उत्पाद, कुमाऊंनी रंगवाली पिछौड़ा और नैनीताल की मोमबत्तियां शामिल हैं.
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पर्यटन से स्थानीय कारोबार को जोड़ने की कोशिश
उत्तराखंड में पर्यटन को स्थानीय उत्पादों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माणा गांव से अपील की थी कि लोग जब भी पर्यटन के लिए जाएं, तो अपने कुल यात्रा बजट का कम से कम 5 प्रतिशत स्थानीय उत्पादों की खरीद पर खर्च करें. इस सोच के पीछे स्थानीय कारीगरों, ग्रामीणों और छोटे कारोबारियों को सीधे पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ना है. स्थानीय उत्पादों की खरीद बढ़ने से पहाड़ के पारंपरिक हुनर को बाजार मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
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