ग्रेड-ए शहरों से आगे बढ़ेगा वेयरहाउसिंग सेक्टर; ओडिशा, बंगाल और असम जैसे राज्य बन सकते हैं नए ग्रोथ हब: अदाणी पोर्ट्स के पंकज भारद्वाज
नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में वेयरहाउसिंग क्षेत्र की वृद्धि अब केवल बड़े उपभोग केंद्रों और ग्रेड-ए शहरों तक सीमित नहीं रहेगी। अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड के वेयरहाउसिंग एवं अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और बिजनेस हेड पंकज कुमार भारद्वाज ने मंगलवार को कहा कि आने वाले वर्षों में ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्य वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के नए विकास केंद्र बनकर उभर सकते हैं।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में भारद्वाज ने कहा कि विभिन्न राज्य सरकारें निर्माताओं, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और औद्योगिक डेवलपर्स को आकर्षित करने के लिए नई लॉजिस्टिक्स नीतियां लागू कर रही हैं, जिससे उभरते बाजारों में वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के अवसर पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में विकसित हो रहे लगभग 1.3 से 1.4 करोड़ वर्ग फुट वेयरहाउसिंग स्पेस का करीब 60-70 प्रतिशत हिस्सा ग्रेड-ए और ग्रेड-बी शहरों में है। हालांकि भविष्य की रणनीति केवल प्रमुख उपभोग केंद्रों तक सीमित नहीं है।
भारद्वाज ने कहा, हम केवल ग्रेड-ए शहरों पर नहीं, बल्कि बी और सी श्रेणी के शहरों पर भी फोकस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी के पास ऐसे कई स्थानों पर भूमि उपलब्ध है, जहां ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार तैयार वेयरहाउस विकसित किए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि कंपनी बिल्ड-टू-सूट (बीटीएस) मॉडल के तहत भी सुविधाएं विकसित करने की क्षमता रखती है, जिसमें ग्राहक की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वेयरहाउस तैयार किए जाते हैं।
भारद्वाज ने कहा कि कंपनी की रणनीति केवल उपभोग केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्यात-आयात (इग्जिम), बंदरगाह-आधारित और इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) आधारित विकास पर भी केंद्रित है। अदाणी समूह की उपस्थिति दोनों तटों पर 15-16 बंदरगाहों में है, जिसका लाभ भविष्य में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विस्तार में मिलेगा।
उन्होंने आगे आईएएनएस से कहा कि अगले 5 से 10 वर्षों में सरकार के निर्यात बढ़ाने के प्रयासों से बंदरगाह-आधारित वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेवाओं की मांग में तेज वृद्धि हो सकती है।
पूर्वी और दक्षिणी तटों पर कंपनी की रणनीति के बारे में उन्होंने बताया कि धामरा पोर्ट और केरल का विझिंजम पोर्ट कंपनी के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल हैं। विझिंजम पोर्ट तेजी से एक महत्वपूर्ण ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में उभर रहा है।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि कंपनी को हाल ही में पारादीप बंदरगाह में दो बर्थ भी मिली हैं, जिससे पूर्वी तट पर उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी।
भारद्वाज ने कहा कि पूर्वी भारत में वेयरहाउसिंग क्षेत्र का विकास अभी पश्चिमी और उत्तरी भारत की तुलना में अपेक्षाकृत कम हुआ है। ऐसे में ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में आगे चलकर बड़ी वृद्धि देखने को मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि इन राज्यों में बढ़ने वाली लॉजिस्टिक्स गतिविधियां और वेयरहाउसिंग क्षमता न केवल अतिरिक्त कार्गो वॉल्यूम लाएंगी, बल्कि पूरे सप्लाई चेन इकोसिस्टम की लागत को कम करने में भी मदद करेंगी।
पंकज कुमार भारद्वाज ने आगे कहा, कुल मिलाकर, मैं कहूंगा कि सभी राज्य अब इस दिशा में काम कर रहे हैं। हर राज्य एक लॉजिस्टिक्स नीति बना रहा है, जिसके तहत वे अधिक निर्माताओं, साझेदारों और औद्योगिक विकासकर्ताओं को लाना चाहते हैं। इसलिए, हर राज्य एक लॉजिस्टिक्स नीति बना रहा है और आवश्यकता के आधार पर, लोग आगे बढ़कर राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर रहे हैं, ताकि वहां उनके पोर्टफोलियो का विकास किया जा सके।
--आईएएनएस
डीबीपी
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लगातार दूसरे दिन गिरा बाजार, सेंसेक्स 243 अंक फिसला; निफ्टी 22,700 के करीब
ऊंचे कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में अस्थिरता के कारण जोखिम से बचने की भावना को बढ़ावा मिलने से लगातार दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ. हालांकि शुरुआती बिकवाली के बाद बाजार संभलता नजर आया. शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स 1-1 प्रतिशत तक फिसल गए थे. बीएसई सेंसेक्स 242.65 अंक यानी 0.33 प्रतिशत गिरकर 72,529.07 पर आ गया, तो वहीं निफ्टी50 64.05 अंक यानी 0.28 प्रतिशत फिसलकर 22,716.20 पर पहुंच गया.
दिन के कारोबार में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 72,771.72 से 138 अंक यानी 0.18 प्रतिशत गिरकर 72,633.68 पर खुला और एक समय इंट्रा-डे ट्रेड में यह करीब 708 अंक यानी 0.97 प्रतिशत गिरकर 72,064 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया. वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 22,780.25 से मामूली 0.20 प्रतिशत फिसलकर 22,732.45 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय यह 210.6 अंक यानी 0.92 प्रतिशत गिरकर 22,569.65 के निचले स्तर पर पहुंच गया. व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप में क्रमशः 0.99 प्रतिशत और 0.81 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी केमिकल और निफ्टी रियल्टी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जिनमें क्रमशः 2.71 प्रतिशत, 2.31 प्रतिशत और 2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली. इसके बाद निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी एफएमसीजी में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा और निफ्टी मीडिया ने बेहतर प्रदर्शन किया. निफ्टी50 इंडेक्स में सबसे ज्यादा तेजी अदाणी इंटरप्राइजेज और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में रही, जिनमें क्रमशः 5 प्रतिशत और 4.4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई. इसके अलावा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सन फार्मा, इंफोसिस और कोटक बैंक के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली. जबकि इसके विपरीत, टाइटन, विप्रो, एचसीएल टेक, अपोलो हॉस्पिटल, टेक महिंद्रा, बजाज-ऑटो और टीसीएस के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली.
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निफ्टी के टेक्निकल आउटलुक पर बात करते हुए एक मार्केट एक्सपर्ट्स ने कहा कि 23,500-23,600 के जोन में भी खरीदारी में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखी, जिससे बाजार में रिकवरी की कोशिशें धीमी रहीं. ऊपर की तरफ, 22,750–22,800 का लेवल अभी भी तुरंत रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है. एक्सपर्ट ने कहा, "नीचे की तरफ, 22,550-22,600 का लेवल मुख्य इमीडिएट सपोर्ट जोन बना हुआ है, जबकि 22,500 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स 22,300-22,000 के लेवल तक जा सकता है." कमजोरी का असर पूरे बाजार पर दिखा क्योंकि इन्वेस्टर्स ने मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम की. जानकारों का कहना है कि मार्केट में शामिल लोग सतर्क बने हुए हैं क्योंकि एनर्जी की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव निवेश के नज़रिए पर असर डाल रहे हैं. इससे कुछ सेक्टर में मजबूती के बावजूद निवेशक बचाव का रुख अपना रहे हैं.
मार्केट पर नजर रखने वालों का कहना है, "हालांकि जियोपॉलिटिकल तनाव निकट भविष्य में सेंटीमेंट को प्रभावित करते रहेंगे, लेकिन मार्केट का ध्यान धीरे-धीरे क्यू2 की कमाई की ओर बढ़ रहा है, और क्यू1 की तुलना में उम्मीदें पहले ही कम हो गई हैं." एक्सपर्ट ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष में उल्लेखनीय कमी आने से बेहतर रिस्क सेंटीमेंट के कारण जबरदस्त रिलीफ रैली आ सकती है. तब तक, निवेशकों के चुनिंदा रुख अपनाने की संभावना है, जो व्यापक मार्केट एक्सपोज़र के बजाय फंडामेंटल और कमाई की विजिबिलिटी को प्राथमिकता देंगे. इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया ऊंचाई से कुछ प्रॉफिट बुकिंग देखी गई, जिससे रुपया 95.97 के आसपास लगभग सपाट रहा और इसमें करीब 0.10 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई. एक्सपर्ट ने बताया, "रुपए की रेंज 95.65-96.15 के बीच देखी जा सकती है.
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