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दिल्लीवासियों को मिली बड़ी सौगात: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया बारापुल्ला फेज-3 कॉरिडोर-मुकरबा चौक अंडरपास का उद्घाटन

Amit Shah Inaugurates Barapullah Corridor: दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए एक राहतभरी खबर सामने आई है। दरअसल राजधानी में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तैयार बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर और मुकरबा चौक अंडरपास का आज 29 सितंबर मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उद्घाटन कर दिया।

इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और PWD मंत्री प्रवेश वर्मा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सीएम रेखा गुप्ता ने बधाई देते हुए लोगों को संबोधित किया।  

ऐसा कहा जा रहा है कि बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर के शुरू हो जाने से पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच लोगों का आवागमन आसान बनेगा। इसके साथ ही लोगों को मयूर विहार से AIIMS तक करीब 10 किलोमीटर का सिग्नल-फ्री रास्ता मिलेगा।  

कॉरिडोर 4.9 किलोमीटर लंबा

बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर को सराय काले खां से मयूर विहार फेज-1 तक तैयार किया गया है। इसकी मुख्य लंबाई 3.5 किलोमीटर है, जबकि रैंप और लूप को जोड़ने के बाद इसकी कुल लंबाई करीब 4.9 किलोमीटर हो जाती है।

6 लेन वाले इस कॉरिडोर में दोनों तरफ तीन-तीन लेन बनाई गई हैं। कॉरिडोर को केवल वाहनों के लिए ही नहीं बल्कि पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें साइकिल ट्रैक और फुटपाथ की सुविधा भी दी गई है।  

सफर में 25 मिनट की होगी बचत

इस कॉरिडोर के शुरू हो जाने से मयूर विहार फेज-1 और नोएडा से AIIMS तक करीब 10 किलोमीटर का सिग्नल-फ्री कॉरिडोर की सुविधा मिलेगी। इससे दक्षिण और पूर्वी दिल्ली के बीच सफर करने वाले लोगों को कई ट्रैफिक सिग्नलों से राहत मिलने की संभावना है।

व्यस्त समय में इस रूट पर यात्रा के दौरान करीब 20 से 25 मिनट तक की बचत होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा INA और IIT दिल्ली की ओर जाने वाले लोगों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।

दिल्ली का विकास ठप कर दिया-सीएम रेखा गुप्ता

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी परियोजना को पूरा होने पर अधिकारियों और संबंधित विभागों के प्रयासों की सराहना की।  सीएम रेखा गुप्ता ने गृह मंत्री के पहुंचने से पहले कार्यक्रम में मौजूद लोगों से कहा कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, दिल्ली का विकास ठप कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने यह पुलिस रोक कर रखा हुआ था।  

इसे आगे नहीं बढ़ाया जा रहा था, पैसा मिलने के बाद भी उस सरकार ने  काम को पूरा नहीं किया। हमारी सरकार आने के बाद तमाम झंझट दूर किए गए और काम को आगे बढ़ाया गया आज इसे जनता को समर्पित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम अगले 5 साल में आप सब के सहयोग से इतना काम कर देंगे इतने विकास कार्य कर देंगे जो पिछली सरकार ने 50 साल में भी नहीं किए होंगे।

परियोजना का निर्माण करीब 11 साल से चल रहा-PWD मंत्री प्रवेश वर्मा

PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने कार्यक्रम में कहा कि  इस परियोजना का निर्माण करीब 11 साल से चल रहा था। उन्होंने बताया कि सरकार बनने के कुछ समय बाद उन्होंने मौके का निरीक्षण किया और लंबित कामों की स्थिति को समझा। उनके अनुसार, परियोजना में कई NOC और जरूरी अनुमतियों से जुड़े मामले लंबित थे। इन्हें दूर करने के बाद निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया गया।

उन्होंने आगे कहा कि यह केवल एक पुल का शुभारंभ नहीं है, यह दिल्ली के लोगों के टैक्स के पैसे से बनने वाली उस योजना का भी शुभारम्भ है जिसे, पिछ्ली सरकार ने रोक कर रख दिया था।

सबसे पहले मैंने पुल का निरीक्षण किया-प्रवेश वर्मा

हमारी सरकार बनने के बाद सबसे पहले मैंने इस पुल का निरीक्षण किया था, तब अधिकारियों ने कहा था कि पहली बार कोई मंत्री है जो इस पुल को निरिक्षण करने आया है, पिछली सरकार में यहां कोई देखने तक नहीं आया।

इससे पहले की सरकार में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने शीश महल में सोते थे और कोई देखने तक नहीं जाता था कहां क्या काम हो रहा है। केंद्रीय राज्य मंत्री व दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि हमारी सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में लगातार दिल्ली का विकास हो रहा है।

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SEBI ने Vinod Adani और 11 पक्षों को दी राहत, शेयरधारिता मामले में बंद की जांच

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा है कि वह अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के भाई विनोद अदाणी और 11 अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) तथा धोखाधड़ी के आरोपों को आगे नहीं बढ़ाएगा। सेबी के 28 सितंबर के अंतिम आदेश में कहा गया है कि बाजार नियामक यह स्थापित नहीं कर सका कि विनोद अदाणी का समूह की चार कंपनियों में निवेश करने वाले दो विदेशी कोषों पर नियंत्रण था। इस 81 पृष्ठ के अंतिम आदेश में सेबी ने कहा कि उसकी जांच यह साबित करने में विफल रही कि विनोद अदाणी ने दो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) — इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड्स (ईआईएफएफ) और ईएम रिसर्जेंट फंड (ईएमआर) के निवेश संबंधी फैसलों का निर्देश दिया था या ओपल इन्वेस्टमेंट्स के अदाणी पावर लिमिटेड में निवेश को नियंत्रित किया था।

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने आदेश में कहा, ‘‘जांच में यह साबित नहीं हो सका कि विनोद अदाणी ने दोनों एफपीआई के निवेश संबंधी फैसलों को नियंत्रित किया।’’ मामला न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) की आवश्यकता से जुड़ा था, जिसके तहत सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास होना जरूरी है। सेबी ने कहा कि एमपीएस का उल्लंघन तब माना जाता, जब सार्वजनिक शेयरधारकों के पास मौजूद शेयरों का वास्तविक स्वामित्व या नियंत्रण किसी प्रवर्तक या प्रवर्तक समूह के पास हो और उन्हें प्रवर्तक की हिस्सेदारी में गिने जाने पर सार्वजनिक हिस्सेदारी निर्धारित सीमा से कम हो जाए। बाजार नियामक ने कहा कि यह आरोप नहीं था कि विनोद अदाणी या प्रवर्तक समूह दो एफपीआई या ओपल के नाम पर रखे गए शेयरों के वास्तविक लाभार्थी मालिक थे।

आरोप यह था कि विनोद अदाणी ने निवेश संबंधी फैसलों का निर्देश देकर उन शेयरों को नियंत्रित किया। सेबी ने कहा कि हालांकि, वास्तविक नियंत्रण साबित करने के लिए ऐसे साक्ष्य जरूरी हैं, जिनसे यह पता चले कि कोई व्यक्ति प्रबंधन या नीतिगत फैसलों का प्रत्यक्ष रूप से निर्देश देता है। इसे केवल संदेह या कारोबारी अथवा वित्तीय संबंधों के आधार पर नहीं माना जा सकता।

आदेश में कहा गया, ‘‘केवल कारोबारी या वित्तीय संबंधों के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि विनोद अदाणी इन सभी पर नियंत्रण रखते हैं।’’ नियामक को इस बात का भी कोई सबूत नहीं मिला कि विनोद अदाणी ने नासिर अली शाबान अहली या चांग चुंग-लिंग को नियंत्रित किया और उनके जरिये अदाणी समूह की कंपनियों में निवेश करने वाले संबंधित निवेशकों के फैसलों को प्रभावित किया। सेबी ने कहा, ‘‘इस तरह के किसी भी निष्कर्ष के पूंजी बाजार में विभिन्न प्रतिभूति कानूनों के कार्यान्वयन पर अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं।’’ आरोप था कि गल्फ एशिया, लिंगो, गल्फ अरिज और मिड-ईस्ट के निवेश को अंततः कई स्तर वाली कंपनियों के जरिये नासिर अली शाबान अहली ने वित्तपोषित किया था। साथ ही, अदाणी समूह की कंपनियों के शेयर खरीदने के लिए निवेश संबंधी सलाह एक्सेल इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी सर्विसेज लिमिटेड (एक्सेल) ने दी थी, जिस पर विनोद अदाणी के नियंत्रण में होने का आरोप था।

यह भी आरोप था कि एक्सेल ने जीओएफएल के निवेश प्रबंधक ग्लोबल मैक्रो एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (जीएमएएमएल) के साथ एक निवेश सलाहकार समझौता किया था। इसके तहत एक्सेल ने संबंधित निवेशकों से जुड़े निवेश के बारे में जीएमएएमएल को सलाह दी। सेबी ने हालांकि कहा कि विनोद अदाणी के नियंत्रण वाली एक्सेल और दोनों एफपीआई के लिए निवेश संबंधी फैसले लेने वाली जीएमएएमएल के बीच सलाहकार समझौता ऐसे नियंत्रण को साबित नहीं करता।

समझौते में स्पष्ट था कि सलाह बाध्यकारी नहीं होगी और उसका संबंध एक्सेल की समूह कंपनियों से नहीं होगा। जांच में भी इस प्रावधान के विपरीत सलाह दिए जाने का कोई सबूत नहीं मिला। सेबी ने यह भी कहा कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे दोनों एफपीआई के निवेश संबंधी फैसलों में विनोद अदाणी की भागीदारी साबित हो।

आदेश में कहा गया, ‘‘अदाणी समूह की कंपनियों में निवेशकों के प्रबंधन या नीतिगत फैसलों को प्रत्यक्ष रूप से निर्देश देने के पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में एमपीएस आवश्यकता का उल्लंघन साबित नहीं हुआ।’’ एमपीएस संबंधी आरोप साबित नहीं होने के बाद धोखाधड़ी व अनुचित व्यापार व्यवहार रोकथाम (पीएफयूटीपी) नियमों के तहत लगाए गए संबंधित आरोप भी टिक नहीं पाए। सेबी ने कहा, ‘‘एक बार एमपीएस के उल्लंघन का आरोप विफल हो जाता है, तो पीएफयूटीपी नियमों के तहत लगाया गया बाद का आरोप भी कायम नहीं रहता।’’ बाजार नियामक ने हालांकि, सही और पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के लिए नासिर अली शाबान अहली और चांग चुंग-लिंग पर 20-20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। तीसरे संबंधित पक्ष तेजल रमनलाल देसाई को इस आरोप के लिए दोषी नहीं पाया गया।

दोनों को जुर्माने का भुगतान आदेश मिलने के 45 दिन के भीतर करना होगा। अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, अदाणी पावर लिमिटेड, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकॉनमिक जोन लिमिटेड और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (जिसे पहले अदाणी ट्रांसमिशन के नाम से जाना जाता था) तथा गौतम अदाणी और 13 अन्य निदेशकों ने अलग से बिना किसी दोष को स्वीकार किए एमपीएस संबंधी कार्यवाही का निपटारा कर लिया था। निपटान राशि के रूप में 1,48,20,000 रुपये का भुगतान 26 अगस्त, 2026 को किया गया था।

सेबी ने कहा कि सोमवार के आदेश से इस निपटान पर कोई असर नहीं पड़ा।

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