संभल की Shahi Jama Masjid विवाद मामले में चंदौसी कोर्ट ने सुनवाई 16 अक्टूबर तक टाली
संभल (उप्र) 29 सितंबर उत्तर प्रदेश में संभल जिले की चंदौसी अदालत ने उच्चतम न्यायालय के स्थगनादेश के कारण ‘स्थानीय शाही जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर’ विवाद की सुनवाई 16 अक्टूबर के लिए टाल दी है। एक अधिवक्ता ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उच्चतम न्यायालय ने नवंबर 2024 में संभल की 16वीं शताब्दी की शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण पर अंतरिम स्थगनादेश जारी किया था और निचली अदालत में इस विवाद से जुड़ी सभी कार्यवाहियों पर रोक लगा दी थी।
हिंदू पक्ष के वकील श्रीगोपाल शर्मा ने बताया कि मामला मंगलवार को चंदौसी अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई, क्योंकि शीर्ष अदालत के आदेश की पृष्ठभूमि में मामले पर रोक बरकरार है। अधिवक्ता ने बताया कि यह मामला संभल स्थित चंदौसी के दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) आदित्य सिंह के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन अदालत ने इसे 16 अक्टूबर के लिए टाल दिया है। उन्होंने बताया कि शीर्ष अदालत से अगला आदेश मिलने के बाद ही इस पर आगे सुनवाई होगी।
यह कानूनी विवाद 19 नवंबर 2024 को उस वक्त सामने आया था, जब अधिवक्ता हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन सहित आठ लोगों ने संभल जिला अदालत में एक मुकदमा दायर कर दावा किया कि मस्जिद का निर्माण एक मंदिर के ऊपर किया गया था। इसके बाद 19 नवंबर को ही शाही जामा मस्जिद का सर्वे कराया गया। तत्पश्चात, 24 नवंबर को एक बार फिर एक टीम सर्वे करने पहुंची, लेकिन वहां हिंसा भड़क गई।
संभल की उस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जियाउर्रहमान बर्क, जामा मस्जिद के सदर जफर अली समेत कई नामजद और 2750 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए। मुस्लिम पक्ष ने निचली अदालत के सर्वे आदेश को यह कहते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी कि संबंधित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, लेकिन उच्च न्यायालय ने 19 मई 2025 को अदालत की निगरानी में सर्वेक्षण की अनुमति देने वाले आदेश को बरकरार रखा।
बाद में उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ मामला शीर्ष अदालत पहुंचा था, जिसने स्थगनादेश जारी किया था। उच्चतम न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 25 सितंबर 2026 को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।
Barda जंगल में Asiatic Lions के पुनर्वास को मिली मजबूती, Gujarat सरकार ने किया बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
राज्य सरकार के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गुजरात सरकार ने बरडा जंगल में एशियाई शेरों के पुनर्वास को मज़बूत करने के लिए पोरबंदर वन विभाग का पुनर्गठन किया। 143 साल बाद एशियाई शेर प्राकृतिक रूप से बरडा लौट आए, जिसके बाद राज्य सरकार ने उनके पुनर्वास में मदद के लिए पोरबंदर वन विभाग का पुनर्गठन करने का फ़ैसला किया। वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया और राज्य मंत्री प्रवीण माली की देखरेख में लिए गए इस फ़ैसले का मकसद पोरबंदर ज़िले (जिसमें बरडा भी शामिल है) में वन संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन की ज़िम्मेदारियों को स्पष्ट करना है। साथ ही, इसमें रेंज, बीट, अधिकारियों, कर्मचारियों, वाहनों, हथियारों, वायरलेस उपकरणों और अन्य संसाधनों के प्रशासनिक नियंत्रण में भी बदलाव किए जाएंगे। वन और पर्यावरण विभाग के आधिकारिक प्रस्ताव के अनुसार, इस पुनर्गठन से वन प्रबंधन मजबूत होगा, वन विभाग की योजनाओं को लागू करने में आसानी होगी और वन व पर्यावरण से जुड़े मुद्दों का तेजी से समाधान हो सकेगा। नया ढांचा रेंज, बीट और अधिकारी स्तर पर जिम्मेदारियां तय करता है ताकि पूरे जिले में फील्ड-स्तर के कामकाज को और व्यवस्थित ढंग से किया जा सके। पुनर्गठन के तहत, पोरबंदर रेंज को नए सिरे से तैयार किया गया है, जिसमें 80 गांवों में फैला 6,840.84 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इसे पोरबंदर शहर, गोसाबारा, मोकर, विसावाड़ा, कांटेला, माधवपुर और सतिया जैसी बीटों में बांटा गया है। रानावव रेंज में अब 13,051.25 हेक्टेयर क्षेत्र और 27 गांव शामिल हैं, जिन्हें गोदाना, बिलेश्वर, सावदीवादार और रानावव जैसी बीटों में व्यवस्थित किया गया है। एक और बदलाव के तहत, जामनगर वन डिवीजन के अंतर्गत आने वाली RFW भाटिया रेंज का 305.94 हेक्टेयर क्षेत्र पोरबंदर वन डिवीजन की भानवद रेंज में शामिल किया गया है।
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यह क्षेत्र देवभूमि द्वारका जिले के भानवद तालुका के चार गांवों - कंदरडा जोगना, सजदियाला, जूना और जाम्बुसर - में फैला है, जो अब पोरबंदर वन डिवीजन के प्रशासनिक नियंत्रण में आएंगे। कुटियाना रेंज के साथ-साथ पोरबंदर सोशल फॉरेस्ट्री रेंज और रानावव सोशल फॉरेस्ट्री रेंज को भी पोरबंदर वन डिवीजन के तहत लाया गया है। इसके साथ ही कर्मचारियों की भूमिकाओं में बदलाव और वाहनों, हथियारों, वॉकी-टॉकी, वायरलेस उपकरणों, रिकॉर्ड, कंप्यूटर और फर्नीचर का हस्तांतरण भी किया गया है। पुनर्गठन के बाद, डिवीजन के लिए दो असिस्टेंट कंज़र्वेटर ऑफ़ फॉरेस्ट (ACF) का प्रावधान किया गया है। असिस्टेंट कंज़र्वेटर ऑफ़ फ़ॉरेस्ट-1 पोरबंदर रेंज, पोरबंदर सोशल फ़ॉरेस्टी रेंज और रानावव सोशल फ़ॉरेस्टी रेंज की देखरेख करेंगे, जबकि असिस्टेंट कंज़र्वेटर ऑफ़ फ़ॉरेस्ट-2 रानावव रेंज, भानवद रेंज, कुटियाना रेंज और मोबाइल स्क्वाड (T.A.) रेंज की ज़िम्मेदारी संभालेंगे। कुटियाना, पोरबंदर सोशल फ़ॉरेस्टी और रानावव सोशल फ़ॉरेस्टी रेंज के जुड़ने से, पोरबंदर फ़ॉरेस्ट डिवीज़न में अब कुल सात रेंज हो जाएंगी। इस बढ़े हुए ढांचे को सहारा देने के लिए, केवड़िया के स्वीकृत दो पदों में से असिस्टेंट कंज़र्वेटर ऑफ़ फ़ॉरेस्ट का एक खाली पद पोरबंदर फ़ॉरेस्ट डिवीज़न में ट्रांसफ़र कर दिया गया है।
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