CEC Gyanesh Kumar के फैसलों की SIT जांच की मांग, याचिकाओं पर अगले हफ्ते सुनवाई पर सहमत हुए CJI
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका पर अगले हफ़्ते सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके काम करने से रोकने की मांग की गई है। यह याचिका उन रिपोर्टों के बाद दायर की गई है जिनमें कहा गया है कि उन्होंने दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफ़ा फ़ैसले लिए। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सीनियर वकील विकास सिंह के अनुरोध पर इस मामले को अगले हफ़्ते लिस्ट करने पर सहमति जताई। वकील ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के चुनाव आयोग (ECI) के फ़ैसले सर्वसम्मति से या बहुमत से होने चाहिए। सीनियर वकील ने कहा लेकिन ECI ने जिस तरह से काम किया है, उससे शक पैदा होता है। अगर ECI ने सर्वसम्मति से फ़ैसला नहीं लिया है, तो यह एक गंभीर मामला है।
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याचिका में कोर्ट से यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि आरोपों की जांच के लिए पिछले साल अक्टूबर से लिए गए फ़ैसलों का पूरा रिकॉर्ड मंगाया जाए। इसमें कहा गया है कि अगर आरोप पहली नज़र में सही पाए जाते हैं, तो कोर्ट मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक पैनल या स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बना सकता है। सोशल एक्टिविस्ट राकेश कुमार सिंह की याचिका में 'इंडियन एक्सप्रेस' की हालिया रिपोर्ट का ज़िक्र किया गया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में भारत निर्वाचन आयोग के फ़ैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई। इन फ़ैसलों और आदेशों में मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने के साथ-साथ वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में बदलाव भी शामिल थे।
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इन खुलासों को देखते हुए, याचिका में सभी रिकॉर्ड, फ़ाइलें, नोटिंग वगैरह को सुरक्षित रखने और यह निर्देश देने की मांग की गई कि ज्ञानेश कुमार मौजूदा याचिका पर अंतिम सुनवाई होने तक भारत के CEC (मुख्य चुनाव आयुक्त) के तौर पर काम न करें। इसमें यह भी मांग की गई कि ECI का कामकाज दोनों चुनाव आयुक्तों के सर्वसम्मत फ़ैसले से चलाया जाए।
याचिका में उस अधिकार पर सवाल उठाया गया जिसके तहत CEC ने एकतरफ़ा फ़ैसला लिया, क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 324, जो ECI के कामकाज को नियंत्रित करता है, आयोग की सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति की बात करता है। आयोग को कई सदस्यों वाली एक सामूहिक संस्था के तौर पर देखा जाता है। याचिका में 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023' की धारा 18 का भी ज़िक्र किया गया है, जिसके अनुसार असहमति की स्थिति में बहुमत की राय को ही माना जाना चाहिए।
Mallikarjun Kharge ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और PM Modi के इस्तीफे की मांग की
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘‘सत्तापक्ष को फायदा पहुंचाने’’ का आरोप लगाया और कहा कि उन पर यह सब करने हेतु दबाव डालने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए। खरगे ने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी की लड़ाई किसी दल, संस्था या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकार, संविधान और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए है।
उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सुरक्षा की पहली शर्तों में से एक है।’’ खरगे ने सवाल किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का फैसला किसने लिया और दो चुनाव आयुक्तों को ‘इंटरनल पोर्टल’ से बाहर क्यों रखा गया? खरगे ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और निर्वाचन आयुक्तों के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में संबंधित सीईसी को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें तत्काल हटाया जाना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री के दबाव के कारण ऐसा हुआ है और ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी को खुद नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और इससे योग्य नागरिकों के मताधिकार पर असर पड़ने की आशंका है। खरगे ने कहा कि लोकतंत्र में हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित होना चाहिए और प्रत्येक वोट की निष्पक्ष गणना होनी चाहिए।
उन्होंने संविधान सभा में डॉ. बी. आर. आंबेडकर द्वारा मताधिकार को लोकतंत्र की ‘‘सबसे मौलिक चीज’’ बताए जाने का उल्लेख किया और कहा कि मतदाता सूची में शामिल किए जाने वाले किसी योग्य व्यक्ति को किसी अधिकारी की मनमर्जी के आधार पर बाहर नहीं किया जाना चाहिए। खरगे ने कहा, कांग्रेस ने देश में ऐसी संस्थाओं के निर्माण और उन्हें स्वतंत्र एवं अधिकार-संपन्न बनाने में भूमिका निभाई है, लेकिन आज इन संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे सवाल इन संस्थाओं को कमजोर करने के इरादे से नहीं होते।
हम तो चाहते हैं कि चुनाव आयोग इतना मजबूत और विश्वसनीय हो कि सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों उसके निर्णयों पर समान भरोसा करें।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी की ओर से पांच मांगें भी रखीं। इनमें मतदाता सूची में होने वाले बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक करना, जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं उन्हें इसकी सूचना और अपील का अवसर देना, राजनीतिक दलों को मतदाता सूची से संबंधित आवश्यक डेटा समय पर उपलब्ध कराना, गंभीर विसंगतियों के मामलों में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों और फैसलों में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। खरगे ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश के मतदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट सुरक्षित है।
उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दे उठाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कर्नाटक तथा हरियाणा और महाराष्ट्र में मतदाता आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए थे। खरगे ने दावा किया कि राहुल गांधी ने डुप्लीकेट मतदाताओं, संदिग्ध पतों, एक ही पते पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम और फॉर्म-6 से जुड़ी प्रविष्टियों को लेकर दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से इन मुद्दों को लेकर ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर किए गए प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी चुनाव को केवल जीत या हार की लड़ाई के रूप में नहीं देखती। उनके मुताबिक, चुनाव आते-जाते रहते हैं और सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान स्थायी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति एक आम मतदाता है, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या सत्ता में बैठा नेता नहीं।’’ खरगे ने आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी कि किसी मतदाता का अधिकार न छीना जाए और हर व्यक्ति का वोट सुरक्षित रहे।
उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनावों से ही जनता का चुनाव प्रक्रिया में विश्वास बना रह सकता है और तभी देश का भविष्य सुरक्षित तथा लोकतंत्र मजबूत रहेगा। खरगे ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी निशाना साधते हुए नोटबंदी का जिक्र किया और आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का सबसे अधिक असर गरीबों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि गरीबों के पास अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सबसे बड़ी ताकत उनका वोट है और कांग्रेस उसे ‘‘किसी हाल में छिनने नहीं देगी।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए ‘‘सड़क से संसद तक’’ अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
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