Asian Games: रुड़की की बेटी प्रवीण हुडा फाइनल में, चीन की बॉक्सर को दी 5-0 से मात, भारत का सिल्वर पक्का
Asian Games: एशियन गेम्स 2026 में रोहतक जिले के गांव रुड़की की बेटी प्रवीण हुडा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला 65 किलोग्राम बॉक्सिंग वर्ग के फाइनल में प्रवेश कर लिया है। सेमीफाइनल मुकाबले में प्रवीण ने चीन की एशियन चैंपियनशिप ब्रॉन्ज मेडलिस्ट ली शू (Li Shu) को 5-0 के सर्वसम्मत निर्णय से हराया।
प्रवीण हुडा जीत के साथ रजत पदक हुआ पक्का
प्रवीण हुडा की इस जीत के साथ भारत का इस वर्ग में कम से कम रजत पदक पक्का हो गया है। अब फाइनल में उनका मुकाबला विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक की ब्रॉन्ज पदक विजेता चेन निएन-चिन (Chen Nien-chin) ताइवान से होगा। प्रवीण की नजर अब स्वर्ण पदक पर है।
खेल प्रेरक हरियाणा अधिवक्ता ने दी बधाई
खेल प्रेरक हरियाणा अधिवक्ता राजनारायण पंघाल ने प्रवीण हुडा को एशियन गेम्स के फाइनल में पहुंचने पर बधाई देते हुए कहा कि गांव रुड़की की इस बेटी ने पूरे रोहतक और हरियाणा का नाम गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि प्रवीण की यह उपलब्धि प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है।
पंघाल ने कहा कि प्रवीण ने सेमीफाइनल में जिस आत्मविश्वास और आक्रामक बॉक्सिंग का प्रदर्शन किया, वह उनकी मेहनत और मजबूत वापसी को दर्शाता है। अब पूरे हरियाणा की निगाहें फाइनल मुकाबले पर रहेंगी।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिलाई पहचान
रुड़की गांव से एशियन गेम्स के बॉक्सिंग फाइनल तक पहुंची प्रवीण हुडा ने रोहतक की खेल प्रतिभा को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई है। अब देशवासियों को उनसे स्वर्ण पदक की उम्मीद है।
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एशियाई खेल: टिन के डिब्बों पर निशाना लगाने वाली नीरू ने जीता गोल्ड, जानिए किससे मिली शूटिंग की प्रेरणा
एक समय परिवार की डबल-बैरल बंदूक से टिन के डिब्बों पर निशाना लगाने वाली नीरू ढांडा ने अब एशियाई खेलों में भारत के लिए इतिहास रच दिया है। 26 साल की आर्मी शूटर ने मंगलवार को महिलाओं के ट्रैप इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
नीरू ने बारिश के बीच फाइनल में 30 में से 28 शॉट निशाने पर लगाए और नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया। लेकिन उनके इस गोल्ड की कहानी सिर्फ एक शानदार फाइनल तक सीमित नहीं है। इसके पीछे परिवार से मिली प्रेरणा, शुरुआती दिनों की साधारण ट्रेनिंग और वर्षों की मेहनत की कहानी है। आखिर नीरू को शूटिंग में आने की प्रेरणा किससे मिली?
टिन के डिब्बों पर निशाना लगाने से शुरू हुआ सफर
नीरू के शूटिंग करियर की शुरुआत किसी प्रोफेशनल रेंज से नहीं हुई थी। परिवार की डबल-बैरल बंदूक से टिन के डिब्बों पर निशाना साधते-साधते उनका रुझान शूटिंग की ओर बढ़ा। शुरुआती दिनों में उनके पिता ने उन्हें बंदूक के रिकॉइल को संभालने में मदद की।
नीरू को शूटिंग की प्रेरणा किससे मिली?
शूटिंग के प्रति नीरू की दिलचस्पी उनके कजिन लक्ष्य श्योराण को देखकर बढ़ी। लक्ष्य खुद ट्रैप शूटर हैं और 2018 एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। उन्हें प्रतियोगिता में देखकर नीरू ने इस खेल को गंभीरता से अपनाना शुरू किया।
कजिन लक्ष्य श्योराण बने शुरुआती प्रेरणास्रोत
लक्ष्य ने नीरू के शुरुआती करियर में भी अहम भूमिका निभाई। नीरू ने उनके साथ ट्रेनिंग की और शुरुआती दौर में उनकी बंदूक का इस्तेमाल भी किया। परिवार में मौजूद शूटिंग के माहौल ने नीरू को इस खेल में आगे बढ़ने का रास्ता दिया।
परिवार की बंदूक से मध्य प्रदेश शूटिंग अकादमी तक
शुरुआती अभ्यास के बाद नीरू ने 2019 में मध्य प्रदेश शूटिंग अकादमी ज्वाइन की। यहीं से उनके शूटिंग करियर ने व्यवस्थित और प्रोफेशनल दिशा पकड़ी और वह धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं।
30 में 28 शॉट और नया एशियाई रिकॉर्ड
फाइनल में नीरू ने दबाव और बारिश के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 30 में से 28 शॉट लगाए और पुराने एशियाई रिकॉर्ड को चार शॉट से बेहतर किया। चीन की सुन युनोंग ने सिल्वर और कुवैत की हजर अब्दुलमलिक ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।
नीरू ने भारत को दिलाया ऐतिहासिक ट्रैप गोल्ड
नीरू का गोल्ड इसलिए भी खास है क्योंकि एशियाई खेलों के महिलाओं के व्यक्तिगत ट्रैप इवेंट में यह भारत का पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल है। वह पहले ही भारतीय महिला टीम के साथ सिल्वर मेडल जीत चुकी थीं।
वर्ल्ड कप गोल्ड के बाद Asian Games में भी कमाल
नीरू ने 2026 में इटली के लोनाटो में महिलाओं के ट्रैप इवेंट में व्यक्तिगत ISSF वर्ल्ड कप गोल्ड जीतकर इतिहास रचा था। अब एशियाई खेलों में गोल्ड जीतकर उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है।
जींद से Army Marksmanship Unit तक का सफर
हरियाणा के जींद की रहने वाली नीरू फिलहाल कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस में नायब सूबेदार हैं और महू स्थित Army Marksmanship Unit में ट्रेनिंग करती हैं। उनका सफर परिवार की बंदूक और टिन के डिब्बों से शुरू होकर एशियाई खेलों के गोल्ड तक पहुंचा है।
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