Delhi में FCRA पंजीकरण के नाम पर घूसखोरी, गृह मंत्रालय के दो अधिकारी पकड़े गए
दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के तहत एक संस्था का पंजीकरण कराने में मदद करने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में गृह मंत्रालय के दो अधिकारियों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। गृह मंत्रालय के अनुसार, दो अधिकारियों- एक वरिष्ठ लेखाकार और एक लेखाकार- को 28 सितंबर को दिल्ली में पकड़ा गया।
मंत्रालय ने कहा कि उनमें से एक वर्तमान में गृह मंत्रालय के विदेशी प्रभाग में तैनात है, जबकि दूसरा वर्तमान में वेतन एवं लेखा कार्यालय में तैनात है और वह इससे पहले विदेशी प्रभाग में सेवाएं दे चुका है। मंत्रालय ने बताया कि शुरुआती पूछताछ से खुलासा हुआ है कि ये दोनों अधिकारी कुछ संस्थाओं के कथित तौर पर संपर्क में थे और एफसीआरए के तहत उनके पंजीकरण और नवीनीकरण में मदद करने के लिए रिश्वत की मांग करते थे। गृह मंत्रालय ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है और आरोपी अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
मंत्रालय ने भ्रष्टाचार के प्रति अपनी कतई बर्दाश्त न करने की नीति को दोहराया और कहा कि एफसीआरए से जुड़ी सभी सेवाएं एफसीआरए पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रदान की जाती हैं। मंत्रालय ने कहा, किसी भी मध्यस्थ, एजेंट या व्यक्ति को किसी भी एफसीआरए सेवा में मदद करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।
Poshan Maah 2026: Gujarat में 2.43 करोड़ पोषण गतिविधियां, Mahisagar और Valsad आगे
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की देखरेख में, गुजरात सरकार पूरे राज्य में "अपनी आंगनवाड़ी, अपनी जिम्मेदारी" की भावना के साथ 'पोषण माह-2026' मना रही है। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री मनीषाबेन वकील ने राज्यव्यापी समारोहों की शुरुआत की। पोषण को जन-आंदोलन बनाने के मकसद से चलाए जा रहे इस अभियान में संबंधित विभागों, स्थानीय निकायों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों, स्वयं-सहायता समूहों, अभिभावकों और आम लोगों को शामिल करते हुए कई तरह की गतिविधियां की जा रही हैं। 27 सितंबर, 2026 तक, गुजरात में पोषण से जुड़ी 2.43 करोड़ से ज़्यादा गतिविधियां दर्ज की गई हैं, जिससे राज्य देश भर में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। इनमें से महिला एवं बाल विकास विभाग ने 56.13 लाख गतिविधियां कीं, जबकि अन्य संबंधित विभागों ने लगभग 1.87 करोड़ गतिविधियां पूरी कीं।
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इन गतिविधियों में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, आयुष विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पंचायत विभाग और शिक्षा विभाग सबसे ज़्यादा योगदान देने वाले पांच विभागों के तौर पर उभरे हैं। इसके अलावा, गतिविधियों के मामले में राज्य के प्रमुख जिलों के तौर पर महीसागर, वलसाड, पाटन, आणंद और मेहसाणा सामने आए हैं। वलसाड जिले में, जिला कलेक्टर ने बड़े पैमाने पर 'पोषण जागृति रैली' को हरी झंडी दिखाई। 'पोषण माह' के दौरान, खान-पान में विविधता और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए खास कोशिशें की जा रही हैं। इसमें स्थानीय स्तर पर मिलने वाले पौष्टिक खाद्य पदार्थों, मोटे अनाज (मिलेट्स), दालों, हरी सब्जियों, फलों, दूध, नट्स और बीजों पर ज़ोर दिया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के तहत पौष्टिक रेसिपी का प्रदर्शन, THR और मोटे अनाज से बनी डिश की प्रदर्शनी, पोषण मेले और संतुलित आहार के बारे में जानकारी देने जैसे आयोजन किए जा रहे हैं। सूरत जिले में कॉलेज के छात्र भी स्वस्थ आहार और जंक फूड के नुकसान के बारे में जागरूकता फैला रहे हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों को सिर्फ़ सेवा केंद्रों से बदलकर पोषण और बच्चों के शुरुआती विकास के सक्रिय केंद्रों के तौर पर विकसित किया जा रहा है, जहाँ अच्छी क्वालिटी का, साफ़-सुथरा, ताज़ा और गर्म खाना दिया जाता है। आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों को सक्रिय करके, SNP मेनू बोर्ड लगाकर और "मारी आंगनवाड़ी, मारी जवाबदारी" (मेरी आंगनवाड़ी, मेरी ज़िम्मेदारी) के तहत समुदाय की भागीदारी को मज़बूत किया जा रहा है।
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बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिनों और पहले छह सालों के दौरान बच्चों की शुरुआती देखभाल और शिक्षा, शुरुआती स्टिमुलेशन और सही देखभाल के बारे में जानकारी दी जा रही है। नियमित रूप से वज़न और लंबाई मापना, 'पोषण ट्रैकर' पर रजिस्ट्रेशन और कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान जैसे काम किए जा रहे हैं। साथ ही, 'पोषण संगम' जैसी पहलों के ज़रिए स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर रेफरल और इलाज की व्यवस्था की जा रही है। 2026 में 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' के 10 साल पूरे होने के मौके पर, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के रजिस्ट्रेशन को बढ़ाने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। गुजरात सरकार पोषण को सिर्फ़ एक महीने तक चलने वाली गतिविधि नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की जीवनशैली और सामूहिक सामाजिक ज़िम्मेदारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि एक "सुपोषित गुजरात" बनाया जा सके।
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